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भगवान न करे यहां सियासी उथलपुथल हो: बिहार के राज्यपाल

सत्यपाल मलिक कहते हैं, 'मैं ऐसे हाथ धरे नहीं बैठ सकता, लेकिन ये काम सरकार का है. मैं एक और सेंटर नहीं बनना चाहता. मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं, लेकिन किसी लड़की को असहाय नहीं छोड़ सकते.'

Updated On: Jun 30, 2018 09:03 PM IST

FP Staff

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भगवान न करे यहां सियासी उथलपुथल हो: बिहार के राज्यपाल
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बिहार की सियासत में इन दिनों काफी सरगर्मी देखी जा रही है. यहां सत्ताधारी एनडीए गठबंधन में जेडीयू और बीजेपी के नेताओं के बीच बयानबाजी जारी है, तो उधर विपक्षी आरजेडी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर आरोप लगा रही है कि वह महागठबंधन में वापस आने की कोशिशों में जुटे हैं. हालांकि लालू यादव के बेटे तेजस्वी साफ कर चुके हैं कि वह ऐसी किसी भी पहल के बिल्कुल खिलाफ हैं. ऐसे में कई जानकार राज्य में सियासी उथलपुथल की अटकलें लगा रहे हैं और इस सूरत में राज्यपाल की भूमिका काफी अहम हो जाती है. बिहार के राज्यपाल सत्यपाल मलिक से जब पूछा गया कि क्या सियासी उथलपुथल की हालत में आप यह आश्वस्त करते हैं कि आपके फैसले से सभी संतुष्ट होंगे. News18 बिहार से बातचीत में राज्यपाल ने कहा कि उनकी ईश्वर से यही प्रार्थना है कि ऐसी स्थिति न आए.

हाल के दिनों में राज्यपाल की भूमिका को लेकर कई तरह से सवाल उठते रहे हैं. अभी कर्नाटक के हालिया घटनाक्रम में भी राज्यपाल के फैसले को लेकर कई तरह के सवाल उठे. ऐसे में सत्यपाल मलिक से जब इस बाबत सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, 'देखिए भगवान न करे कि मेरे सामने ऐसा मामला आए. लेकिन मुझे विश्वास है कि मेरे साथ ऐसा नहीं होगा.'

राज्यपाल सत्यपाल मलिक का यह इंटरव्यू शनिवार रात 9 बजे प्रसारित किया जाएगा. इस इंटरव्यू में जब राज्यपाल की सीमित भूमिका को लेकर सवाल किया गया तो बिहार के राज्यपाल कहते हैं, 'ऐसा नहीं है, राज्यपाल की भूमिका महत्वपूर्ण होती है. वह राष्ट्रपति और सरकार के बीच सेतु का काम करता है.' इसके अलावा राज्यपाल के पास मुख्यमंत्री से कम शक्तियां होने के सवाल पर सत्यपाल मलिक ऐसी बात से इनकार करते हैं. उन्होंने साफ कहा कि फ़ेडरल सिस्टम में पावर की ज़्यादा ज़रूरत नहीं होती है और राज्यपाल के पास वर्तमान समय में पर्याप्त शक्ति प्राप्त है.

राज्यपाल सत्यपाल मलिक बिहार के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति भी हैं. ऐसे में उच्च शिक्षा को लेकर सवाल पर वह कहते हैं, 'चाणक्य ने कहा कि जब तक व्यवस्था पूरी तरह से ठीक न हो जाए, तब तक शासक को संतुष्ट नहीं होना चाहिए. उच्च शिक्षा के स्तर को लेकर मैं भी संतुष्ट नहीं हूं.'

वहीं राज्यपाल से जब पूछा गया कि शिक्षा की बदहाली के लिए वह किसे जिम्मेदार मानते हैं, तो मलिक कहते हैं, 'शिक्षा की बदहाली के लिए हम सब दोषी हैं. क्लास ठीक से नहीं हो रहा, पढ़ाई समय पर नहीं हो रही. हमने कुलपतियों की बैठक कर सुधारने के लिए सख़्त क़दम उठाने को कहा है और अब कुलपतियों की बैठक भी हो रही है, जो पहले नहीं होती थी.'

पिछले दिनों राज्यपाल सत्यपाल मलिक के एक बयान ने काफी हलचल मचाया. दरअसल उन्होंने कहा था कि अगर लड़कियों को कोई दिक़्क़त हो तो वे सीधे राजभवन फ़ोन करें. इसे लेकर पूछे जाने पर राज्यपाल मलिक ने कहा, 'देखिये उस बात को ग़लत तरीक़े से लाया जा रहा था. आज पुलिस के रवैये को देखिए एक एफआईआर करवाने तक में दिक़्क़त होती है. मैंने कहा था कि अगर कोई समस्या होती है तो उसे दूर करने के लिए मैं हूं. इसका परिणाम हुआ कि तीन दिन बाद बेतिया से एक लड़की का फ़ोन आया.

सत्यपाल मलिक कहते हैं, 'मैं ऐसे हाथ धरे नहीं बैठ सकता, लेकिन ये काम सरकार का है. मैं एक और सेंटर नहीं बनना चाहता. मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं, लेकिन किसी लड़की को असहाय नहीं छोड़ सकते.'

(साभार: न्यूज़18)

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