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ओ पन्नीरसेल्वम हो सकते हैं जयललिता के उत्तराधिकारी

जयललिता की गैर-मौजूदगी में पन्नीरसेल्वम पहले भी दो बार मुख्यमंत्री रहे चुके हैं

Updated On: Dec 06, 2016 07:52 AM IST

Krishna Kant

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ओ पन्नीरसेल्वम हो सकते हैं जयललिता के उत्तराधिकारी

तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता की हालत गंभीर होने के बाद उनके समर्थकों में शोक का माहौल है. इसी बीच सूबे के सियासी गलियारे में उनके उत्तराधिकार को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं.

समाचार एजेंसी आईएएनएस के मुताबिबक, पार्टी के सभी विधायकों को अपोलो अस्पताल में बुलाया गया है. अटकलें हैं कि 'मुख्यमंत्री जयललिता के उत्तराधिकारी के चयन के लिए पार्टी विधायकों को एकजुट किया गया है. एक विधायक ने पहचान जाहिर न करने की शर्त पर कहा, अगली सूचना तक हम लोगों को इंतजार करने के लिए कहा गया है. सभी विधायक अपोलो अस्पताल परिसर में स्थित एक हॉल में एकत्रित हुए हैं.'

टीवी चैनल टाइम्स नाउ ने अपने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि ओ. पन्नीरसेल्वम को उनका उत्तराधिकारी घोषित किया जा सकता है. खबरों के मुताबिक, एआईएडीएमके के सभी विधायकों ने एक हलफनामे पर दस्तखत किए हैं जिसमें ओ पन्नीरसेल्वम पर भरोसा जताया गया है. राज्य के गवर्नर विद्यासागर राव अपोलो अस्पताल जा सकते हैं जहां उन्हें यह हलफनामा सौंप दिया जाएगा.

जयललिता के बेहद करीबी और विश्वासपात्र

पन्नीरसेल्वम की छवि जयललिता के बेहद करीबी और विश्वासपात्र के रूप में है. जयललिता जब जेल गई थीं तो पन्नीरसेल्वम को सार्वजनिक मंच से रोते हुए देखा गया था. जयललिता जबसे बीमार हैं, तबसे उनकी गैर-मौजूदगी में पन्नीरसेल्वम ही कामकाज संभाल रहे हैं. वे कैबिनेट मीटिंग की अध्यक्षता भी कर रहे हैं. पन्नीरसेल्वम इससे पहले भी दो बार मुख्यमंत्री का पदभार संभाल चुके हैं.

जयललिता 2001 में भ्रष्टाचार के मामले में जब पहली बार जेल गईं तो मुख्यमंत्री पद संभालने के लिए अचानक जिस नाम की घोषणा हुई थी, वह नाम था ओ पन्नीरसेल्वम. लोग आश्चर्य में पड़ गए थे. इसके बाद 2014 में सौ करोड़ के भ्रष्टाचार के मामले में जयललिता को फिर से जेल जाना पड़ा, तब भी पन्नीरसेल्वम ने ही कुर्सी संभाली. (यहां पढ़ें)

दोनों बार ऐसा हुआ कि पन्नीरसेल्वम ने सत्ता तो संभाली लेकिन असली मुख्यमंत्री जयललिता ही रहीं. दोनों बार परिस्थितियां एक जैसी रहीं. 'द हिंदू' अखबार के मुताबिक, उन्हें इसलिए चुना गया क्योंकि वे ममता के सबसे 'वफादार' रहे हैं.

पन्नीरसेल्वम पर जयललिता को इतना भरोसा रहा है कि उनकी गैरमौजूदगी में पन्नीरसेल्वम उनकी खड़ाउं सिंहासन पर रखकर राज चलाते रहे और उनकी वापसी पर सुरक्षित सत्ता उन्हें सौंप दी. पन्नीरसेल्वम पर कठपुतली सरकार चलाने के आरोप लगते रहे हैं.

अन्य नामों पर भी चर्चा 

हालांकि, अभी तक इस बात की सिर्फ अटकलें लगाई जा रही हैं कि 65 साल के पन्नीरसेल्वम तमिलनाडु के अगले मुख्यमंत्री बन सकते हैं. उनके अलावा अन्य कई नामों की भी चर्चा है. जयललिता के उत्तराधिकारी के रूप में एम. थम्बीदुरई, पानरुति रामचंद्रन, इडापड्डी पलानीस्वामी और अजित कुमार के भी नाम की चर्चा है.

एम. थम्बीदुरई लोकसभा में फिलहाल उपाध्यक्ष हैं. वे काफी योग्य माने जाते हैं. उन्हें राजनीति का लंबा अनुभव है. वे जयललिता की हर चुनावी रैली में उनकी अहम भूमिका होती है.

पानरुति रामचंद्रन भी जयललिता के काफी करीबी रहे हैं. कहा जाता है कि जयललिता उनपर बेहद भरोसा करती हैं. जयललिता के अपोलो अस्पताल में आने के बाद उन्हें ही वहां सबसे ज्यादा देखा गया. हालांकि, उन्होंने 2013 में सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया था.

इडापड्डी पलानीस्वामी पेशे से इंजीनियर हैं और जयललिता मंत्रिमंडल के ताकतवर मंत्रियों में से एक हैं. वे सियासी तौर पर काफी मजबूत भूमिका वाले गौंडार समुदाय से आते हैं.

इसके अलावा अजित कुमार, पन्नीरसेल्वम के बाद इन अटकलों में सबसे आगे चल रहे हैं. अजित कुमार भी फिल्मों से आते हैं. हालांकि, उन्हें सियासत का कोई खास अनुभव नहीं है, लेकिन कुछ लोगों का दावा है कि जयललिता ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी चुन लिया है. यह बात जयललिता की वसीयत में लिखी है.

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