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यूपी उपचुनाव: नेहरू की विरासत वाली सीट फूलपुर पर उपचुनाव लड़ेगी कांग्रेस

पार्टी की रणनीति अपनी परंपरागत सीट जीतकर नेहरू की विरासत को 2019 लोकसभा चुनाव में भुनाने की है

Mojiz Imam Updated On: Nov 17, 2017 03:23 PM IST

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यूपी उपचुनाव: नेहरू की विरासत वाली सीट फूलपुर पर उपचुनाव लड़ेगी कांग्रेस

कांग्रेस ने पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू की विरासत का लाभ फिर से लेने की तैयारी शुरू कर दी है. नेहरू के जन्मदिवस 14 नवंबर से पहले इसका खाका तैयार किया गया है. कांग्रेस पहले ही बीजेपी के हाथ सरदार पटेल की विरासत को खो चुकी है. कांग्रेस की इस रणनीति की वजह सोशल मीडिया में नेहरू के सिलसिले में आ रहा पॉजिटिव फीडबैक है.

कांग्रेस को लग रहा है कि फूलपुर में अगर वह चुनाव जीतती है तो 2019 के चुनाव में नेहरू के योगदान का बखान किया जाए. जिस तरह 2014 में नरेंद्र मोदी ने सरदार पटेल की विरासत को लेकर एक अभियान चलाया था. कांग्रेस के पास सरदार पटेल वाले बीजेपी के दांव का काउंटर सिर्फ नेहरू की विरासत है. सोशल मीडिया में कांग्रेस की तरफ से नेहरू के कामों को लेकर नया अभियान देखने को मिल रहा है.

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उत्तर प्रदेश मे लोकसभा के लिए दो सीट खाली हुई है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सीट गोरखपुर और उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य के इस्तीफे से खाली हुई फूलपुर सीट. सूत्रों के मुताबिक पहले बीएसपी प्रमुख मायावती के इस सीट से लड़ने की चर्चा थी. लेकिन बीएसपी कोई उपचुनाव नहीं लड़ना चाहती. इसलिए गोरखपुर सीट पर समाजवादी पार्टी चुनाव लड़ेगी और पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की सीट मानी जाने वाली फूलपुर सीट पर कांग्रेस अपनी किस्मत अजमाएगी.

कांग्रेस की तरफ से अच्छे उम्मीदवार की तलाश के लिए कवायद तेज हो गई है. पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष राजबब्बर को उम्मीदवार तलाश करने का काम सौंपा गया है. सूत्रों की माने को कई लोगों से प्रदेश अध्यक्ष ने बात की है. बनारस के पूर्व सांसद राजेश मिश्रा के नाम की चर्चा पार्टी के भीतर चल रही है.

इसके अलावा बलरामपुर से पूर्व सांसद और कांग्रेस के यूपी चुनाव में पूर्वांचल के चर्चित चेहरे रिजवान जहीर का भी नाम लिया जा रहा है. रिजवान जहीर यूपी चुनाव से पहले कांग्रेस में शामिल हुए थे. इससे पहले वो समाजवादी पार्टी और बीएसपी मे रह चुके है. रिजवान जहीर से पार्टी के नेताओ ने बात तो की है लेकिन अभी कोई फैसला नहीं लिया गया है.

क्यों कहा जाता है नेहरू की सीट?

Maulana Azad-Nehru

मौलाना अबुल कलाम आजाद के साथ जवाहर लाल नेहरू

देश में पहले आम चुनाव से लेकर अपनी मौत तक जवाहरलाल नेहरू इस सीट से सांसद रहे. 1952, 1957 और 1962 के चुनाव में नेहरू इस सीट से सांसद रहे. उनकी मौत के बाद उनकी बहन विजय लक्ष्मी पंडित सांसद रहीं. 1971 में वी पी सिंह इस सीट से सांसद चुने गए. अब इस उपचुनाव में कांग्रेस ज़ोर आजमाइश करना चाह रही है.

फूलपुर का समीकरण

2014 के आम चुनाव मे केशव प्रसाद मौर्य ने बीजेपी का परचम लहराया. बीजेपी तकरीबन तीन लाख वोट से जीती और केशव प्रसाद मौर्य को तकरीबन पांच लाख तीन हजार वोट मिले. इस सीट में पांच विधानसभा सीट है जिसमें इलाहाबाद पश्चिम और उत्तर, फाफामऊ सोरांव और फूलपुर है. दरअसल कांग्रेस का उम्मीदवार अगर जीतता है तो पार्टी के लिए संजीवनी साबित हो सकती है. 2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी के मुकाबले समूचे विपक्ष को 1.8 लाख वोट ज्यादा मिले.

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जबकि लोकसभा चुनाव में समूचे विपक्ष को 4.17 लाख वोट मिले. विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार पर बीजेपी के पसीने छूट सकते है. हालांकि 1984 के बाद से कांग्रेस का सांसद इस सीट से नहीं जीत पाया है. लेकिन एसपी बीएसपी के समर्थन से कांग्रेस की नैया पार हो सकती है. कांग्रेस कुष्णा पटेल की अगुवाई वाली अपना दल से समर्थन लेने की भी कोशिश कर रही है. फूलपुर सीट पर कांग्रेस नए फार्मूले के साथ लड़ सकती है.

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