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मोदी बनाम राहुल: दोनों खेल रहे हैं कीचड़ से सनी 'चुनावी' होली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बड़बोली टिप्पणी को कुछ कांग्रेसियों ने पेड़ से टूटे हुए आम की तरह लपका

Bikram Vohra Updated On: Feb 13, 2017 04:21 PM IST

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मोदी बनाम राहुल: दोनों खेल रहे हैं कीचड़ से सनी 'चुनावी' होली

राहुल गांधी भारत के एक प्रधानमंत्री के बेटे हैं तो एक प्रधानमंत्री के पोते. यही नहीं भारत के एक और प्रधानमंत्री के वे परनाती भी हैं. अपने आप में अनूठी कहलाएगी यह विरासत और कहलाए भी क्यों न.

लेकिन, सच्चाई यह भी है कि यह सब कुछ अब अतीत की बात बन चला है. कांग्रेस का अकबरी दरबार अब सिकुड़कर ‘दिल्ली से पालम’ भर का रह गया है.

और.. राहुल गांधी इस सिकुड़े हुए दरबार के भीतर बेशक ‘शाहआलम’ हैं, लेकिन जनता का सौंपा हुआ राज सिंहासन अब कांग्रेस के पास नहीं है.

दरअसल राहुल की पार्टी के पास लोकसभा की 10 फीसद सीटें भी नहीं हैं सो राजशाही का कांग्रेसी शाहनामा अब एकदम से ठहर सा गया है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बिल्कुल अपनी रफ्तार में हैं और कांग्रेस से सात गुना ज्यादा सांसदों के साथ एक तरह से पूरे सदन पर उनका राज है.

ठीक इसी वजह से यह बात बड़ी हैरान करती है कि प्रधानमंत्री बार-बार ताल ठोंककर मुकाबले के लिए उतर जाते हैं, और उस व्यक्ति पर व्यंग्य वाणों के बौछार करते हैं जो उनके कद के आगे पासंग बराबर भी नहीं है.

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एक चुनावी सभा के दौरान अपना फटा हुआ कुर्ता दिखाते हुए राहुल गांधी

कांग्रेस का कांटा

मोदी को चुप्पी साधने में महारत हासिल है. चुप्पी साधकर वे ऐसा जताते हैं, मानो कुछ ‘अदभुत-अपूर्व’ अब बस होने ही वाला है.

भाव ऐसा होता है मानो अपनी चुप्पी की ओट में वे मन ही मन सैकड़ों मील टहलने निकल गए हों. सोच रहे हों कि भावी भारत का नक्शा किस तरह बनाना है.

...और फिर इस राह पर चलते-चलते अचानक ही कांग्रेस का कांटा उनके पांव में चुभ जाता है. उनका मौन एकबारगी टूट जाता है और ऐसा बार-बार होता है. चिंतन की साफ-सुथरी सड़क से उतर कर उनके पांव फिर से रोजमर्रा की राजनीति के कीचड़ में सन जाते हैं.

तुलना में इस्तेमाल किया गया रुपक चाहे जितना सटीक हो लेकिन मनमोहन सिंह के बारे में यह कहना कि 'बाथरुम में रेनकोट पहनकर नहाना कोई डॉक्टर साहब से सीखे', ये नैतिक रुप से ठीक नहीं जान पड़ता है.

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राज्यसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व पीएम मनमोहन सिंह पर 'बाथरूम ' वाला कमेंट किया

भले ही इसके पीछे डॉक्टर सिंह का उकसावा रहा हो कि ऐसी टिप्पणी तवज्जो के काबिल नहीं है.

इसके बाद राहुल गांधी ने पलटवार किया कि मोदी दूसरे के बाथरूम में झांकते हैं. यह भी लिहाज को लांघती टिप्पणी है.

इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के राजनेताओं में सबसे ज्यादा मजाक राहुल गांधी का उड़ाया जाता है. कोई चाहे तो गूगल पर जाकर यह सच्चाई खुद ही जांच ले.

गुड गवर्नेंस की धज्जी

क्या यही राजकाज (गवर्नेंस) है और अगर ऐसा है तो फिर ऐसी बेसिर-पैर की नामाकूल बातों का क्या मतलब निकलता है?

क्या हम यह सोचें कि बीजेपी एक ना एक, अजब-गजब तरीके से कांग्रेस में कृत्रिम सांस फूंककर उसे जिंदा रखना चाहती है?

रविवार के दिन प्रधानमंत्री उत्तराखंड पहुंचे और भूकंप की वजह बताते हुए कहा कि कांग्रेस ने सूबे में जिस तरह शासन चलाया है, उससे देवता नाराज हैं.

Aligarh: Prime Minister Narendra Modi addresses an election rally in Aligarh on Sunday. The rally drew huge crowd with BJP workers pouring in from all sides. PTI Photo (PTI2_5_2017_000106B)

पीएम मोदी अपनी चुनावी सभाओं में कांग्रेस को खूब कोस रहे हैं

यह टिप्पणी यही जताती है कि प्रधानमंत्री या तो अपनी रैली में पहुंचे ग्रामीण लोगों की समझ को सम्मान के काबिल नहीं मानते या फिर भूकंप सरीखी कुदरती घटना को बहुत हल्के में ले रहे हैं.

भूकंप से जो तबाही मच सकती है उसकी ताकत के बारे में सभी जानते हैं.

भूकंप वाली इस टिप्पणी के निशाने पर राहुल गांधी भी थे. राहुल गांधी ने संसद के शीतकालीन सत्र में कहा था कि प्रधानमंत्री और रिश्वतखोरी की बात पर मैंने मुंह खोल दिया तो भूकंप आ जायेगा.

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कोई बताये कि सियासी प्रचार के काम से भूकंप का क्या रिश्ता-नाता है? क्या हम यह कहना चाह रहे हैं अगर सूबे की कांग्रेसी सरकार गिर जाती है तो फिर कभी भूकंप नहीं आएगा?

या फिर हम पीछे की तरफ लौटकर राहुल गांधी की एक बेलिहाज टिप्पणी की चुटकी लेना चाहते हैं और इस तरह उनका जिक्र छेड़कर एक तरह से उन्हें कुछ ना कुछ अहमियत देने का काम कर रहे हैं?

बेवजह की तकरार

जाहिर है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बड़बोली टिप्पणी को कुछ कांग्रेसियों ने पेड़ से टूटे हुए आम की तरह लपका और उसे निचोड़ने में लग गये. सूबे के मुख्यमंत्री ने तुरंत-फुरंत ट्वीट किया कि प्रधानमंत्री की टिप्पणी बहुत ही असंवेदनशील है.

चूंकि, भूकंप को आये ज्यादा देर नहीं हुई थी और इसी बीच प्रधानमंत्री ने यह तंज कस दिया था सो उनकी भूकंप वाली बात ज्यादा जोर से चुभी.

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हरीश रावत ने भूकंप पर प्रधानमंत्री के दिए बयान को असंवेदनशील बताया

राहुल मौका चूकने वाले नहीं थे सो उन्होंने छूटते ही यह आरोप जड़ दिया कि मोदी उत्तराखंड के लोगों की भावनाओं को चोट पहुंचा रहे हैं.

इस फिजूल की जबानदराजी से दो दिन पहले राहुल गांधी मीडिया की महफिल यह कहकर लूट चुके थे कि अमेरिका ने अब डोनाल्ड ट्रंप को राष्ट्रपति चुना है, लेकिन भारत को ढाई साल पहले ही मोदीजी के रूप में डोनाल्ड ट्रंप मिल चुका है.

कीचड़ उछालने का यह खेल बहुत हो चुका, अब कुछ अच्छा होना चाहिए. कुछ वैसा जो भारत के लायक हो और इस लिहाज से गेंद अब प्रधानमंत्री के पाले में है.

वे बड़े आदमी हैं और कई मायनों में उनका कद बहुत ऊंचा है सो उन्हीं की जिम्मेदारी बनती है कि सार्वजनिक बातचीत को उंचाई का मुकाम बख्शें.

रेनकोट, बाथरुम और कुत्ता के इर्द-गिर्द घूमने वाली टिप्पणियां बड़ी छिछोरेपन के साथ चारों तरफ बिखरी नजर आ रही हैं. इससे किसी का भला होता तो दिखता नहीं है, लेकिन हमारे पांव कीचड़ में और ज्यादा सनते जा रहे हैं.

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