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भुवनेश्वर में मोदी: ये तस्वीर बहुत कुछ कहती है...

जनता मैदान में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के लिए भव्य प्रबंध हैं

Updated On: Apr 16, 2017 10:20 AM IST

Nazim Naqvi

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भुवनेश्वर में मोदी: ये तस्वीर बहुत कुछ कहती है...

“तीन चार दिन पहले तक ओडिशा का मौसम सामान्य तौर पर ठंडा था. अभी दो-चार दिन से गर्मी बढ़ी है लेकिन दोपहर बाद, तीन बजे से मौसम फिर बदल जाता है”. सुबह आठ बजे, 25 डिग्री तापमान के बीच ओडिशा पहुंचते ही ये पहली जानकारी थी, जो हमें अपने ड्राइवर प्रह्लाद से मिल रही थी.

भुवनेश्वर की सड़कें अमित शाह और मोदी की तस्वीरें लगाए अपने राहगीरों के आगमन-प्रस्थान का संचालन कर रही हैं. जगह-जगह भाजपा के झंडे भी माहौल को रंगीन बना रहे हैं. वैसे तो यह सजावट दो दिनों (15-16 अप्रैल) के लिए की गई है, लेकिन सबको इंतजार है नरेंद्र मोदी का, जिनका विमान, तीन बजे के बाद कभी भी ‘बीजू पटनायक हवाई अड्डे’ पर लैंड करने वाला है.

जनता मैदान में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के लिए भव्य प्रबंध किए गए हैं. मैदान से चंद कदम के फासले पर ‘पाल हाईट्स’ है, जहां मीडिया का जमावड़ा है. बीजेपी के 37 वर्षीय अस्तित्व में आयोजित होने वाली क्वार्टरली मीटिंग्स में कभी इतनी भव्यता नहीं देखी गयी. इस बार की कार्यकारिणी में 40 यूनियन मिनिस्टर, 13 मुख्यमंत्री और सात उप-मुख्यमंत्री इसको ताकतवर बना रहे हैं.

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पीएम मोदी के स्वागत में बने तोरणद्वार

भुवनेश्वर में हर चौक चौराहा मोदीमय हुआ

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह 14 अप्रैल से ही भुवनेश्वर में हैं. पार्टी की हर नयी सफलता के साथ उनके कंधों पर नयी जिम्मेदारियों का बोझ दिखाई देता है. मोदी-शाह जोड़ी सबसे हिट जोड़ी है, इसे मान लेने में अब विपक्ष को भी कोई हिचकिचाहट नहीं है.

पहली बार मोदी-शाह के आदम-कद कट-आउट (जोड़ी के रूप में), हर चौराहे पर आने जाने वालों का हाथ हिलाकर अभिवादन कर रहे हैं. भुवनेश्वर से पहले, कार्यकारिणी की बैठक (पांच राज्यों के चुनावों से पहले), जनवरी में हुई थी, उस समय सवाल कई थे, लगता था कि पार्टी एक इम्तेहान देने जा रही है. लेकिन ये बैठक चार राज्यों में फतह का एलान हो जाने के बाद हो रही है.

नतीजों के बाद आत्मविश्वास की कौन कहे

पार्टी का आत्मविश्वास कैसा है इसका अंदाजा लगाना, समय बर्बाद करने जैसा है. क्योंकि अनायास विमान के कपाट खुलते हैं और नरेंद्र मोदी जिस तेवर के साथ सीढ़ियां उतर कर ओडिशा की धरती को छूते हैं, लगता है जैसे कह रहे हों, 'अब ओडिशा फतह करना है'.

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पीएम मोदी के स्वागत में पारंपरिक कलाकार

रोड-शो (जिसका ओडिशा को सुबह से इंतज़ार था), शुरू होता है और देखते ही देखते पूरा माहौल मोदी-मय हो जाता है. नेता जनता के साथ अपना रिश्ता कैसे मजबूत करता है इसके कई उदाहरण मौजूद हैं. लेकिन इंटरनेट के इस जमाने में नरेंद्र मोदी जिस तर्ज़ पर इसमें गर्मी पैदा करते हैं, कोई दूसरा मुकाबले में नज़र नहीं आता.

अचानक उनका काफिला जाधवपुर चौराहे पर पहुंचता है तो घंटों से प्रतीक्षा में खड़ी भीड़ को उसके इंतज़ार का पूरा-पूरा इनाम मिलता है. मोदी लैंड-रोवर से उतरकर पैदल चल पड़ते हैं, सुरक्षा-दस्ते पर जैसे पहाड़ टूट पड़ता है लेकिन मोदी बेपरवाह जिधर चाहते हैं, मुड़ जाते हैं. डिवाइडर पार करके सड़क के दूसरी ओर चले जाते हैं. ‘ऐसा पहले कभी नहीं देखा’ के आश्चर्य में डूबी जनता उत्साह में कब बैरिकेड तोड़ कर मोदी के करीब, बिलकुल करीब पहुंच जाती है, उसे खुद नहीं पता चलता.

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भुवनेश्वर के हर चौक चौराहों पर पोस्टर

काफिला गुज़र जाने के बाद भी न जाने कितनी आंखें हैं, जो अभी भी उन्हीं दृश्यों में फंसी हैं. सड़क किनारे खड़े अरुण महापात्रा, जिन्होंने शायद पहली बार मोदी को इतने करीब से देखा है, उड़िया लहजे में डूबी हुई हिंदी के सहारे बताने की कोशिश करते हैं कि वह पहले भी कई नेताओं को देख चुके हैं लेकिन मोदी ज्यादा मिलनसार हैं. उनकी आँखों में रिश्ते बनाने की ललक दिखाई देती है. “बाकी सब तो ड्रामा करते हैं”.

दरअसल नरेंद्र मोदी ने ओडिशा के इस रोड-शो के दौरान, माहौल में जो गर्माहट पैदा की है वह दरअसल बीज बोने जैसा है. इसे सही खाद-पानी मिल गया तो दो साल में ये फसल लहलहाएगी. क्योंकि पिछले सत्रह साल से एक जैसे सियासी नतीजे उगलते-उगलते ये धरती बेचैन है कुछ नया उगाने के लिए.

बाक़ी काम अमित शाह का है जिन पर सिर्फ मोदी को ही नहीं, अब तो पार्टी को भी पूरा भरोसा है.

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