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यूपी चुनाव: लखनऊ में मोदी के 'इंदिरा' कार्ड ने बदला एजेंडा

इंदिरा के नारे का इस्तेमाल करते हुए बड़ी चतुराई से चुनावी जंग को मोदी बनाम बाकी सब बना दिया.

Sanjay Singh Updated On: Jan 03, 2017 09:56 AM IST

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यूपी चुनाव: लखनऊ में मोदी के 'इंदिरा' कार्ड ने बदला एजेंडा

सोमवार को लखनऊ में हुई महापरिवर्तन रैली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंदिरा गांधी के करीब आधी सदी पुराने नारे को नया ट्विस्ट देकर पेश किया. मंच पर लहराता हुआ बैनर था, 'परिवर्तन लाएंगे कमल खिलाएंगे'.

लोगों से खचाखच भरे लखनऊ के विशाल रमाबाई अंबेडकर मैदान में पीएम मोदी ने इंदिरा गांधी के 1971 के मशहूर नारे को एक नये रूप-रंग में पेश किया.

इंदिरा के नारे को नया ट्विस्ट देकर मोदी ने आने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों का एजेंडा भी सेट कर दिया. इन चुनावों में नोटबंदी एक अहम मुददा बनेगा ये तय है. इसीलिए उन्होंने इंदिरा के नारे का इस्तेमाल करते हुए बड़ी चतुराई से चुनावी जंग को मोदी बनाम बाकी सब बना दिया.

मोदी ने कहा कि, 'वो (यानी कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बीएसपी और टीएमसी) कहते हैं कि मोदी हटाओ. मैं कहता हूं कि काला धन हटाओ. वो कहते हैं कि मोदी को हटाओ, मैं कहता हूं भ्रष्टाचार हटाओ... देश की जनता को तय करना है’

रमाबाई अंबेडकर मैदान में मोदी को सुनने के लिए भारी भीड़ जमा थी. जिसने मोदी के इस बयान का जबरदस्त तालियों से स्वागत किया.

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मोदी को सुनने के लिए लखनऊ के रमाबाई अंबेडकर मैदान में भारी भीड़ जुटी थी (पीटीआई)

मोदी ने बड़ी चतुराई से अपना चुनावी दांव खेल दिया था. जिसमें उन्होंने खुद को भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा विरोधी बताया. ऐसा नेता जताने की कोशिश की जिसमें कड़े फैसले लेने की ताकत है.

जो अमीरों और ताकतवर लोगों को निशाना बनाने से नहीं हिचकता. वो बस पूरी व्यवस्था को साफ-सुथरा और पारदर्शी बनाने में यकीन रखता है. वो सिर्फ गरीबों और मध्यम वर्ग की भलाई के लिए काम करता है.

नारे का जादू जमकर चला

46 साल पहले, इंदिरा गांधी जब कांग्रेस के ही ताकतवर सिंडिकेट और दूसरे विपक्षी दलों का मुकाबला कर रही थीं. तो, गरीबी हटाओ का नारा लेकर आईं थीं.

इंदिरा ने कहा था, 'वो कहते हैं इंदिरा हटाओ, मैं कहती हूं गरीबी हटाओ'. इस नारे का जादू जमकर चला. चुनावों में इंदिरा के विरोधियों का सफाया हो गया था.

अब 2017 की शुरुआत में मोदी का सामना कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, बीएसपी, टीएमसी, आरजेडी, लेफ्ट दलों से है. कांग्रेस, टीएमसी, बीएसपी ने मोदी को सत्ता से बेदखल करने का आह्वान किया है. क्योंकि वो कहते हैं कि नोटबंदी का कदम गरीब विरोधी और अमीरों का समर्थन करने वाला है.

वहीं, पीएम मोदी ने इसे भ्रष्टाचार, काले धन, नकली नोटों, हवाला के कारोबार के खिलाफ महाअभियान करार दिया है. वो इसी गरीबों और मध्यम वर्ग के हक में उठाया गया कदम बताते हैं.

मोदी ने यूपी में अपने दो मुख्य विरोधियों एसपी-बीएसपी पर जमकर तंज किया. लखनऊ की रैली में मोदी ने कहा कि हमेशा एक दूसरे का विरोध करने वाली समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने नोटबंदी का विरोध करने के लिए हाथ मिला लिया है.

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प्रधानमंत्री मोदी के साथ मंच पर यूपी के तमाम दिग्गज बीजेपी नेता मौजूद रहे (पीटीआई)

मोदी ने कहा कि, 'क्या आपने कभी सुना की एसपी-बीएसपी एक सुर में बात करते हैं. एसपी कहेगी कि सूरज उग रहा है तो बीएसपी कहेगी कि सूरज अस्त हो रहा है. लेकिन दोनों मिलकर मोदी हटाओ की रट लगाए हुए हैं'.

राजनीति में स्थापित करने का प्रयास

इसके बाद मोदी ने कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला. बिना कांग्रेस का नाम लिए पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस का यूपी में कोई अस्तित्व नहीं. फिर भी वो पिछले पंद्रह सालों से एक खास परिवार के बेटे को राजनीति में स्थापित करने में लगी है. मोदी ने कहा, 'उनकी दाल गलती नहीं. फिर भी वो एक बेटे को स्थापित करने में पूरी ताकत झोंके हुए हैं’.

मायावती का नाम लिए बिना मोदी ने उन पर भी हमला बोला. मोदी ने कहा कि एक और पार्टी है जिसे पता ही नहीं कि पैसा कहां छुपाकर रखें. वो तमाम बैंकों में पैसे छुपाने की कोशिश कर रही है. वो पार्टी अभी पूरा जोर अपना पैसा छुपाने में लगाए हुए है.

तीसरी पार्टी यानी समाजवादी पार्टी के भीतर परिवार की लड़ाई छिड़ी हुई है. पीएम मोदी ने अपील की कि जनता इन दलों की तुलना बीजेपी से करके देखे, जिसका एक ही मकसद है, यूपी का विकास.

मोदी ने कहा कि बीजेपी का हाई कमान देश की सवा अरब जनता है. बीजेपी को किसी और के आशीर्वाद और आदेश की जरूरत नहीं.

नोटबंदी पर विपक्ष पर निशाना साधते हुए मोदी ने कहा, 'मोदी पैसे ले ले तो भी परेशानी, मोदी वो पैसा गरीबों को दे दे तो भी परेशानी'.

गठजोड़ बनाने की कोशिश

इस रैली में मोदी ने ब्राह्मण और पिछड़े वर्ग का गठजोड़ बनाने की कोशिश की. कभी इस फॉर्मूले से बीजेपी यूपी में बड़ी ताकत हुआ करती थी. मोदी ने पार्टी के कद्दावर नेता वाजपेयी का भी जिक्र किया. वाजपेयी के नाम पर लखनऊ के लोग आज भी भावुक हो जाते हैं. वाजपेयी लंबे समय तक लखनऊ से सांसद रहे थे.

मोदी ने पिछड़े वर्ग के कद्दावर नेता रहे पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का भी जिक्र किया. कल्याण अभी राजस्थान के राज्यपाल हैं. साथ ही उन्होंने राजपूत नेता राजनाथ सिंह और पूर्व मुख्यमंत्री रामप्रकाश गुप्ता का भी नाम लिया. ताकि राजपूत और वैश्य समाज से नाता जोड़ सकें.

Modi Supporters

पीएम मोदी को देखने और सुनने के लिए यूपी के कोने-कोने से भीड़ जुटी थी (पीटीआई)

दलितों को अपने पाले में लाने के लिए मोदी ने भीमराव अंबेडकर का भी खूब जिक्र किया. उन्होंने बताया कि सरकार के नए डिजिटल पेमेंट ऐप 'भीम' का नाम उन्हीं के नाम पर है.

बीएसपी प्रमुख मायावती पर निशाना साधते हुए मोदी ने कहा कि, 'मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि 'भीम' ऐप के नाम से कुछ लोगों के पेट में दर्द क्यों हो रहा है'.

कई घोषणाओं का एलान

31 दिसंबर को राष्ट्र के नाम संदेश में मोदी ने गरीब और मध्यम वर्ग के लिए कई योजनाओं का एलान किया था. इसमें किसानों और गर्भवती महिलाओं के साथ बुजुर्गों के लिए भी कुछ घोषणाएं थीं.

इस दौरान उन्होंने महात्मा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री, कामराज, जेपी, राममनोहर लोहिया, दीनदयाल उपाध्याय और बी आर अंबेडकर का भी जिक्र किया था. हालांकि उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी का जिक्र नहीं किया.

लखनऊ में बीजेपी की परिवर्तन महारैली पहले अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन 25 दिसंबर को होने वाली थी. इससे पार्टी की परिवर्तन रैलियों का समापन होना था. लेकिन बाद में इसे 30 दिसंबर को नोटबंदी की मियाद खत्म होने के बाद करना तय किया गया. रैली में लाखों लोगों की मौजूदगी ने मोदी का दिल जरूर खुश कर दिया होगा.

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