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हमने BJP के लिए हिंदुत्व के नगाड़े बजाए, हमपर ही अविश्वास दिखाया, उतर गया न घमंड: शिवसेना

लोकसभा में शुक्रवार को सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के बाद वोटिंग होगी. इन सबके बीच शिवसेना अपना स्टैंड क्लियर नहीं कर सकी है

Updated On: Jul 20, 2018 10:21 AM IST

FP Staff

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हमने BJP के लिए हिंदुत्व के नगाड़े बजाए, हमपर ही अविश्वास दिखाया, उतर गया न घमंड: शिवसेना

लोकसभा में शुक्रवार को सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर बहस के बाद वोटिंग होगी. इन सबके बीच शिवसेना अपना स्टैंड क्लियर नहीं कर सकी है. गुरुवार को पहले खबर आई कि शिवसेना की ओर से पार्टी सांसदों को व्हिप जारी किया गया है कि वह सरकार के समर्थन में वोट करें. इसके कुछ घंटे बाद शिवसेना की ओर से कहा गया कि इस पर निर्णय शुक्रवार को किया जाएगा.

शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' में शुक्रवार को अविश्वास प्रस्ताव के मुद्दे पर संपादकीय प्रकाशित की गई है. इसमें लिखा गया है, 'विपक्ष लोकसभा में मोदी के खिलाफ प्रस्ताव लाया है. उसपर चर्चा की गड़गड़ाहट होगी. आरोप-प्रत्यारोप की बिजलियां चमकेगी. आखिर में प्रधानमंत्री मोदी कुरुक्षेत्र में युद्ध जीतने की शान में हमेशा की तरह से भाषण करंगे. बीजेपी के पास आकड़ों का बहुमत है. इसलिए मतदान के बाद सरकार गिर जाएगी, ऐसा विचार कोई नहीं कर रहा. सोनिया गांधी ने कहा है कि आंकड़ा हमारे पास भी है. राजनीति में फौज का आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए इस तरह की गर्जनाए करनी पड़ती है. सरकार गिरने जितना आकड़ा अपने पास नहीं है यह विरोधियों को भी पता है लेकिन विरोधियों द्वारा लाया गया अविश्वास प्रस्ताव सरकार गिरने के लिए नहीं बल्कि मोदी सरकार को अभियुक्त के पिंजरे में खड़ा कर उनकी चमड़िया उधेड़ने के लिए हैं.'

लिखा गया है, ' संसद में सरकार पर हल्ला बोल होगा और उन आरोपो का गोलमोल जवाब देकर मेजे थपथपाई जाएंगी. जिसके चलते लोकतंत्र के मूल्यों का हमेशा की तरह जतन वगैरह होगा. मूलत: बहुमत का अर्थ जनभावनाओं का केंद्र, ऐसा न होकर बहुमत वालो की तानाशाही ऐसा हो गया हैं. लोगों को सपने दिखना. श्रद्धा और भावनाओं से खिलवाड़ कर वोट मांगना और लोगो द्वारा झोली भरकर मतदान करने के बाद इन सभी चुनावी जुमलों को कभी भी स्वच्छ न होनेवाली गंगा में डुबो देना है.'

सामना ने संपादकीय में कहा, 'दुनिया ने हम पांचवे नंबर की अर्थव्यवस्था बन गए हैं. ठीक है, लेकिन उस पांचवे क्रमांक की अर्थव्यवस्था ने हमारे किसानों को मौत की दहलीज से नहीं बचाया. उस पांचवे क्रमांक की अर्थव्यवस्था ने कश्मीर में सैकड़ों जवानों की शहादत को नहीं रोका. नाणर को रिफाइनरी, गैस चेंबर को रोको, ऐसा चिल्लाकर कहने वाली जनता के सीने में बन्दूक ताननेवाली अर्थव्यवस्था, तानाशाही की राह जाने वाली होगी. तो उस पर पुष्प वर्षा करने की बजाय हम जनता की अदालत के सामने खड़े होकर पापक्षालन करेंगे. जिस पांचवे क्रमांक की अर्थव्यवस्था में गरीबों तथा बेरोजगारी को स्थान नहीं है वह अर्थव्यवस्था किस काम की? यहां बकरियों को बचाकर इंसान को मारने वाले कसाई राज करते हैं. पूरा संवेदना शून्य कामकाज जारी है.'

सामना के संपादकीय में कहा, 'मूलतः मौजूदा सरकार ने जो बहुमत या विश्वास प्राप्त किया है वही संदेहास्पद हैं. जिस जीत पर प्रशनचिन्ह हैं, वे बहुमत के भजन न गाएं. अकूत धन, सत्ता की तानाशाही और मतदान मशीनों में हेराफेरी ही जीत का त्रिसूत्र होगा तो लोकतंत्र के सिर्फ बिजुके ही हमारे देश मे खड़े हैं और इन बिजुकों के असितत्व की लड़ाई की खड़खड़ाहट अब शुरू है.

लिखा गया है, 'विरोधियों को एक रखना यह सोनिया गांधी के लिए चुनौती है. यही सवाल एनडीए नामक तांगे के रथ पर सवार है. लोगों से भी पूछा जा सकता है. बीजेपी के पास खुद का आंकड़ा बड़ा हैं जिन लोगों ने यह अविश्वास प्रस्ताव पेश किया है वे तेलुगू देशम वाले कल तक एनडीए के खेमे में थे. वे क्यों छोड़ कर गए ? महाराष्ट्र में जिन्होंने दूध का आंदोलन छेड़ा है वे राजू शेट्टी भी एनडीए के ही पालकी वाहक थे न ?'

सामना के संपादकीय में कहा गया, 'ऐरे गेरे नत्थू खैरों को जाने दो लेकिन जिस शिवसेना ने बुरे समय मे बीजेपी का साथ दिया, हिन्दुत्व के लिए बीजेपी के नगाड़े बजाए वह शिवसेना भी कागज पर एनडीए के साथ हैं. फिर 25 वर्ष साथ देने वाली शिवसेना पर अविश्वास दिखाकर अब इसके आगे हम पर ही यह जो घमण्ड दिखाया गया वह घमंड भी आखिरकार उतरा ही न?

सच तो यह है कि जरुरत खत्म होते ही साथ छोड़ने की विकृति से किया गया राज लोगो के अविश्वास के ही योग्य हैं. सवाल कश्मीर का हो या जनता को अच्छे दिन दिखाने का,महंगाई का हो या हमारे नाणर परियोजना चाहे गरीबों का सवाल हो, सभी स्तर पर जनता की पीठ में सिर्फ खंजर घोपा गया. सच बोलना देशद्रोह हो जाता हैं लेकिन विश्वाघात करना, जनता को छलना यह शिष्टाचार बन जाता है.'

(साभार न्यूज 18)

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