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बीजेपी कह रही है कांग्रेस असहिष्णु है, क्या सच में ऐसा है?

संसद नहीं चलने देने और हंगामे के चलते पैसे की बर्बादी हो रही है, लेकिन, इसकी जिम्मेदारी कांग्रेस पर डालकर सरकार कांग्रेस को घेरना चाहती है

Updated On: Apr 05, 2018 08:31 AM IST

Amitesh Amitesh

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बीजेपी कह रही है कांग्रेस असहिष्णु है, क्या सच में ऐसा है?

प्रधानमंत्री आवास पर कैबिनेट की मीटिंग खत्म होने के कुछ देर बाद ही सरकार की तरफ से जो बयान आया उसने राजनीति को एक बार फिर से गरमा दिया. संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार ने ऐलान किया कि ‘बीजेपी और उसके सहयोगी दलों के सांसद 23 दिनों का वेतन और भत्ता नहीं लेंगे क्योंकि इस दौरान संसद में कोई काम-काज नहीं हो पाया है.’ अबतक 21 दिनों से संसद ठप्प है, लेकिन, आखिरी दो दिनों में भी संसद की कार्यवाही चलने की संभावना न के बराबर है.

संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार ने इस दौरान फिर से दोहराया कि सरकार संसद के अंदर हर मुद्दे पर चर्चा को तैयार है. यहां तक कि  टीडीपी, वाईएसआर कांग्रेस और कांग्रेस की तरफ से लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर भी अनंत कुमार ने चर्चा को लेकर हामी भरी. लेकिन, एक बार फिर से उनके निशाने पर विपक्ष रहा. विपक्षी पार्टियों में भी सबसे तेज हमला कांग्रेस पर ही रहा.

अनंत कुमार ने कहा ‘कांग्रेस लोकतंत्र विरोधी राजनीति कर रही है. कांग्रेस ने संसद रोक कर रखा है. कांग्रेस की नकारात्मक राजनीति के चलते काम नहीं हो पा रहा है’

उन्होंने कांग्रेस पर असहिष्णु राजनीति करने का आरोप लगा दिया. संसदीय कार्यमंत्री ने कहा ‘कांग्रेस असहिष्णु हो चुकी है. नरेंद्र भाई मोदी और बीजेपी को देश की सेवा करने का जो जनादेश मिला है, कांग्रेस उसके खिलाफ असहिष्णु प्रदर्शन कर रही है.’ अनंत कुमार ने कहा कि इसी असहिष्णुता के विरोध में हमलोगों ने वेतन-भत्ता नहीं लेने का फैसला किया है.

अपने इस बयान के दौरान अनंत कुमार ने लगातार जनता जनार्दन के पैसे का जिक्र किया. बार-बार वह जनता के पैसे की बर्बादी को दिखाकर उसका ठीकरा कांग्रेस के सिर फोड़ने की कोशिश कर रहे थे. जनता के पैसे की बर्बादी और संसद ठप्प होने की बात कहकर वो बताना चाह रहे थे कि जनता में गुस्सा है, जनता में आक्रोश है. तो क्या इस आक्रोश के कारण ही सत्ता पक्ष के सभी दलों ने वेतन-भत्ता नहीं लेने का फैसला किया है. लगता तो यही है. संसद नहीं चलने देने और हंगामे के चलते पैसे की बर्बादी हो रही है, लेकिन, इसकी जिम्मेदारी कांग्रेस पर डालकर सरकार कांग्रेस को घेरना चाहती है.

हंगामे के पीछे सिर्फ कांग्रेस नहीं

A supporter waves a Congress party flag as the party's newly elected president Rahul Gandhi addresses after taking charge as the president during a ceremony at the party's headquarters in New Delhi

हालाकि इस हंगामे के पीछे केवल कांग्रेस ही नहीं है. संसद के भीतर जो नजारा दिखता है, उससे साफ हो जाता है कि टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस के सांसद भी कई बार आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य के दर्जे की मांग को लेकर हंगामा करते रहे. इसके चलते भी सदन की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी.

इसके अलावा एआईएडीएमके के सांसदों की तरफ से हाथों में तख्तियां लेकर कावेरी जल प्रबंधन बोर्ड के गठन की मांग को लेकर भी हंगामा एक रुटीन हो गया है. तो क्या एआईएडीएमके के सांसदों की गलती नहीं है. क्या उनके हंगामे के कारण संसद की कार्यवाही में बाधा नहीं पड़ रही है. अगर इनके हंगामे से भी सदन बाधित हो रहा है, तो फिर अकेले कांग्रेस पर सारा ठीकरा क्यों फोड़ जा रहा है.

इस वक्त तमिलनाडु की राजनीति में एआईएडीएमके तो कांग्रेस और डीएमके के खिलाफ ही है. एआईएडीएमके के मौजूदा नेतृत्व से पहले की तुलना में बीजेपी और केंद्र सरकार से संबंध बेहतर ही हुए हैं. तो सवाल यही उठता है कि केंद्र सरकार और संसदीय कार्य मंत्री फ्लोर मैनेजमेंट के लिए एआईएडीएमके के सांसदों को क्यों नहीं मना पा रहे हैं. क्या यह सरकार की नाकामी नहीं है. या फिर बीजेपी की एआईएडीएमके के साथ मिलीभगत है जो कि अविश्वास प्रस्ताव को हंगामे की भेंट चढ़ाना चाह रही है. यह कई सवाल हैं जिसको लेकर सरकार से भी सवाल पूछे जाएंगे, क्योंकि सदन चलाने की जिम्मेदारी सरकार की भी होती है.

चुनावी तैयारी के दांव-पेंच

tdp vs bjp

दरअसल, सभी राजनीतिक दल राजनीतिक नफा-नुकसान के हिसाब से ही अपनी-अपनी रणनीति बना रहे हैं. मोदी सरकार चार साल पूरा करने जा रही है. अगले साल इस वक्त तक तो लोकसभा चुनाव का बिगुल बज चुका होगा. लिहाजा वक्त कम बचा है और सभी अपनी सियासी जमीन को मजबूत करने में लगे हैं.

टीडीपी और वाईएसआर कांग्रेस के पास तो अविश्वास प्रस्ताव लाने को लेकर संख्या बल भी नहीं है. लेकिन, अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस देकर सदन में हंगामे की शुरुआत कर इन दलों ने अपने प्रदेश की राजनीति को साधने की कोशिश की. आंध्र प्रदेश में इन दोनों ही क्षेत्रीय दलों की कांग्रेस से टक्कर है.

कांग्रेस को जब लगा कि आंध्र प्रदेश में विशेष राज्य के दर्जे के नाम पर पॉलिटिकल माइलेज तो इन दोनों क्षेत्रीय दलों को मिल रहा है तो कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ खुद ही अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दे दिया. हालाकि कांग्रेस का मुद्दा सरकार की नाकामियों का था. लेकिन, मुख्य विपक्षी दल का नोटिस यह जताने के लिए काफी था कि विपक्षी दलों में भी सरकार को घेरने के लिए एकराय नहीं है.

संसद का बजट सत्र 6 अप्रैल को खत्म हो रहा है.अब बाकी बचे दो दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप ही होता रहेगा. लेकिन, वेतन-भत्ता नहीं लेने के सत्ता पक्ष के सांसदों के फैसले ने कांग्रेस समेत पूरे विपक्ष पर नैतिक दबाव बना दिया है.

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