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कर्नाटक के इस इलाके ने क्यों हिंदू-मुस्लिम राजनीति को नकारा

नेताओं को समझना होगा कि जनता अब उनसे हिंदू-मुस्लिम मुद्दों पर बहस नहीं बल्कि बेहतर सुविधाओं की उम्मीद करती है.

Updated On: Apr 28, 2018 06:39 PM IST

FP Staff

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कर्नाटक के इस इलाके ने क्यों हिंदू-मुस्लिम राजनीति को नकारा

कर्नाटक सरकार लंबे समय से उत्तर कन्नड़ के करवार को विकसित कर उसे गोवा की तरह बनाने कोशिश कर रही है. कर्नाटक का यह तटीय इलाका बेहद शांत और खूबसूरत है. हालांकि यहां बीच-बीच में पार्टी कार्यकर्ताओं के गाजे-बाजों का शोर सुनाई देता है.

कई कार्यकर्ता वोट के लिए यहां मछली बेचने वाली औरतों से भी संपर्क करते हैं. पार्टी कार्यकर्ताओं के बार-बार आने से ये औरते खासी परेशान होती हैं, उन्हें लगता है कि इससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है.

यह केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार हेगड़े का इलाका माना जाता है. उनके समर्थकों का मानना है कि क्षेत्र में हेगड़े का प्रभाव बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि बीजेपी यहां बेहतर प्रदर्शन करे.

साल 2013 में इस इलाके में बीजेपी को शिकस्त का सामना करना पड़ा था और इस बार कांग्रेस तरस खाने के मूड में बिल्कुल नहीं है. हेगड़े ने इस इलाके में जीत हासिल करने के लिए हिंदू कार्ड खेला है, उन्होंने पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से भी अनुरोध किया है कि वे साम्प्रदायिक हिंसा में मारे गए हिंदू कार्यकर्ताओं के घरों का दौरा करें. उत्तर कन्नड़ में 8 विधानसभा सीटें हैं जो दोनों ही पार्टियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं.

Photo Source: News-18

राहुल गांधी के दौरे के कार्यक्रमों पर गौर किया जाए तो हम देखेंगे कि इस हिंदुत्व कार्ड खेलने में कांग्रेस भी पीछे नहीं है. उन्होंने यहां के प्रसिद्ध धर्मस्थल और मुरुदेश्वर का दौरा किया.

स्थानीय लोगों का कहना है कि हमेशा की तरह इस बार भी नेता यह नहीं समझ पा रहे हैं कि असल में जनता को क्या चाहिए. एक स्थानीय नागरिक ने कहा, “हमें 24 घंटे बिजली चाहिए. हम चाहते हैं कि करवार का विकास एक हब की तरह हो जहां स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के ज्यादा अवसर हों. हमें मंदिरों या हिंदू-मुस्लिम मुद्दों से कोई लेना देना नहीं है. जब भी साम्प्रदायिक हिंसा होती है हमसे हमारा रोजगार छिन जाता है.”

इंडियन मुजाहिदीन के यासीन भटकल की वजह से सुर्खियों में आये भटकल शहर में हाल के सालों में कई स्कूल बने हैं, कुछ छोटे-मोटे बिजनेस शुरू हुए हैं लेकिन यह काफी नहीं है. यहां के लोगों को सरकार से अधिक उम्मीद है. धार्मिक मुद्दों के लिए यहां के लिए लोगों के पास कोई समय नहीं है.

धर्म के आधार पर वोटरों को रिझाने की राजनीति को यहां की जनता ने नकार दिया है और इसने बीजेपी और कांग्रेस दोनों की चिंता बढ़ा दी है. हेगड़े के समर्थकों का कहना है कि यहां का रास्ता आसान नहीं होने वाला है.

जब राहुल गांधी हेगड़े के क्षेत्र यानी उत्तर कर्नाटक में रैली करने पहुंचे तो हेगड़े दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक कर रहे थे. सूत्रों का कहना है कि बीजेपी यहां अपनी रणनीति में बदलाव कर सकती है.

बीजेपी के लिए चिंता की सबसे बड़ी बात यह है कि टिकट के बंटवारे को लेकर पार्टी के स्थानीय नेताओं ने हेगड़े का खुले तौर पर विरोध किया है. मुरुदेश्वर के एक नेता ने कहा, “मुझे टिकट मिलने की उम्मीद थी. मैं यहां सालों से काम कर रहा हूं. दिल्ली की तरफ से मुझे कहा गया कि हेगड़े मेरा ख्याल रखेंगे. लेकिन उनके करीबियों को टिकट दे दी गई. हमसे कहा गया है कि हम राहुल गांधी के मंदिर दौरों का विरोध करें. क्या हमारी जरूरत सिर्फ इसी के लिए है?”

पीएम मोदी यहां कुछ दिनों में दौरा करने वाले हैं और पार्टी को इससे काफी उम्मीदें हैं. उन्हें उम्मीद है पीएम अपने भाषणों में विकास और सुशासन पर जोर देंगे. इससे हिंदू-मुस्लिम राजनीति से हटकर पार्टी जमीनी मुद्दों पर फोकस कर सकेगी.

लंबे समय तक साम्प्रदायिक तनाव झेल चुका उत्तर कन्नड़ अब बदलाव चाहता है.

इस क्षेत्र में कांग्रस के प्रति भी लोगों का गुस्सा कम नहीं है. भटकल की अधिकतम आबादी मुस्लिम है. हालांकि राहुल गांधी की रैली में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे. स्थानीय लोगों का कहना है कि जब नेता हिंदुत्व की बात करते हैं तो उन्हें लगने लगता है कि उनकी कोई जरूरत नहीं है. एक नागरिक ने कहा, “उन्हें जितने मंदिरों में दर्शन करना है करें लेकिन हमें नौकरी दिलवाएं.” कांग्रेस मैनिफेस्टो में नौकरी का वादा किया गया है, हालांकि जनता को इस बात का भरोसा नहीं है कि उन्हें नौकरी मिल पाएगी.

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हेगड़े के करीबी ईश्वर नायक कहते हैं, “हम हिंदुत्व पर खेलना नहीं चाहते लेकिन हम हिंदू हैं और जनता यही चाहती है.”

अब समस्या यह है कि बीजेपी ने कई बार हेगड़े के बयानों के साथ समझौता किया है. भले ही पार्टी उनसे असहमत रही हो लेकिन यह मानकर चल रही थी कि यह उनके लिए काम करेगा. इस इलाके में हेगड़े की घटती लोकप्रियता बीजेपी की चिंता की बड़ी वजह है. यहां चुनाव जीतना बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुकी है.

सूत्रों का कहना है कि पीएम के दौरे से पहले हेगड़े से कहा गया है कि वह शांत रहें और लो प्रोफाइल बनाए रखें. बीजेपी को उम्मीद है कि मोदी लहर का उसे फायदा मिलेगा. वहीं कांग्रेस को उम्मीद है कि इलाके में सिद्धारमैया के बेहतर काम का इनाम जनता उन्हें देगी.

नेताओं को समझना होगा कि जनता अब उनसे हिंदू-मुस्लिम मुद्दों पर बहस नहीं बल्कि बेहतर सुविधाओं की उम्मीद करती है. चुनाव को अब बेहद कम वक्त बचा है और नेताओं के लिए काफी कुछ करना बाकी है.

( न्यूज़ 18 के लिए पल्लवी घोष की स्टोरी )

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