S M L

पीएम मोदी और ममता की सियासी जंग में इमोशन का तड़का

आंकड़ों से अब सियासी जंग नहीं जीती जा सकती. इसमें अब इमोशन का तड़का लगाना ज़रूरी हो गया है.

Updated On: Dec 06, 2016 09:35 AM IST

Monobina Gupta

0
पीएम मोदी और ममता की सियासी जंग में इमोशन का तड़का

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारतीय राजनीति के शिखर पर पहुंचने से काफ़ी पहले से ममता बनर्जी सियासत की ड्रामा क्वीन थीं. हाल के दिनों में कुछ घटनाएं बड़ी तेजी से हुईं. पहले तो इंडिगो की फ्लाइट, जिसमे ममता बनर्जी सवार थीं, वो कुछ देरी से कोलकाता एयरपोर्ट पर उतरी.

फिर बंगाल में सेना की तैनाती पर हंगामा हो गया. ममता बनर्जी, तब तक राज्य सचिवालय नबन्ना से नहीं निकलीं, जब तक सेना की टुकड़ियां वापस बैरक में नहीं चली गईं. इससे ममता की ड्रामा क्वीन की छवि एक बार फिर साबित हो गई.

ममता बनर्जी ने देर रात बुलाई गई प्रेस कांफ्रेंस में कहा, 'मैं तब तक सचिवालय से नहीं जाऊंगी जब तक सेना को हटाया नहीं जाता. मैं यहां रहकर लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई लड़ूंगी' अब जबकि पश्चिम बंगाल पूरी तरह से उनके कब्जे में है, तो वो राष्ट्रीय राजनीति में चमकने की कोशिश कर रही हैं. प्रधानमंत्री मोदी से उनकी सियासी लड़ाई इसी वजह से है. और उनकी ताज़ा राजनैतिक नौटंकी की वजह भी यही है.

इमोशन के बदले इमोशन

अगर प्रधानमंत्री मोदी, लोगों से भावुक अपील कर सकते हैं कि उनके साथ देश के लिए कुछ कष्ट सहें, तो ममता बनर्जी उनके बराबर के दर्जे के इमोशन्स दिखा सकती हैं. लोग अभी भी विपक्ष के नेता के तौर पर उनके व्यक्तित्व के ये पहलू भूले नहीं होंगे.

ये वो दौर था जब राजनैतिक ड्रामे की अपनी काबिलियत को वो निखार रही थीं. अपने सियासी तमाशे से जनता का मनोरंजन कर रही थीं. लोगों को अपने पाले में कर रही थीं और सियासी विरोधियों को टॉर्चर कर रही थीं.

विरोधी उनके अगले सियासी तमाशे का अंदाजा लगाते, उससे पहले ही खेल शुरू हो चुका होता था. उनके समर्थकों को ममता की ये सियासी नौटंकी खूब पसंद आती थी. उनका बात-बात पर भावुक होना जनता को बहुत लुभाता था.

ममता स्टाइल ऑफ पॉलिटिक्स

Mamta_Lalu_Rabri

फोटो: पीटीआई

याद कीजिये 1996 में कोलकाता के स्थानीय निकायों के चुनाव के दौर को. जब ममता ने कहा था कि वो चुनाव नहीं लड़ेंगी. उन्होंने अपनी पुरानी पार्टी कांग्रेस पर इल्जाम लगाया कि उसने बेहद कमजोर और नाकाबिल उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं.

उनका चुनाव मैदान से हटना इतना असरदार था कि जनता ममता की दीवानी हो गई थी. ममता ने धमकी दी कि वो खुद को अपने काले शॉल से फांसी लगा लेंगी. उनके इस एलान से समर्थक बेकाबू हो गये थे.

उन्होंने बार-बार ममता से अपील की कि वो अपना फैसला बदल दें. आखिरकार ममता ने अपने समर्थकों की बात मानकर अपना चुनाव न लड़ने का फैसला बदल दिया. उन्होंने दक्षिण कोलकाता से लोकसभा का चुनाव तीसरी बार जीता था.

सिर्फ सियासी ड्रामा ही नहीं, बात-बात पर साजिश का इल्जाम लगाना भी ममता की राजनैतिक शैली का हिस्सा रहा है. अब जैसे हाल ही में अपने राज्य में सेना की मौजूदगी को उन्होंने तख्तापलट की साजिश बता दिया.

उन्होंने कहा कि सेना को किसी भी ड्रिल के लिए राज्य सरकार से इजाजत लेनी होती है, लेकिन उन्होंने ये मॉक ड्रिल बिना इजाजत की. इससे कुछ दिनों पहले ही तृणमूल कांग्रेस इल्जाम लगा रही थी कि ममता को जान से मारने की साजिश रची जा रही है.

क्योंकि उनका विमान 13 मिनट देर से उतरा था. ममता की पार्टी का इल्जाम था कि उनके विमान में ईंधन ही नहीं बचा था. अब सरकार ने इस मामले की जांच के आदेश दिये हैं.

राजनीति में इमोशन और तमाशा 

मीडिया की खबरों के मुताबिक, तृण मूल कांग्रेस के सुदीप बंदोपाध्याय ने ये मामला लोकसभा में उठाया. सुदीप ने कहा कि आज ये एक विपक्षी नेता के साथ हो रहा है. कल किसी और के साथ होगा. इस सरकार के खिलाफ जो भी आवाज उठायेगा, उसे मारने की साजिश की जाएगी क्या? राज्य सभा में डेरेक ओ ब्रायन ने इल्जाम लगाया कि देश को लग रहा है कि विपक्ष के नेता सुरक्षित नहीं.

Mamta_Modi

फोटो: पीटीआई

ये तमाशा और इमोशनल ड्रामा, आज की राजनीति का अहम हिस्सा बन गये हैं. राजनैतिक विरोध के दो ध्रुवों पर खड़े मोदी और ममता बनर्जी आज भावुकता के राजनीति में इस्तेमाल के प्रतीक बन गये हैं.

वो जानते हैं कि इससे वोट मिलेंगे. क्योंकि उनके इस इमोशनल अत्याचार से जनता भावुक हो उठती है. इससे उन्हें तथ्यों के साथ छेड़खानी का मौका मिल जाता है. सोशल मीडिया के जरिए इस इमोशनल राजनीति को और बढ़ाया चमकाया जाता है. इससे सनसनी बढ़ती है, जनता की दिलचस्पी बढ़ती है.

अब जैसे कि नोट बंदी से काले धन पर कितनी चोट पहुंचेगी, इसका किसी को भी ठीक-ठीक अंदाज़ा नहीं. लेकिन पीएम मोदी बार-बार काले धन से लड़ने के लिए लोगों से भावुक अपील कर रहे हैं.

बहुत से अर्थशास्त्रियों ने भी नोट बंदी के फैसले पर सवाल उठाये हैं.लेकिन पीएम मोदी उन सवालों को दरकिनार करके, जनता से लगातार भावुक अपील कर रहे हैं.

इससे साफ है कि आंकड़ों के आधार पर राजनैतिक लड़ाई लड़ने का दौर खत्म हो गया है. आंकड़ों से अब सियासी जंग नहीं जीती जा सकती. इसमें अब इमोशन का तड़का लगाना ज़रूरी हो गया है.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
KUMBH: IT's MORE THAN A MELA

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi