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इंदिरा के अत्याचारों का कंधा और निशाना राहुल गांधी: मोदी ने भाषण नहीं दिया, चुनावी दांव मारा है

आपातकाल के काले दिनों की याद कर मोदी ने कांग्रेस पर हमले की शुरुआत की. बीजपी के नेता अब देश भर में इसी सिलसिले को आगे बढ़ा रहे हैं.

Updated On: Jun 26, 2018 04:47 PM IST

Amitesh Amitesh

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इंदिरा के अत्याचारों का कंधा और निशाना राहुल गांधी: मोदी ने भाषण नहीं दिया, चुनावी दांव मारा है
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आपातकाल के 43 साल पूरे होने के मौके पर पीएम मोदी मुंबई में थे. एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने एक के बाद एक हमला करके कांग्रेस को आपातकाल लागू करने को लेकर कठघरे में खड़ा कर दिया. आपातकाल लगाने के दिन को बीजेपी पूर देश में काला दिवस के तौर पर मना रही है. मोदी मंगलवार भी कांग्रेस की तानाशाही मानसिकता का हवाला देकर यह जताने की कोशिश करते नजर आए कि एक परिवार की पार्टी कांग्रेस के रवैये में कोई बदलाव नजर नहीं आया है.

मोदी ने कहा दलितों और मुसलमानों को आरएसएस के नाम पर धमकाया जाता है. उन्होंने कहा कि इस तरह का भ्रम फैलाया जाता रहा है कि आरएसएस वाले, जनसंघ वाले मुसलमानों को काट देंगे, मार देंगे, अब यह फैलाने की कोशिश हो रही है कि देश के दलित संकट में हैं.

नरेंद्र मोदी ने इस कोशिश को लेकर कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल खड़े किए. दरअसल, मोदी भी इस बात को समझ रहे हैं कि इस वक्त देश भर में उनकी सरकार के खिलाफ दलित विरोधी माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है. कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दल लगातार दलित-उत्पीड़न के मुद्दे को उठाकर सरकार पर हमलावर हैं.

देश के कई हिस्सों और खासतौर से बीजेपी शासित राज्यों में हुई एकाध घटनाओं को लेकर विपक्ष मोदी सरकार को घेरता रहा है. अब सुप्रीम कोर्ट की तरफ से दलित-उत्पीड़न से जुड़े मामले में हाल के फैसले के बाद तो विपक्ष इसे सरकार की विफलता के तौर पर ही पेश कर रहा है. कांग्रेस समेत विपक्षी दलों का दावा है कि इससे दलितों के खिलाफ अपराध बढ़ेगा और उन्हें इंसाफ नहीं मिल सकेगा.

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी दलितों से जुड़े इन तमाम मुद्दों पर मोदी सरकार से ज्यादा आरएसएस पर हमला करते हैं. राहुल गांधी संघ परिवार को ही सीधे-सीधे दलित विरोधी साबित करने की कोशिश करते हैं.

इन सभी बातों का जवाब मोदी ने दिया. आपातकाल के दौर याद करते हुए इसे संघ और बीजेपी को घेरने की कोशिश बताकर मोदी नाराज दलितों को अपने पाले में लाने की कोशिश कर रहे हैं.

मोदी बार-बार संविधान और लोकतंत्र बचाने को लेकर अपनी सरकार की प्रतिबद्धता भी दिखा रहे हैं. एक बार फिर आपातकाल के दौर को याद कर उन्होंने बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के संविधान को लेकर अपनी आस्था जताई. मोदी ने कहा कि कांग्रेस की तरफ से यह भ्रम फैलाया जा रहा है कि मोदी संविधान खत्म कर देगा.

दलितों, वंचितों, शोषितों और पीड़ितों को बराबरी का हक दिलाने की अपनी बचनबद्धता को दोहराते हुए मोदी ने साफ कर दिया कि समाज के हर तबके को बराबरी का हक दिलाने के लिए उनकी सरकार अपना काम करती रहेगी.

लेकिन, अपने भाषण में मोदी ने कांग्रेस पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाया. मोदी बार-बार यह दिखाना चाह रहे थे कि कांग्रेस इस वक्त 50 से कम सीटों पर सिमट गई है, लेकिन, उसकी मानसिकता नहीं बदली है.

आपातकाल से तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि आज भी महाभियोग के डर से जजों को डराया जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग लाने की कोशिश की गई थी. मोदी इसे लोकतंत्र के खिलाफ और कांग्रेस की तानाशाही कार्रवाई बताकर तुलना आपातकाल से कर रहे हैं.

कांग्रेस की तरफ से कुछ मुद्दों पर चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी उंगली उठाई गई है. मोदी इस पर भी पलटवार कर इसे कांग्रेस की आपातकाल की तानाशाही मानसिकता से जोड़ रहे हैं.

संविधान और मूल्यों पर चोट करने का आरोप लगाकर मोदी कांग्रेस को हर तरह से घेर रहे हैं. लेकिन, उनके हमले में गांधी-नेहरू परिवार ही सबसे पहले निशाने पर है. मोदी को पता है कि अब जबकि लोकसभा चुनाव से पहले माहौल चुनावी होने लगा है. सभी सियासी दल अपनी बिसात बिछाने लगे हैं.

इस वक्त कांग्रेस की तरफ से उनकी सरकार के पांच साल के कार्यकाल को घेरने की कोशिश होगी. दलित-उत्पीड़न और लोकतंत्र की हत्या के आरोप भी लगेंगे. लिहाजा पहले से ही मोदी ने आक्रामक अंदाज में कांग्रेस पर लोकतंत्र की हत्या करने का आरोप लगाना शुरू कर दिया है. आपातकाल की बरसी पर मोदी ने कांग्रेस पर हमले की शुरुआत की. बीजपी के नेता अब देश भर में इसी सिलसिले को आगे बढ़ा रहे हैं.

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