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स्वतंत्रता दिवस 2018: नीतियों से ज्यादा राजनीति पर आधारित रहेगा पीएम मोदी का भाषण...

लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र पीएम मोदी इस बार अपने भाषण से सियासी बिसात बिछाएंगे. इस बार उनका भाषण राजनीति पर ज्यादा फोकस रहेगा और पॉलिसी पर कम बात होगी

Updated On: Aug 14, 2018 12:04 PM IST

FP Staff

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स्वतंत्रता दिवस 2018: नीतियों से ज्यादा राजनीति पर आधारित रहेगा पीएम मोदी का भाषण...

भारत की आजादी को 71 साल पूरे हो जाएंगे. बुधवार को देश 72वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा. परंपरा के अनुसार, इस दिन लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री देश को संबोधित करते हैं. प्रधानमंंत्री के तौर पर नरेंद्र मोदी अपने इस कार्यकाल में आखिरी बार राष्ट्र को संबोधित करेंगे. अपने पिछले भाषणों में पीएम मोदी ने एनडीए सरकार की पॉलिसी और विदेश नीति पर ही फोकस रखा. चूंकि इस कार्यकाल में प्रधानमंत्री उनका आखिरी भाषण होगा. लिहाजा ऐसा माना जा रहा है कि आने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनज़र पीएम मोदी इस बार अपने भाषण से सियासी बिसात बिछाएंगे. इस बार उनका भाषण राजनीति पर ज्यादा फोकस रहेगा और पॉलिसी पर कम बात होगी.

प्रधानमंत्री बनने के बाद से नरेंद्र मोदी 2014, 2015, 2016 और 2017 में स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से देश को संबोधित कर चुके हैं. चारों बार उन्होंने लाल किले की प्राचीर से कोई न कोई बड़ी स्कीम या लोक लुभावन योजना की घोषणा की. स्वच्छ भारत अभियान, मेक इन इंडिया, स्टार्ट अप एंड स्टैंड अप इंडिया, वन रैंक वन पेंशन, गांवों में बिजली पहुंचाना और योजना आयोग को बदलकर नीति आयोग बनाना, ये सभी घोषणाएं 15 अगस्त को ही हुई हैं.

इसलिए हर साल 15 अगस्त पर लाल किले से दिए गए प्रधानमंत्री के भाषण सिर्फ नीतियों के घोषणाओं के लिहाज से महत्वपूर्ण नहीं हैं, बल्कि इसकी राजनीतिक क्षमता पर भी गौर किया जाना चाहिए. बुधवार को आज़ादी के जश्न के मौके पर पीएम मोदी लाल किले से क्या कहेंगे, इसका सटीक अनुमान नहीं लगाया जा सकता. लेकिन उनके भाषणों का एक खास पैटर्न है.

अगर उनके पिछले भाषणों पर गौर करें, तो एक दिलचस्प पैटर्न सामने आता है. पीएम अपने भाषण की शुरुआत आम विषयों से करते हैं. फिर धीरे-धीरे अपनी सरकार की नीतियों पर आते हैं. उसके बाद अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हैं. फिर कोई बड़ी पॉलिसी का ऐलान करते हैं. आखिर में विपक्ष का नाम लिए बिना अपनी बात भी कह जाते हैं. फिर वापस आम विषयों पर आकर उनका भाषण खत्म होता है.

पीएम मोदी के पिछले भाषणों की खास बातें:-

2014

>>नरेंद्र मोदी ने बतौर प्रधानमंत्री 2014 में पहला भाषण दिया था. मोदी तब लोकसभा चुनाव में एनडीए को मिले प्रचंड जनादेश से उत्साह से भरे हुए थे. लाल किले की प्राचीर से उन्होंने कहा था, 'मैं यहां प्रधानमंत्री के तौर पर नहीं आया हूं, बल्कि प्रधान सेवक के तौर पर आया हूं. मैं देश का प्रधानमंत्री नहीं हूं. देश का प्रधानसेवक हूं.'

>> 'स्वच्छ भारत अभियान' का ऐलान करते हुए पीएम मोदी ने कहा था, 'मैं लाल किले से गंदगी और टॉयलेट के बारे में बात कर रहा हूं. मैं नहीं जानता कि लोग इसके लिए मेरी प्रशंसा करेंगे या नहीं. लेकिन, मैं एक गरीब परिवार से आया हूं... मैं सभी सांसदों ने अपील करता हूं कि वो अपने एक साल के फंड का इस्तेमाल टॉयलेट बनवाने में करें. हमें यह सुनिश्चित करना है कि हर सड़क, स्कूल, दफ्तर, मोहल्ला और पड़ोस में स्वच्छता हो, सफाई हो... ये शर्म की बात है कि महिलाओं को खुले में शौच जाने के लिए अंधेरे का इंतजार करना पड़ता है.'

>>इस भाषण में पीएम मोदी ने सांसदों से अपने संसदीय क्षेत्र के एक गांव को गोद लेने की अपील भी की थी. मोदी ने कहा था, 'आज मैं संसद के नाम पर एक योजना का ऐलान करने जा रहा हूं. ये योजना गांवों के लिए हैं. इसका नाम है सांसद आदर्श ग्राम योजना... अगर हमें भारत का विकास करना है, तो सबसे पहले गांवों का विकास करना होगा...अगले पांच साल के आखिर तक हर सांसद कम से कम पांच गांवों को आदर्श गांव बनाएंगे.

>>इस भाषण में ही पीएम मोदी ने जन धन योजना की शुरुआत की थी. उन्होंने कहा था, 'आज हमारे अन्नदाता हमारे किसान कर्ज की वजह से आत्महत्या कर रहे हैं. हम गरीबों और किसानों को बैंक खाते का फायदा पहुंचाना चाहते हैं. 'प्रधानमंत्री जन धन योजना' किसानों और गरीबों के लिए है. इसके तहत गरीबों को एक लाख तक का बीमा मिलेगा.'

>>पीएम मोदी ने इसी साल 'मेक इन इंडिया' और 'डिजिटल इंडिया' कैंपेन लॉन्च की थी.

यहां ये जानना रोचक होगा कि मोदी के नाम ही लाल किले से सबसे लंबा भाषण देने का रिकॉर्ड जुड़ा है. 2016 में उन्होंने 94 मिनट तक राष्ट्र को संबोधित किया था. अब ये देखना होगा कि प्रधानमंत्री इस बार कितने मिनट तक भाषण देंगे?

2015

>>दूसरे साल पीएम मोदी ने अपना भाषण गांवों के विकास, किसान और युवाओं पर फोकस रखा. उन्होंने ऐलान किया कि 2022 तक सभी गांवों तक बिजली पहुंच जाएगी. अभी तक 18, 500 गांवों में बिजली नहीं हैं, यहां अगले 1000 दिनों के अंदर बिजली का बल्ब जलने लगेगा.'

>>इसी साल पीएम ने किसान मामलों के लिए अलग से किसान कल्याण मंत्रालय बनाने की घोषणा की. प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना भी इसी साल लॉन्च की गई.

>>स्टार्ट-अप इंडिया, स्टैंड-अप इंडिया की शुरुआत भी साल 2015 में हुई.

>>सालों से अटकी पड़ी वन रैंक वन पेंशन तो भी इसी साल से लागू किया गया.

2016

>>15 अगस्त 2016 को पीएम मोदी ने तीसरी बार लाल किले से देश को संबोधित किया. इस बार उनका भाषण विदेश नीति और खासकर पड़ोसी देश पाकिस्तान पर फोकस रहा. पेशावर ब्लास्ट का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा, 'जब पेशावर के स्कूल में मासूमों की हत्या हुई, तो भारत का हर स्कूल रोया था. हर सांसद की आंखों में आंसू थे. ये हमारे मानवीय मूल्यों की अभिव्यक्ति थी. लेकिन, दूसरा पहलू भी देखिए. पाकिस्तान जो आतंकवाद का महिमामंडन करने से नहीं थकता.'

>>इसी भाषण में पीएम मोदी ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की पहल की. साथ ही ग्रेड सी और डी लेवल की परीक्षाओं में इंटरव्यू हटा दिया.

2017 >पीएम मोदी ने इसबार न्यू इंडिया का कंसेप्ट देश के सामने रखा. उन्होंने कहा कि नया भारत गरीबों और किसानों का भारत होगा. इसके तहत 2022 तक किसानों की इनकम डबल करने की बात कही गई.

(न्यूज 18 से साभार)

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