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शीतकालीन सत्र: जीएसटी, नोटबंदी, राफेल मुद्दों पर सरकार को घेर सकता है विपक्ष

दोनों सदन में जब सप्ताहांत की छुट्टियों के बाद सोमवार को बैठक होगी, उस दिन गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनाव परिणाम घोषित होंगे

Bhasha Updated On: Dec 14, 2017 10:04 PM IST

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शीतकालीन सत्र: जीएसटी, नोटबंदी, राफेल मुद्दों पर सरकार को घेर सकता है विपक्ष

शुक्रवार से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने जा रहा है. पूरा सत्र हंगामेदार रहने की संभावना है. विधानसभा चुनावों के परिणाम के बीच पक्ष और विपक्ष ने अपनी-अपनी तैयारी कर ली है. 15 दिसंबर से शुरू हो रहा सत्र 5 जनवरी तक चलेगा. इस सत्र के दौरान 25 विधेयक पेश किए जाने की उम्मीद है जिसमें से 14 नए विधेयक होंगे.

विपक्ष गुजरात चुनाव के चलते सत्र में विलंब के साथ साथ जीएसटी, नोटबंदी, राफेल और किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार को घेरेगा. हालांकि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने सत्र के दौरान सकारात्मक परिणाम निकलने की उम्मीद जताई है .

सत्र के पहले दिन लोकसभा में शुक्रवार को कोई कामकाज नहीं होगा और दिवंगत सदस्य को श्रद्धांजलि देने के बाद सदन दिनभर के लिए स्थगित किया जा सकता है. दोनों सदन में जब सप्ताहांत की छुट्टियों के बाद सोमवार को बैठक होगी, उस दिन गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनाव परिणाम घोषित होंगे.

सरकार विपक्ष के साथ किसी भी मुद्दे पर चर्चा को तैयार

संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार और संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि संसद चर्चा का सर्वोच्च स्थान है और सरकार नियमों के तहत किसी भी मुद्दे पर चर्चा करने को तैयार है. मोदी सरकार गरीब हितैषी सरकार है. विपक्ष को अपनी बात रखनी चाहिए और नियमों के तहत चर्चा करनी चाहिए.

सत्र के दौरान अध्यादेश के स्थान पर तीन विधेयक लाए जाने का प्रस्ताव किया गया है जिसमें वस्तु एवं सेवा कर (राज्य़ों को मुआवजा) अध्यादेश, 2017 के स्थान पर विधेयक शामिल है. ये अध्यादेश 2 सितंबर 2017 को जारी किया गया था.

इसके अलावा सरकार का ऋण शोधन और दिवाला संहिता (संशोधन) अध्यादेश और भारतीय वन (संशोधन) अध्यादेश, 2017 के स्थान पर भी विधेयक लाने का सरकार का प्रस्ताव है.

तीन तलाक पर सरकार ला सकती है विधेयक

सरकार का तीन तलाक पर लगी अदालती रोक को कानूनी जामा पहनाने के लिए भी विधेयक पेश करने और पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिलाने वाले संविधान संशोधन विधेयक को पुन: लाने का भी इरादा है.

सत्र के दौरान नागरिकता संशोधन विधेयक 2016, मोटरवाहन संशोधन विधेयक 2016 और ट्रांसजेंडर व्यक्ति अधिकार संरक्षण विधेयक को पारित कराने पर भी जोर दिया जा सकता है. शीतकालीन सत्र के दौरान कुल 14 बैठकें होंगी और ये 22 दिन तक चलेगा.

संसद सत्र देरी से बुलाने की विपक्ष की आलोचना पर सरकार का कहना है कि ये पहला अवसर नहीं है जब विधानसभा चुनावों के चलते संसद के सत्र को आगे बढ़ाया गया हो. ये पद्धति अतीत में विभिन्न सरकारों की ओर से अनेक अवसरों पर अपनाई जाती रही है.

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