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10 फीसदी कोटा पर बोलीं OBC पार्टियां- जाति की जनसंख्या के हिसाब से क्यों नहीं देते आरक्षण

मंडल की राजनीति से निकली लगभग सभी पार्टियों ने आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को आरक्षण दिए जाने का समर्थन किया लेकिन एक सवाल पूछा कि अगर जातिगत आधारित जनगणना में पिछड़ी जातियों की जनसंख्या ज्यादा निकली तो क्या सरकार उनके कोटे को बढ़ाएगी?

Updated On: Jan 09, 2019 10:21 AM IST

FP Staff

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10 फीसदी कोटा पर बोलीं OBC पार्टियां- जाति की जनसंख्या के हिसाब से क्यों नहीं देते आरक्षण

शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन लोकसभा में आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण देने का विधेयक पास हो गया. इसके पक्ष में 323 मत पड़े जबकि विपक्ष में मात्र 3. आर्थिक आधार पर आरक्षण देने के लिए सरकार ने संविधान (124वां संशोधन) विधेयक पेश किया. कई विपक्षी पार्टियों ने भी सरकार के इस कदम का समर्थन किया लेकिन सभी ने कोई न कोई सवाल जरूर उठाए.

विधेयक पर चर्चा के दौरान 'मंडल' और 'कमंडल' जैसे हालात भी देखने को मिले. जनता दल यूनाइटेड को छोड़कर सभी मंडल पार्टियों ने इसका विरोध किया. बीजेपी के साथ गठबंधन में शामिल अपना दल और पूर्व में एनडीए में रहे आरएलएसपी ने बिल का समर्थन तो किया लेकिन उन्होंने सरकार से सवाल किया कि क्या जाति आधारित जनगणना के आंकड़ों को सार्वजनिक किया जाएगा और जनसंख्या के हिसाब से ओबीसी का आरक्षण बढ़ाया जाएगा?

जनसंख्या के आधार पर मिले आरक्षण

अपना दल की अनुप्रिया पटेल ने कहा कि मेरी चिंता सिर्फ गरीब सवर्णों के लिए नहीं है बल्कि समाज के पिछड़े वर्ग को लेकर भी है. देश में ओबीसी की जनसंख्या 55-60 प्रतिशत है लेकिन उन्हें सिर्फ 27 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है. उन्होंने सवाल किया कि मैं जानना चाहती हूं कि सरकार उस समय क्या करेगी जब उसे पता चलेगा कि ओबीसी की जनसंख्या देश में वर्तमान के आकलन से ज्यादा है. उन्होंने पूछा कि ऐसी स्थिति में सरकार क्या आरक्षण के सीमा को बढ़ाएगी.

आरजेडी सांसद पप्पू यादव ने सामाजाकि अधिकारिता एवं न्याय मंत्री थावरचंद गहलोत से पूछा कि सरकार ने जातिगत आधार पर कराई गई जनगणना को सार्वजनिक क्यों नहीं किया? गहलोत ही विधेयक को संसद में पेश किए थे.

आरजेडी सांसद जयप्रकाश नारायण यादव ने कहा कि सरकार जातिगत जनगणना की रिपोर्ट सामने लाए और एससी, एसटी और ओबीसी को 85 फीसदी आरक्षण दिया जाए. उन्होंने कहा कि सवर्ण आरक्षण भी एक जुमला है. ठीक उसी तरह जिस तरह से सरकार ने दो करोड़ नौकरियों का वादा किया था. आरजेडी ने इस बिल के विरोध में वोट दिया.

जातिगत जनगणना को सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया

समाजवादी पार्टी सांसद धर्मेंद्र यादव ने विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि जातिगत जनगणना पर करोड़ों रुपए खर्च किया, लेकिन रिपोर्ट जारी नहीं की जा रही है. यह रिपोर्ट जारी की जाए और जिसकी जितनी आबादी है, उसे उतना आरक्षण दिया जाए.

एनडीए के पूर्व सहयोगी आरएलएसपी के नेता उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को आरक्षण देना समस्या का समाधान नहीं है. इससे आर्थिक खुशहाली नहीं आएगी. उन्होंने कहा कि अगर आरक्षण सफल होता तो देश का पिछड़ा वर्ग आजादी के 70 साल बाद भी पिछड़ा नहीं होता. उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि मेरे अनुसार, आरक्षण जनसंख्या के आधार पर देना चाहिए. अगर ऐसा होता है तो आरक्षण के मामले का हल हो जाएगा.

इसके अलावा सभी 'मंडल' पार्टियों ने आरक्षण को न्यायिक सेवा और प्राइवेट सेक्टर में भी लाने की मांग की.

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