S M L

एसपी-कांग्रेस गठबंधन से सिर्फ राहुल और अखिलेश खुश हैं

एसपी-कांग्रेस गठबंधन भले हो गया हो लेकिन दोनों पार्टियों के वोट ट्रांसफर हों, ये मुश्किल है

Sitesh Dwivedi Updated On: Feb 01, 2017 08:02 AM IST

0
एसपी-कांग्रेस गठबंधन से सिर्फ राहुल और अखिलेश खुश हैं

'राजनीति और गणित' का करीबी रिश्ता जरूर है, लेकिन राजनीति में गणित के फार्मूले काम नहीं करते. राजनीति की गणित को धरातल पर खरा उतरने के लिए 'केमिस्ट्री' जरूरी होती है.

उत्तर प्रदेश में गणित के जरिये सत्ता वापसी के रास्ते पर निकली समाजवादी पार्टी को इस 'केमिस्ट्री' की तपन महसूस होने लगी है.

'केमिस्ट्री' की यह कमजोरी तो कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और एसपी मुखिया अखिलेश यादव की पत्रकार वार्ता में ही दिखने लगी थी. हालांकि, उस समय पत्रकारों के चुभते सवालों से दोनों नेताओं ने 'बुद्ध की खामोशी' ओढ़ पार पा लिया था. लेकिन कई बार मौन ज्यादा मुखर होता है.

राहुल के पीएम प्रत्याशी पद से संबंधित सवाल में अखिलेश का मौन बहुत कुछ कह गया. जबकि, इसी मंच से राहुल का 'माया सम्मान' भी लोगों के चेहरों पर कई आश्चर्य के चिन्ह छोड़ गया. बड़ी मशहूर गजल है 'दो और दो का जोड़ हमेशा चार नहीं होता है.'

उत्तर प्रदेश की राजनीति में में ये गजल अपने को दोहराती नजर आ रही है. जमीन पर कार्यकर्ताओं का मनभेद कम न था, अखिलेश की बगावत से घुट रहे पिता मुलायम ने कांग्रेस प्रत्याशियों के खिलाफ कार्यकर्ताओं को उतरने को कह उसे आवाज दे दी.

शिवपाल दे सकते हैं कांग्रेस को झटका 

Shivpal Yadav

इस बीच अपनी पार्टी से नाराज चल रहे शिवपाल यादव और राष्ट्रीय लोकदल के बीच कुछ ऐसा चल रहा है, जो गठबंधन में छोटी हिस्सेदार कांग्रेस को झटका दे सकता है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश कांग्रेस के हिस्से ज्यादा सीटें आई हैं.

जाहिर है आकंड़ों में भले ही गठबंधन मजबूत दिखे लेकिन आपस में 'केमिस्ट्री' नहीं बैठा पा रहा है. दरअसल राजनीति में आंकड़ों की आभासी मरीचिका ने कई बार दिग्गजों की सत्ता प्यास को धोखा दिया है.

पार्टी की कलह और कानून व्यवस्था के दाग को छुपाने के लिए एसपी ने जब कांग्रेस का हाथ पकड़ा तो उसके दिमाग में कांग्रेस को पिछले चुनाव में मिले 11.63 प्रतिशत मतों को जोड़ अहम था.

राज्य में वजूद की जंग लड़ रही कांग्रेस साइकिल के करिअर पर बैठते ही सपा के 29.15 फीसदी मत अपनी झोली में मान रही हैं. लेकिन 'माइनस माइनस प्लस' का गणित का फार्मूला राजनीति में सही नहीं होता.

ऐसे ही फार्मूले के भरोसे कांग्रेस ने यूपी में कभी बीएसपी का साथ पकड़ा था. नतीजा कांग्रेस 27 साल से राज्य में सत्ता से दूर है. पार्टी नेताओं की गणित को जमीन पर केमिस्ट्री का साथ नहीं मिला और 'कांग्रेसी चौबे, दुबे बनकर लौटे'. जबकि, बीएसपी राज्य में राजनीतिक ताकत बन गई.

ऐसे में महज आंकड़ों के भरोसे राज्य में जीत पर दांव लगा रहे दोनों दलों को जमीनी हकीकत को समझना और इससे पर पाना होगा. राज्य में 27 साल यूपी बेहाल के नारे पर चुनाव में उतरी कांग्रेस ने लंबे समय बाद कार्यकर्ताओं में उत्साह भरा था. अब जब अचानक पार्टी ने गठबंधन का एलान कर दिया है, क्या वे कार्यकर्ता जो कांग्रेस के लिए चुनाव में जाने को तैयार थे, सपा के साथ हो लेंगे?

देवरिया जिले के 55 वर्षीय राम कृपाल कहते हैं, 'हमारी लड़ाई बीजेपी से नहीं एसपी की गुंडागर्दी से थी, हम उन्हें कैसे वोट दे सकते हैं?' यह केवल राम कृपाल का दर्द नहीं है. कांग्रेस के ज्यादातर कार्यकर्ता या उनके पीछे खड़े लोग एसपी से नाराज हैं. उसके शासन से नाराज हैं.

राहुल से नाराज हैं कांग्रेसी कार्यकर्ता

Rahul-Akhilesh 2

वे महज राहुल गांधी के कहने भर से अपनी परेशानियां छोड़ एसपी के वोटर बन जायेंगे, मुश्किल लगता है. गोरखपुर के लल्लू पांडे कहते है, ‘ ब्राह्मण चेहरा लेकर पार्टी आई थी. सोचा था अब यूपी में कुछ बदलेगा. लेकिन हमारे नेता ने हमें एसपी के हाथ बेच दिया.’

लल्लू आगे कहते हैं, ‘हम सपा को वोट कैसे दे सकते हैं? इससे ठीक तो बहन जी को वोट दें, गुंडागर्दी से मुक्ति तो मिलेगी.’ कुछ ऐसा ही हाल एसपी के कार्यकर्ताओं का भी है.

पार्टी में हुई  उथल-पुथल से पार्टी का एक बड़ा वर्ग नाराज़ है. भले ही अखिलेश के मुख्यमंत्री पद पर होने के नाते वह मौन हों लेकिन गठबंठन को लेकर पार्टी में असन्तोष बहुत ज्यादा है.

ऐसे में मुलायम का बयान कि वे 'कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच हुए गठबंधन के खिलाफ हैं,' ने आग में घी का काम कर दिया है. इन कार्यकर्ताओं का कहना है कि 'हम कांग्रेस के बजाय लोकदल को वोट देंगे'.

मेरठ के हरनारायण यादव कहते है, 'पहले नेता जी को छोड़ा फिर जिससे जीवनभर लड़े उसका हाथ पकड़ लिया. जीवनभर कांग्रेस से दूर रहा अब पंजे पर वोट कैसे दूं, सो लोकदल के साथ जाने का फैसला किया है'. यह नाराजगी केवल कार्यकर्ताओं तक नहीं है. एसपी छोड़कर गए अंबिका चौधरी और नारद राय जैसे नेता सपा को जितना नुकसान पहुचाएंगे उससे ज्यादा पार्टी के भीतर वे नेता जो अपनी आवाज उठा नहीं रहे हैं.

मुलायम सिंह बिगाड़ेंगे गठबंधन की गणित

Mulayam Singh 1

मुलायम का कहना कि अखिलेश ने गठबंधन कर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं के भविष्य को खराब किया है. इसके मायने उनसे पूछिये जो कांग्रेस के हिस्से में गई सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में थे. जिनका टिकट पावर सेंटर बदलने के बाद काट दिया गया.

शक्ति संतुलन बदलने के साथ पार्टी में हाशिये पर पड़े एक नेता अपना दर्द जाहिर करते हुए कहते हैं, 'अखिलेश बाबू मुख्यमंत्री हैं, मीडिया को प्रचार का पैसा जा रहा है. टीवी पर खुद को देख शहंशाह समझना और चुनकर शहंशाह बनना अलग-अलग बात है. चुनाव बाद यह बात अखिलेश जी समझेंगे लेकिन 5 साल तो जा ही चुके होंगे'.

हालांकि गठबंधन को जीत का फार्मूला मन चुके अखिलेश इन तर्कों से परे नए समीकरण की ओर देख रहे हैं. वे कार्यकर्ताओं से कहते है 'पिछली बार सपा को 224 सीटें और कांग्रेस को 28 सीटें मिली थीं. इस बार हम 300 से भी ज्‍यादा सीटें जीतने जा रहे हैं.'

पार्टी में उत्साह भरते हुए वे मंच से कहते हैं, 'अब तो कांग्रेस भी साथ आएगी, पैडल पर उनका हाथ लग गया तो सोचो कितनी तेज चलेगी साइकिल.' नीचे बैठे कार्यकर्ता भी तालियां बजा कर इसका समर्थन करते हैं.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
सदियों में एक बार ही होता है कोई ‘अटल’ सा...

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi