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क्या विपक्ष नोटबंदी के ब्रह्मास्त्र को फुस्स कर पाएंगे?

नोटबंदी आगामी विधानसभा चुनाव में बीजेपी के लिए ब्रह्मास्त्र का काम करेगा.

Updated On: Nov 20, 2016 02:38 PM IST

Pramod Joshi

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क्या विपक्ष नोटबंदी के ब्रह्मास्त्र को फुस्स कर पाएंगे?

नोटबंदी का पहला हफ्ता पूरा होते-होते यह बात समझ में आने लगी है कि जहांं बीजेपी इसे मास्टरस्ट्रोक मानकर चल रही थी, वहीं कांग्रेस समेत दूसरे विरोधी दलों ने उसमें छिद्र खोज लिए हैं.

पी चिदंंबरम, मनीष तिवारी और रणदीप सुरजेवाला के अलावा अरविंंद केजरीवाल और ममता बनर्जी जैसे नेताओं की उम्मीदें जनता की परेशानियों पर टिकी हैं.

केजरीवाल और राहुल गांधी ने अपने कार्यकर्ताओं से कहा है कि वे लाइन में खड़े लोगों के लिए पानी वगैरह का इंतजाम करें. यह अपील दरअसल परोक्ष आलोचना है. वैसी ही जैसी केजरीवाल ने ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की तारीफ करके की थी.

परीक्षा जनता के धैर्य और बीजेपी के प्रचार तंत्र की है. इस खेल में जोखिम भी कम नहीं हैं. विरोधी दल इस किस्म की जानकारी पाने में कामयाब हुए हैं कि इस फैसले की घोषणा करने से पहले बीजेपी ने अपने नोटों को ठिकाने लगाने का काम कर लिया था.

मोदी सरकार का मास्टर स्ट्रोक क्या उल्टा भी पड़ सकता है?

सवाल है कि मोदी सरकार का मास्टर स्ट्रोक क्या उल्टा भी पड़ सकता है? विरोधी दल अभी अपना ध्यान जनता को हुई असुविधा पर केंंद्रित कर रहे हैं. पर जनता की प्रतिक्रिया से लगता है कि लोग तकलीफ सहने को तैयार हैं बशर्ते इससे काले धन पर रोक लगे.

माना जा रहा है कि नोटबंदी का फैसला आने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी के लिए ब्रह्मास्त्र का काम करेगा. इसका व्यावहारिक असर दूसरे दलों के साधनों पर पड़ेगा.

यह बात छिपी नहीं है कि राजनीतिक दल चुनाव के दौरान अपने पास जमा कैश का इस्तेमाल करते हैं. यह कैश अचानक रद्दी कागजों में तब्दील हो गया है. शायद इसीलिए लगभग सभी दलों ने इस फैसले का विरोध किया है.

पर यदि यह संदेह पुष्ट होने लगे कि बीजेपी ने अपना इंतजाम पहले से करके दूसरे दलों को मुसीबत में डाला है, तब कहानी बदल भी सकती है. इसे पहले बसपा नेता मायावती ने कहा और अब सीपीएम ने बंगाल से कुछ प्रमाण जुटाए हैं, जिनसे लगता है कि कहीं न कहीं पार्टी को जानकारी थी.

देश नाम अपने संदेश में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि इस फैसले की जानकारी किसी को नहीं है. हम काला धन रखने वालों को समय ही नहीं देंगे जिससे कि वे अपनी रकम को बचा सकें पर संकेत कुछ और हैं.

अंदेशा इस बात का है कि राजनीतिक दल इस बात को तूल देंगे. वे सफल नहीं भी हुए तब भी जनता के मन में संदेह का बीज जरूर बोना चाहेंगे. वैसे ही जैसे नब्बे के दशक में वीपी सिंह बोफोर्स मामले में राजीव गांधी को लेकर जनता के मन में संदेह का बीज बोने में सफल हुए थे.

दैनिक ‘जागरण’ में 27 अक्टूबर 2016 को खबर प्रकाशित हुई, जिसमें बताया गया था कि केंद्र सरकार काला धन निकालने के लिए जल्द ही नया कदम उठा रही है, जिसके लिए सरकार दो हजार रुपए का नोट जारी करने की तैयारी में है. यह खबर शनिवार को सोशल मीडिया में प्रचारित हुई और जल्द ही निष्कर्ष निकाले जाने लगे.

मायावती का आरोप

इसके दो दिन पहले बसपा नेता मायावती ने कहा था कि मोदी सरकार ने ढाई साल के कार्यक्रम में अपना पूरा इंतजाम करने के बाद देश की जनता में हाहाकार जैसा माहौल कर दिया है.

देश के धन्नासेठों का पैसा विदेश पहुंच चुका है. शनिवार को प्रशांत भूषण ने ट्वीट किया, ‘शॉकिंग! जागरण को 27 अक्तूबर को पहले से जानकारी थी कि नोट बंद होने वाले हैं! बांग्ला दैनिक कहता है कि 8/11 बीजेपी के खाते में एक करोड़ रुपए जमा हुए।’

बंगाल में सीपीएम के मुखपत्र ‘गणशक्ति’ ने पहले सफे की लीड खबर में दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंंद्र मोदी ने जब 500 और 1000 के नोटों को बंद करने की घोषणा की उसके चंद घंटे पहले भाजपा की बंगाल शाखा ने कोलकाता के सेंट्रल एवेन्यू में इंडियन बैंक की शाखा में एक करोड़ रुपए जमा किए जो 500 और 1000 के करेंसी नोटों में थे.

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अखबार ने खबर के साथ बैंक के स्टेटमेंट की तस्वीर भी छापी है. पहले 60 लाख रुपए 1000 के नोटों में और फिर 40 लाख रुपए 500 के नोटों की शक्ल में जमा किए गए. पार्टी का कहना है कि इसके पहले इसी बैंक में 1 नवंंबर को पार्टी के करेंट एकाउंट में 75 लाख रुपए जमा किए गए. इसके बाद 5 नवंंबर को 1.25 करोड़ रुपए जमा हुए.

यानी घोषणा के पहले छह दिन में 3 करोड़ रुपया जमा हुआ. सीपीएम के राज्य सचिव सूर्यकांत मिश्रा का कहना है कि क्या पार्टी के सीनियर नेताओं को इस फैसले की जानकारी थी? आखिर क्या वजह थी कि इस घोषणा के ठीक पहले इतनी बड़ी रकम जमा की गई?

अभी यह शुरुआत है पर कुछ और जगहों से इस प्रकार के तथ्य सामने आए तो इसका प्रचार होने में देर नहीं लगेगी. राजनीति तथ्यों के साथ-साथ आभासों और अफवाहों पर भी चलती है.

वैसे ही जैसे शुक्रवार को अफवाहों की बिना पर उत्तर प्रदेश के कुछ शहरों में नमक तीन-चार सौ रुपए किलो में बिक गया. बहरहाल मास्टर स्ट्रोक खतरे में है.

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