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दोबारा महासचिव बनने पर येचुरी को बीजेपी का शुक्रिया अदा करना चाहिए

पोलित ब्यूरो के कुछ सदस्य येचुरी के बजाय पार्टी महासचिव के पद पर त्रिपुरा के पूर्व सीएम माणिक सरकार को लाना चाह रहे थे

Updated On: Apr 23, 2018 05:43 PM IST

FP Staff

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दोबारा महासचिव बनने पर येचुरी को बीजेपी का शुक्रिया अदा करना चाहिए
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भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) ने हैदराबाद में हुए 22वें पार्टी कांग्रेस अधिवेशन में सीताराम येचुरी को दोबारा राष्ट्रीय महासचिव चुना है. इस पद के लिए दूसरी बार उनके चयन को सीपीएम की 95 सदस्यीय केंद्रीय समिति ने मंजूरी दी है. महासचिव पद के लिए येचुरी को दोबारा चुनने के बाद सीपीएम ने उनके राजनीतिक-रणनीतिक विचारधारा वाले रेजोल्यूशन को भी अपना लिया है. जनवरी में सीपीएम ने पूर्व महासचिव प्रकाश करात और सीताराम येचुरी के रेजोल्यूशन ड्राफ्ट पर वोटिंग कराई थी. जिसमें करात के रेजोल्यूशन को ज्यादा वोट मिले थे.

माणिक सरकार को महासचिव बनाना चाहते थे कुछ सदस्य

बेशक येचुरी के दोबारा महासचिव चुने जाने के पक्ष और विपक्ष में कई तर्क दिए जा रहे हों, लेकिन उनके चयन को संवैधानिक रूप से गलत नहीं ठहराया जा सकता. रेजोल्यूशन ड्राफ्ट पर जनवरी में हुई वोटिंग में येचुरी के रेजोल्यूशन ड्राफ्ट को भले ही कम वोट मिले हो, लेकिन महासचिव पद के चुनाव में वह 94 सदस्यों वाली केंद्रीय समिति का समर्थन पाने में कामयाब रहे.

अब देखना होगा कि सीताराम येचुरी 17 सदस्यीय पोलित ब्यूरो के सामने खुद को कैसे उपयोगी साबित करते हैं. क्योंकि, पोलित ब्यूरो के कुछ सदस्य येचुरी के बजाय पार्टी महासचिव के पद पर त्रिपुरा के पूर्व सीएम माणिक सरकार को लाना चाह रहे थे. वहीं, ये देखना भी दिलचस्प होगा कि येचुरी बीजेपी के खिलाफ सीपीएम की कैसे मदद करेंगे?

सरकार ने वोटिंग से पहले ही अपना नाम  वापस लिया

प्रो-करात पोलित ब्यूरो मेंबर और तेलंगाना से केंद्रीय समिति के सदस्य एस विरैया ने महासचिव पद के लिए माणिक सरकार का नाम आगे बढ़ाया था. वहीं, आंध्र प्रदेश के तीन सदस्यों एस पुण्यवथी (बीवी रघुवुल्लू की पत्नी), सीटू की ऑल इंडिया प्रेसिडेंट के हेमलता और उनके बेटे आर अरुण कुमार ने भी येचुरी के दोबारा चयन का विरोध किया. वहीं अन्य प्रतिनिधि ममता (हेमलता की बहू) ने सीपीएम-कांग्रेस के गठजोड़ की कवायद करने पर येचुरी पर कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की थी. उन्होंने येचुरी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग भी की थी. हालांकि, येचुरी को बाकी 800 से ज्यादा प्रतिनिधियों का समर्थन था. ऐसे में माणिक सरकार ने वोटिंग से पहले अपना नाम वापस ले लिया.

येचुरी को अवसरवादी और फासीवादी कहा गया

केरल के कुछ कट्टरपंथियों ने येचुरी पर व्यक्तिगत हमला भी किया. सूत्रों ने बताया कि राज्य के एक पूर्व सांसद ने येचुरी की तुलना मिखाइल गोर्बाचेव (पूर्व सोवियत राष्ट्रपति) से की थी. उन्होंने कहा था कि येचुरी ने पार्टी के हितों को नुकसान पहुंचाया है.

सीपीएम के लिए कांग्रेस को फायदेमंद बताने पर एक अन्य कॉमरेड ने येचुरी को 'अवसरवादी' तक कह दिया था. उन्होंने यह तक आरोप लगा दिया था कि येचुरी पार्टी के खिलाफ माहौल बना रहे हैं. एक अन्य कॉमरेड ने तो येचुरी की तुलना फासीवादी नेता से कर दी थी.

हालांकि, शनिवार-रविवार को 800 प्रतिनिधियों ने येचुरी के पक्ष में चीजें बदल दीं. वो दोबारा सीपीएम के महासचिव चुने गए. सीपीएम ने येचुरी का रेजोल्यूशन भी अपना लिया, जिसमें उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि अगर आगामी लोकसभा चुनाव में बीजेपी के खिलाफ लड़ाई लड़नी है, तो कांग्रेस का 'हाथ' थामना ही होगा.

महासचिव बनने पर येचुरी को बीजेपी का शुक्रिया अदा करना चाहिए

हालांकि, दोबारा महासचिव बनने पर येचुरी को बीजेपी खासकर पीएम मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह का शुक्रिया अदा करना चाहिए. क्योंकि इन्होंने कांग्रेस में बीजेपी के खिलाफ मूड बनाया.

कॉमरेड के कई नेताओं का मानना है कि मोदी-शाह के नेतृत्व में बीजेपी ने फासीवादी प्रवृत्तियों को बढ़ावा दिया. देश में किसानों की हालत पस्त है. दलितों और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार के मामले आए दिन सामने आ रहे हैं. इससे येचुरी के पक्ष में चीजें गईं. समिति के कई प्रतिनिधियों को लगा कि बीजेपी और कांग्रेस एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. इसलिए एंटी-कांग्रेसवाद की जरूरत है. ताकि बीजेपी के खिलाफ माहौल बनाया जा सके.

नए पोलित ब्यूरो सदस्यों ने येचुरी के लिए एक-तिहाई समर्थन दिया. वहीं, सूत्रों के मुताबिक नए केंद्रीय समिति से उन्हें 60 फीसदी समर्थन मिला. अब देखना है कि सीपीएम सीताराम येचुरी के अनुभवों और रणनीतियों से कैसा और कितना फायदा उठाती है?

(के बेनेडिक्ट लेखक, सीनियर जर्नलिस्ट और राजनीतिक समीक्षक हैं. ये उनके निजी विचार हैं.)

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