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क्या तेजस्वी को अपना नेता मानेंगे आरजेडी के सीनियर लीडर?

हालांकि लालू से लेकर आरजेडी का पूरा कुनबा तेजस्वी को अपना नेता मानने लगा है

Updated On: Aug 06, 2017 10:16 PM IST

FP Staff

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क्या तेजस्वी को अपना नेता मानेंगे आरजेडी के सीनियर लीडर?

राष्ट्रीय जनता दल की कमान अब तेजस्वी के हाथों में है. लालू से लेकर आरजेडी का पूरा कुनबा तेजस्वी को अपना नेता मानने लगा है. ऐसे में अब सबकी नजर आरजेडी के उन कद्दावर नेताओं पर टिकी है जिन्होंने लालू के साथ चलकर पार्टी को सींचा है. क्या वो तेजस्वी को अपना नेता स्वीकार कर पाएंगे ?

बिहार में सत्ता से दूर हुई आरजेडी की अब अग्निपरीक्षा है. नीतीश का साथ छूटने के बाद आरजेडी अपने खुद की जमीन तलाशने में जुट गई है. ऐसे में लालू यादव के नाम से जानने वाली आरजेडी को एक मजबूत उत्तराधिकारी मिल गया है. तेजस्वी यादव आज आरजेडी का वो युवा चेहरा बन गए हैं जिनपर पार्टी का पूरा दारोमदार है. पार्टी के अंदर और खुद लालू भी मानने लगे हैं कि तेजस्वी में बड़े नेता के सारे गुण हैं. ऐसी चर्चा जोरों पर है कि अब आरजेडी में तेजस्वी युग का जलवा है. लालू युग अब पुराने दिनों की बात है.

आरजेडी प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी का कहना है कि तेजस्वी यादव पार्टी के सीनियर नेताओं के मार्गदर्शन में ही पार्टी को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं. तेजस्वी को पार्टी के सभी सीनियर लीडर का आशीर्वाद प्राप्त है. वो पार्टी को आगे ले जा रहे हैं. पार्टी के सभी सीनियर नेताओं ने तेजस्वी की क्षमता को देखा है, पार्टी को तेजस्वी पर विश्वास है.वहीं इस बारे में आरजेडी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवंश प्रसाद सिंह कहते हैं कि युवा देश का भविष्य है. प्रदेश को संभालने के लिए तेजस्वी लगे हुए हैं.

यह बात सही है कि बिहार में सियासत के बदलते माहौल में आरजेडी भी खुद को बदलना चाहती है. लालू के गरीब रैला, लाठी रैली के इतर 21 साल की युवा आरजेडी को अब तेजस्वी का सहारा है. लेकिन सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के पुराने नेता इस बदलाव को खुले मन से स्वीकार नहीं कर पा रहे. लेकिन पार्टी के अंदर खुले मन से कोई विरोध भी नहीं कर रहा. उधर जेडीयू ने तेजस्वी पर तंज कसा है. जेडीयू प्रवक्ता अजय आलोक ने कहा कि तेजस्वी पहले घर में नेता बन जाएं. देश तो बाद में मानेगा, क्या मीसा भारती उन्हें नेता मानती हैं?, क्या तेजप्रताप उन्हें नेता मानते हैं?

ये सभी जानते हैं कि लालू के बगैर आरजेडी का कोई वजूद नहीं है और लालू के साथ कंधे-से-कंधा मिलाकर चलनेवाले उनके पुराने साथी तेजस्वी युग में खुद को कितना कंफर्टेबल रख पाते हैं यह वक्त बताएगा. लेकिन तेजस्वी पर यह बड़ा दांव ना सिर्फ आरजेडी बल्कि खुद तेजस्वी के लिए भी एक अग्निपरीक्षा ही है.

(साभार: न्यूज़18)

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