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फूलपुर उपचुनाव: एक मुकाबला अखिलेश यादव बनाम बाहुबली अतीक अहमद भी

देवरिया जेल में बंद अतीक फूलपुर से बतौर निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में उतरे हैं. अतीक सपा के टिकट पर फूलपुर से सांसद भी रह चुके हैं. पर वह मुलायम सिंह यादव के दौर वाली सपा थी

Ranjib Updated On: Feb 28, 2018 08:49 AM IST

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फूलपुर उपचुनाव: एक मुकाबला अखिलेश यादव बनाम बाहुबली अतीक अहमद भी

उत्तर प्रदेश में 11 मार्च को लोकसभा की दो सीटों पर उपचुनाव होना है. एक गोरखपुर अौर दूसरा फूलपुर. गोरखपुर की सीट यूपी का मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी अादित्यनाथ ने खाली की जबकि फूलपुर उप मुख्यमंत्री बने केशव प्रसाद मौर्य के इस्तीफे से खाली हुई.

गोरखपुर को योगी अौर फूलपुर के उपचुनाव को मौर्य की प्रतिष्ठा का मुद्दा माना जा रहा है. विपक्ष की अोर से समाजवादी पार्टी अौर कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी उतारे हैं. उपचुनावों में उम्मीदवार न उतारने की अपनी पुरानी रणनीति के तहत बीएसपी ने इस बार भी दूरी बनाए रखी है.

अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों के मद्देनजर इन दो उपचुनावों में सियासी दल बाजी मारने की कोई कसर छोड़ नहीं रहे. राजस्थान में उपचुनाव हार चुकी बीजेपी सतर्क है अौर पार्टी ने यूपी के उपचुनावों में पूरी ताकत लगा रखी है ताकि 2019 से पहले कोई प्रतिकूल सियासी संदेश न जाए.

मुख्यमंत्री योगी खुद चुनावी सभाएं कर रहे हैं. विपक्षी पाले के लिए भी उपचुनाव प्रतिष्ठा का मुद्दा हैं. एसपी की अोर से पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव दोनों सीटों पर चुनाव प्रचार करेंगे. कांग्रेस के सभी प्रमुख चेहरे भी प्रचार में जुटे हैं.

पक्ष अौर विपक्ष के लिए प्रतिष्ठा का मामला बने इन उपचुनावों में फूलपुर में एक अौर रोचक मुकाबला एसपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव अौर बाहुबली नेता अतीक अहमद के बीच है. देवरिया जेल में बंद अतीक फूलपुर से बतौर निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में उतरे हैं.

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फूलपुर के सांसद और इलाहाबाद पश्चिमी से पांच बार विधायक रह चुके हैं अतीक

अतीक सपा के टिकट पर फूलपुर से सांसद भी रह चुके हैं. पर वह मुलायम सिंह यादव के दौर वाली एसपी थी. साल 2017 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव ने अपराधी छवि वालों से दूरी की नीति अपनाते हुए अतीक का टिकट काट दिया था. उसके बाद भी अतीक ने एसपी नहीं छोड़ी थी. अब एसपी में रहते हुए भी उनका निर्दलीय चुनाव लड़ना चौंकाने वाला माना जा रहा है.

उनके चुनाव लड़ने से एसपी अौर कांग्रेस दोनों को फूलपुर में नुकसान होने की संभावना है. एसपी को नुकसान के अासार ज्यादा इसलिए हैं क्योंकि मुस्लिम वोटों की दावेदारी में एसपी का पलड़ा भारी माना जाता है. अतीक इस वोट में सेंध लगाएंगे ऐसा माना जा रहा है. यहां उल्लेखनीय है कि अतीक न सिर्फ फूलपुर संसदीय सीट से सांसद बल्कि इसी सीट में शामिल इलाहाबाद पश्चिमी सीट से पांच बार विधायक भी रह चुके हैं.

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ऐसे में फूलपुर के चुनावी रण में उनकी एंट्री से विपक्षी पाले के वोटों के समीकरणों में फेरबदल से इनकार नहीं किया जा सकता. सियासी हलकों में इसे अतीक की अोर से अखिलेश यादव को खुली चुनौती भी माना जा रहा है जिसकी व्याख्या यह हो रही है कि विधानसभा चुनाव में अखिलेश ने उनका टिकट काटा था जिसका अतीक फूलपुर में अपनी ताकत दिखा कर हिसाब बराबर करना चाहते हैं. कुछ यूं कि जीत न भी सके तो अखिलेश के प्रत्याशी को हरा तो देंगे.

सपा ने फूलपुर से नागेंद्र सिंह पटेल को प्रत्याशी बनाया है. बीजेपी की अोर से यहां कौशलेंद्र सिंह पटेल उम्मीदवार हैं जबकि कांग्रेस ने मनीष मिश्र को टिकट दिया है. कुर्मी बिरादरी के वोटों की बड़ी तादाद होने के कारण बीजेपी अौर एसपी ने यहां इसी जाति का उम्मीदवार उतारा है जबकि ब्राह्मण वोट भी अच्छी तादाद में होने को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने इस बिरादरी से प्रत्याशी बनाया है.  अतीक अहमद के उतरने से चुनाव अौर रोचक हो गया है.

हालांकि अतीक निर्दलीय के तौर पर मैदान में हैं लेकिन उनके नामांकन के दौरान ही बीएसपी का एक फैसला अतीक के चुनाव लड़ने का एक सिरा मायावती की पार्टी से भी जुड़ रहा है. दरअसल जिस दिन अतीक ने पर्चा भरा उसी दिन बीएसपी नेतृत्व ने इलाहाबाद पश्चिम सीट से पार्टी की पूर्व विधायक पूजा पाल को पार्टी से निकाल दिया.

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पर्दे के पीछे से बीएसपी देर रही है अतीक को समर्थन 

यह अप्रत्याशित अौर चौंकाने वाला फैसला इसलिए था क्योंकि पूजा पाल अौर अतीक की पुरानी अदावत रही है. पूजा पाल के पति व बीएसपी के विधायक रहे राजू पाल की हत्या का अारोप अतीक अौर उनके भाई अशरफ पर है. अतीक को हरा कर ही पूजा पाल इलाहाबाद पश्चिम से विधायक बनीं थीं अौर उनकी व अतीक की रंजीश में बीएसपी प्रमुख मायावती ने पूजा पाल का खुल कर साथ दिया था.

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ऐसे में अतीक के मैदान में उतरने अौर पूजा की बीएसपी से रुखसत को सियासी गलियारों में बीएसपी अौर अतीक के बीच खिचड़ी पकने के तौर पर देखा जा रहा है. बीएसपी उपचुनाव में नहीं लड़ रही लेकिन पर्दे के पीछे से उसके अतीक को समर्थन के कयास लगाए जा रहे हैं. हालांकि पार्टी ने इस मामले में खामोशी साध रखी है लेकिन अतीक को वाकई उसका का समर्थन मिला तो यह एसपी के लिए फूलपुर में दिक्कत पैदा करेगा.

क्योंकि बीएसपी की गैर मौजूदगी में अखिलेश यादव फूलपुर में न सिर्फ मुस्लिम बल्कि पिछड़े व दलित वोटरों के बड़े हिस्से को अपने पाले में लाने का लक्ष्य लेकर उतरे थे. इसमें अतीक की एंट्री अौर उन्हें बीएसपी का संभावित साथ अखिलेश की योजना को लंगड़ी लगा सकता है. ऐसे में फूलपुर में अतीक अहमद अौर अखिलेश यादव के बीच के इस मुकाबले का निष्कर्ष देखना वाकई दिलचस्प होगा. चुनाव परिणाम 14 मार्च को अाएगा.

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