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जब कांग्रेस को राहुल से कोई दिक्कत नहीं तो बाकी पार्टियों को क्यों: उमर अब्दुल्ला

राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाने वालों पर निशाना साधते हुए अब्दुल्ला ने कर्नाटक में सरकार बनाने में सक्षम रही कांग्रेस की भूमिका का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने काफी परिपक्वता दिखाई है कि पार्टी का आधार कैसे बढ़ाना है

Updated On: Jul 29, 2018 03:31 PM IST

Bhasha

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जब कांग्रेस को राहुल से कोई दिक्कत नहीं तो बाकी पार्टियों को क्यों: उमर अब्दुल्ला

नेशनल कांफ्रेंस (एनसी) के नेता उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि केंद्र में बीजेपी को सत्ता से हटाने के लिए 2019 के लोकसभा चुनावों के प्रचार अभियान में कांग्रेस को विपक्षी एकता की ‘धुरी’ और इसके प्रमुख राहुल गांधी को इसका अगुवा बनना होगा.

न्यूज एजेंसी को दिए साक्षात्कार में अब्दुल्ला ने कहा, हालांकि अपने राज्यों में मजबूत क्षेत्रीय नेताओं की जिम्मेदारी इससे कम नहीं होती है.

उन्होंने कहा, 'कांग्रेस को विपक्षी एकता की धुरी बनना पड़ेगा क्योंकि कई ऐसे राज्य हैं जहां पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच सीधी टक्कर होगी. आखिरकार केंद्र में सरकार बनाने के लिए आपको 272 सीटों की जरूरत होगी जो क्षेत्रीय दलों को नहीं मिलने जा रही. यदि गैर-बीजेपी सरकार बनाने के लिए आप इस आंकड़े तक नहीं पहुंच पाते तो आप 100 सीटों के करीब होने के कारण कांग्रेस की तरफ देखेंगे.'

विपक्ष को कांग्रेस की तरफ झुकना ही पड़ेगा

अब्दुल्ला ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की और संभावित विपक्षी मोर्चा पर बातचीत की. विपक्षी मोर्चा बनाने के लिए प्रयास तेजी से किए जा रहे हैं लेकिन क्षेत्रीय दलों के नेताओं का एक वर्ग नहीं चाहता है कि कांग्रेस इसकी अगुवाई करे और वे एक गैर-बीजेपी और गैर-कांग्रेसी मोर्चा बनाने की बात कर रहे हैं.

राहुल गांधी को विपक्ष का चेहरा बनाए जाने के मुद्दे पर अब्दुल्ला ने कहा कि सबसे बड़े विपक्षी दल का अध्यक्ष होने के नाते वह उम्मीद कर रहे हैं कि वह चुनाव अभियान की अगुवाई करेंगे.

उन्होंने कहा, 'निश्चित रूप से, हर कोई उम्मीद करेगा की राहुल गांधी 2019 में चुनाव अभियान में अगुवाई करें लेकिन याद रखना होगा कि सोनिया गांधी यूपीए की नेता हैं. इसलिए कोई भी उम्मीद करेगा कि सोनिया गांधी भी अभियान का हिस्सा हों'.

राहुल गांधी की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाने वालों पर निशाना साधते हुए अब्दुल्ला ने कर्नाटक में सरकार बनाने में सक्षम रही कांग्रेस की भूमिका का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने काफी परिपक्वता दिखाई है कि पार्टी का आधार कैसे बढ़ाना है.

अब्दुल्ला ने कहा, 'वह कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष हैं. अगर किसी को उनके नेतृत्व के गुण पर संदेह होना चाहिए तो यह उनकी पार्टी को होना चाहिए. उनकी पार्टी को इससे कोई समस्या नहीं है, तब किसी और को आपत्ति क्यों हो रही है.'

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