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नीतीश छोटे भाई की तरह हैं, उन्हें छोटा रहना चाहिए: लालू यादव

लालू ने कहा कि नीतीश भागकर मेरे घर पर आए थे उन्होंने मुझसे समर्थन देने के लिए कहा था

FP Staff Updated On: Jul 30, 2017 08:08 PM IST

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नीतीश छोटे भाई की तरह हैं, उन्हें छोटा रहना चाहिए: लालू यादव

आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने शनिवार को कहा कि नीतीश कुमार के गठबंधन को बीजेपी के साथ बदलने का फैसला एक ऐतिहासिक गलती साबित होगी. ऐसे में बिहार के मुख्यमंत्री कभी अपनी विरासत नहीं बना पाएंगे.

सीएनएन-न्यूज 18 की मारिया शकील के साथ एक साक्षात्कार में लालू ने बताया कि कैसे महागठबंधन समय से पहले टूट गया, कैसे उनके परिवार के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगे और भविष्य में उनकी राजनीति क्या होगी?

बातचीत के दौरान लालू यादव ने उन मीडिया रिपोर्टों को खारिज किया जिसमें उनकी ओर से बीजेपी के साथ किसी तरह के समझौते की बात की जा गई.

सवाल: आपने कहा था कि नीतीश कुमार के पेट में दांत हैं. अगर आप उन्हें इतनी अच्छी तरह जानते थे, तो आपने 2015 में गठबंधन क्यों किया?

लालू: केंद्र में जब से प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार सत्ता में आई है. तब से हमने अल्पसंख्यकों के खिलाफ बहुत सी घटनाएं देखी हैं. हिंदू युवा वाहिनी और बजरंग दल जैसे समूहों द्वारा राम मंदिर की मांग भी बढ़ी है. जो भी मैंने कहा था वह सही साबित हो गया है. मैंने कहा था कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश या तो बड़ा होगा या बिखर जाएगा. मैंने यह बहुत पहले कहा था तब लोगों ने हंसी उड़ाई थी.

मैं राजनीति विज्ञान का छात्र था. राजनीति विज्ञान में कोई भी भविष्यवाणी कर सकता है. जिसमें मेरा पूर्वानुमान सही निकला. आज आपातकाल जैसी स्थिति हो गई है. आपने देखा है कि नोट प्रतिबंध के दौरान क्या हुआ. जब आप बीफ के बारे में बात करते हैं, तो बता दें कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह के नेतृत्व में भारत सबसे बड़ा गोमांस का निर्यातक बन गया है.

मैंने कहा था कि नीतीश की कोई विरासत नहीं होगी. 1995 और 2014 के चुनावों के दौरान भी वह हार गए. लेकिन मैं 4-5 लाख वोटों से अकेला लड़ता रहा. जैसा कि तेजस्वी ने शुक्रवार को कहा था कि 1995 में जब बिहार और झारखंड एकजुट था तब नीतीश (समता पार्टी) सिर्फ सात सीटें जीत पाए थे. नीतीश एक छोटे भाई की तरह है. उन्हें छोटा रहना चाहिए.

सवाल : लेकिन 2015 में एक संयुक्त जनादेश था?

लालू: मैंने देखा कि जहां भी कोई मतभेद था, वहां बीजेपी जीत रही थी. जहां भी बीजेपी एकजुट विपक्ष के खिलाफ लड़ी, वे हार गए. इसलिए वोटों के इस विभाजन को रोकने के लिए, नीतीश ने संपर्क किया. मुलायम सिंह यादव, देवगौड़ा और अन्य नेताओं के साथ बैठक किया गया. जिसमें हमने फैसला किया कि हमें एक मंच पर एक साथ आना चाहिए और बीजेपी को जीतने से रोकना चाहिए. मैं आपको अपने दिल से बताता हूं कि मैं कभी नहीं चाहता था कि नीतीश इसका हिस्सा बनें. क्योंकि मैं उसे शुरुआत से जानता था.

सवाल: क्या आप उन्हें (नीतीश) समझने में गलत थे?

लालू: ये मेरी गलती थी. मैं अभी भी उस वक्त के बारे में बता सकता हूं, जब वह दौड़कर मेरे घर मेरे पास आए थे. मुझसे आशीर्वाद के साथ, एक और मौका मांगा था. राबड़ी देवी और मेरे दो बच्चे भी वहां थे. उन्होंने कहा था, 'हम बूढ़े हो रहे हैं. हम दो भाइयों को राजनीति में साथ आना चाहिए, ताकि भविष्य की राजनीति में हमारे बच्चे आए. नीतीश का बेटा राजनीति में आने में सक्षम नहीं है. इसलिए मैंने उसे आगे बढ़ने के लिए कहा और मैंने आशीर्वाद दिया.'

मुलायम सिंह यादव द्वारा इसका घोषणापत्र मुझे दिया गया. अगर मैंने दिल्ली से अनाउंसमेंट किया होता तो जनता कहती कि लालू ने नीतीश को आत्मसमर्पण करा दिया है. यही कारण है कि मुझे घोषणापत्र मुलायम सिंह द्वारा मिला. जहां एक संवाददाता सम्मेलन भी था. इस आदमी (नीतीश) ने बहुत शुरुआत से सोचने में गलती की है. जब महागठबंधन का गठन हुआ, तो यह तय हुआ कि एक समन्वय समिति बनाई जाएगी. जिसमें कम से कम एक सामान्य कार्यक्रम बनाया जाना चाहिए. लेकिन आज तक कोई समिति नहीं बनाई गई है.

सवाल: क्या आपने समन्वय समिति के गठन के लिए पूछा था?

लालू: कोई भी बड़ा फैसला राज्य हित में किया जाना चाहिए. उदाहरण के लिए राष्ट्रपति चुनाव के दौरान किसी ने भी हमसे हमारी राय के बारे में नहीं पूछा. यह एक महागठबंधन है. ऐसे में हमें एक साथ बैठकर चर्चा करना था. इस आदमी (नीतीश) ने हमें नजरअंदाज किया और हमारे साथ चर्चा किए बिना अपने निजी फैसले के साथ आगे बढ़ा. मैंने नीतीश को कहा था कि इस तरह की ऐतिहासिक गलती न करें.

सवाल: तो आपने उन्हें चेतावनी दी थी?

लालू: हां, नीतीश यह देख रहे होंगे. मैंने उन्हें कहा था कि ऐसी ऐतिहासिक गलती मत करो. जब मैंने मीरा कुमार के लिए वोट करने का फैसला किया तो मैंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस किया. तब मैंने कहा कि वह बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं. यह वही नीतीश है जो एक संघ मुक्त भारत के बारे में बात करता था. मैं पार्टी की विचारधारा से समझौता नहीं करूंगा. चाहें मुझे मार दिया जाए या फांसी पर लटका दिया जाए. यही मैंने सोनिया जी और अन्य सहयोगी व पार्टी नेताओं को उस बैठक में कहा. मैं आज भी यही कहता हूं.

सवाल: क्या आपके और नीतीश कुमार के बीच में कोई कम्युनिकेशन गैप था?

लालू: नहीं, वह चुपके से अपना तरीका अपना रहा था. आपको पता है कि मैं एक मुखर व्यक्ति हूं. मैं खुले में बात कहता हूं. नीतीश के प्रवक्ता ने यह बात फैला दी कि वह प्रधानमंत्री बनने लायक हैं. उनके पास नैतिकता और व्यक्तित्व है. वह उम्मीद कर रहे थे कि हर कोई उन्हें एक प्रधानमंत्री उम्मीदवार की तरह ले. ताकि वह अगले प्रधानमंत्री उम्मीदवार बन जाए.

सवाल: क्या आपको लगता है कि केवल नीतीश का नाम प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश नहीं किया गया था इसलिए उन्होंने एक अलग रास्ता चुना?

लालू: यहां तक कि ममता बनर्जी ने भी उनके बारे में बात की. नीतीश को उनके बयान से बुरा लग गया. हम उन्हें प्रधानमंत्री का उम्मीदवार कैसे बना सकते हैं? क्या उनसे बेहतर लोग नहीं हैं?

सवाल: जब नीतीश कुमार अपना इस्तीफा देने शाम 6:30 बजे राजभवन गए, ठीक उसी वक्त दिल्ली में एक संसदीय बोर्ड की बैठक हुई थी. बिहार बीजेपी के कोर समूह ने बैठक की. प्रधानमंत्री मोदी ने भी तुरंत ट्वीट किया. जिस तरह से यह हुआ - क्या यह पहले से तय था?

लालू: बिल्कुल. यह एक फिक्स मैच था. सुशील मोदी ने लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस किया. मुझे बहुत विश्वास था कि नीतीश कभी भी बीजेपी में शामिल नहीं होंगे. लेकिन एक गंभीर संदेह भी था. बिहार का हर बच्चा जानता है कि नीतीश एक अच्छा आदमी नहीं है. नीतीश ने मुझे बताया कि वह तेजस्वी को और ज़िम्मेदारियां देना चाहते थे. उन्होंने उसके इस्तीफे के लिए कभी नहीं पूछा.

सवाल: क्या उन्होंने तेजस्वी के खिलाफ आरोपों को लेकर तमाम बिंदुओं का खंडन किया?

लालू: इस पर संसद में भी चर्चा हुई कि अगर सांसद या विधायक पर भ्रष्टाचार के मामले में एफआईआर दर्ज किया जाता है, तो उन्हें तुरंत इस्तीफा देना चाहिए, लेकिन इससे पूरी तरह से खारिज कर दिया गया. तो फैसला अदालतों से आना चाहिए.

सवाल: नीतीश कुमार ने सदन में कहा कि आप धर्मनिरपेक्षता के कार्ड का उपयोग भ्रष्टाचार के आरोपों को छिपाने के लिए कर रहे हैं.

लालू: तेजस्वी के खिलाफ आरोपों पर उठाए सवालों के जवाब में उनका कोई जवाब नहीं है. उसने 5 मिनट के अंदर अपना बयान पूरा कर लिया. उन्होंने विधानसभा में प्रसारण को भी बंद करा दिया.

सवाल: इस तथ्य को देखते हुए कि आपके बच्चों का राजनीतिक करियर अभी शुरू ही हुआ है ऐसे में भारतीय राजनीति, लालू यादव और उनके परिवार के लिए अगला कदम क्या हो सकता है?

लालू: मेरे बच्चों का राजनीतिक जीवन बहुत उज्ज्वल है. हमारी पार्टी का भविष्य उज्ज्वल है. बिहार के जनता को पता है कि लालू फांसीवादी और सांप्रदायिक ताकतों के सामने नहीं झुकने वाला. अगर मुझे समझौता करना होता तो मैंने नरेंद्र मोदी से बात की होती.

सवाल: क्या आपने कभी भी केंद्र के किसी भी मंत्री के साथ कोई बैठक नहीं की?

लालू: कभी नहीं. नीतीश कुमार के लोगों के जरिए कुछ अफवाहें फैलाई गई कि लालू अपने भ्रष्टाचार मामलों को स्थगित कराने के लिए केंद्रीय मंत्रियों से बात कर रहे हैं. वह पहले भी सर्जिकल स्ट्राइक और नोटबंदी पर बीजेपी का समर्थन किया था. अब लोग जानते हैं कि वे बीजेपी में शामिल होना चाहते थे. इसी वजह से उन्होंने इन अफवाहों को फैलाया.

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