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एबीवीपी को मात देने के लिए जयपुर में एनएसयूआई कार्यकर्ताओं का 'इंकलाब'

ये कवायद केवल 2019 चुनावों के लिए ही नहीं बल्कि आनेवाले राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों के लिए भी की जा रही है.

Debobrat Ghose Debobrat Ghose Updated On: Apr 09, 2018 03:25 PM IST

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एबीवीपी को मात देने के लिए जयपुर में एनएसयूआई कार्यकर्ताओं का 'इंकलाब'

कांग्रेस का छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी की कामनाओं की पूर्ति करना चाहता है. हाल ही में पार्टी के दिल्ली के कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कांग्रेस को फिर से शीर्ष पर पहुंचाने में युवाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया था. राहुल गांधी की बातों को ध्यान में रखते हुए एनएसयूआई अब अपना पूरा जोर 2019 के लोकसभा चुनावों पर लगा रहा है.

सोमवार से जयपुर में शुरू हो रहे एनएसयूआई के वार्षिक कार्यक्रम में 10 हजार से ज्यादा छात्रों और युवाओं के जुटने की उम्मीद है. इस कार्यक्रम में पार्टी के सांसद और विधायकों के अलावा पार्टी के सभी विंग के प्रमुख भी हिस्सा लेंगे. 9 और 10 अप्रैल यानि दो दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम का नाम इंकलाब रखा गया है.

मजेदार बात ये है कि दो दिन पहले ही भारतीय जनता पार्टी की युवा इकाई भारतीय जनता युवा मोर्चा का दो दिवसिय सम्मेलन जयपुर में ही संपन्न हुआ है. दोनों दलों के युवा सम्मेलनों के आयोजन से ये साफ है कि दोनों दलों की नजरें युवा वोटों पर टिकी हुई हैं, और खास करके कांग्रेस युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करके बीजेपी के युवा वोट बैंक में सेंध लगाना चाह रही है एनएसयूआई के नेता इस सम्मेलन को लेकर खासे उत्साहित हैं. एनएसयूआई ने राष्ट्रीय अध्यक्ष फिरोज खान के मुताबिक एनएसयूआई राहुल गांधी के पदचिन्हों पर चलने में विश्वास रखती है और चाहती है कि वो छात्रों और युवाओं के हितों की रक्षा नैतिकता और सत्यता के आधार पर कर सके.

फिरोज के मुताबिक इन दो दिनों के सम्मेलन में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के द्वारा लिए गए फैसलों और संदेशों को पूरे देश के एनएसयूआई के कैडरों के बीच पहुंचाया जाएगा. फिरोज का कहना है कि ये सम्मेलन 2019 के चुनावों से पहले उनके कार्यकर्ताओं के लिए एक तरह से प्रशिक्षण शिविर की तरह से होगा जिसके बाद वो पूरे देश में घूम कर युवा वोटरों को अपनी पार्टी की नीतियों से अवगत करा सकेंगे.

फिरोज फ़र्स्टपोस्ट से बातचीत में बीजेपी सरकार पर आरोप लगाते हुए कहते हैं कि ये सरकार विरोध के स्वर को दबा देती है और खास करके युवाओं को अपनी बात रखने के हक से मरहूम रखती है. फिरोज कहते हैं कि वो इस सरकार के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे और लोगों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए किसी भी हद तक चले जाएंगे. फिरोज दावा करते हैं कि जिस तरह से सांप्रदायिक शक्तियों के द्वारा कॉलेज के कैंपसों में धर्म जाति और लिंग के आधार पर भेद किया जाता है उसे वो किसी भी हाल में समाप्त करेंगे.

इस सम्मेलन का माध्यम से कांग्रेस उन युवा वोटरों से भी जुड़ना चाह रही है जो कि इस बार के चुनावों में पहली बार वोट डालेंगे. इस सम्मेलन के दौरान एनएसयूआई के कैडरों को जमीनी स्तर पर वोटरों से मिलकर उन्हें पार्टी की नीतियों से अवगत कराने का प्रशिक्षण दिया जाएगा. पार्टी को उम्मीद है कि इस तरह से वो आम वोटरों से खुद को कनेक्ट कर सकती है खास करके युवा वोटरों से.

एनएसयूआई के सूचना प्रमुख नीरज मिश्रा के मुताबिक ‘इंकलाब’ अपने तरह का यह पहला सम्मेलन है जिसमें एनएसयूआई के पूरे देश से चुने हुए प्रतिनिधियों के अलावा इसके राष्ट्रीय स्तर के नेता इसमें शामिल हो रहे हैं. नीरज के मुताबिक ये राहुल गांधी की योजना है और इसका मकसद संगठन के अंदर आमूल चूल बदलाव लाना है. नीरज के अनुसार इस सम्मेलन में एनएसयूआई के वो नेता भी शामिल होंगे जो बाद में सांसद और विधायक बन गए.

दो दिनों के इस सम्मेलन का मुख्य एजेंडा में लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने की उम्र सीमा को कम करने मांग रहेगी जिससे ज्यादा से ज्यादा युवा चुनाव लड़ सकें. इसके अलावा राष्ट्रीय महिला आयोग और एससी/एसटी आयोग की तरह से छात्रों के लिए अलग से नेशनल स्टूडेंट्स कमीशन के गठन की भी मांग इस सम्मेलन में रखी जाएगी.

नीरज मिश्रा के मुताबिक इस सरकार के शासन के दौरान छात्रों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. उदाहरण के तौर पर हैदराबाद यूनिवर्सिटी में दलित छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या के बाद पूरे देश में दलित आंदोलन का उभार, पूरे देश के विश्विद्यालयों में बढ़ती फीस, और हैदराबाद विश्विद्यालय के एनएसयूआई के अध्यक्ष को परीक्षा देने से रोक देना समेत कुछ ऐसे मसले हैं जिसको लेकर छात्रों में आक्रोश है.

लेकिन चिंता की बात ये है कि छात्रों की समस्याओं को सुन कर उनकी समस्याओं का निराकरण करने वाला कोई नहीं है ऐसे में वो लोग एक स्टूडेंट्स कमीशन की मांग रखेंगे. नीरज के मुताबिक सम्मेलन की समाप्ति से पहले कुछ और मांगों से संबंधित बातों को बारे में निर्णय लिया जाएगा.

अभी हाल ही में राहुल गांधी में पार्टी की बैठक में कहा था कि 2019 के चुनावों में जीत के लिए पार्टी को दलित युवाओं और महिलाओं पर ध्यान केंद्रित करना पड़ेगा. कांग्रेस के हौंसले कुछ उपचुनावों में जीत के बाद बुलंद जरूर हैं लेकिन पार्टी को पता है कि आगामी लोकसभा चुनावों में जीत के लिए अभी काफी कुछ किया जाना बाकी है. अभी हाल ही में सपन्न हुए नॉर्थ ईस्ट राज्यों के विधानसभा चुनावों के दौरान पार्टी ने बुरा प्रदर्शन किया था.

सबसे ज्यादा मेहनत एनएयसूआई को करने की जरूरत है. अगर संगठन आरएसएस से जुड़े अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में टक्कर देना चाहता है तो उसे अपने आप को दोबारा फिर से खड़ा करना होगा. राष्ट्रीय स्वयंसेवक  संघ की पहचान जमीन से जुड़ कर काम करने वाले संगठन के रूप में होती है. ऐसे में चुनावों के दौरान एबीवीपी जमीन से जुड़कर बीजेपी को मदद पहुंचाने का काम करती है. एनएसयूआई ऐसा करने की चाहत रखता है तो उसे काफी मेहनत करने की जरूरत पड़ेगी.

उम्मीद की जा रही है कि कांग्रेस अध्यक्ष की सलाह पर एनएसयूआई जयपुर के सम्मेलन में युवाओं और छात्रों को एकजुट करने करने के लिए एक नई रणनीति तैयार करेगी. नीरज मिश्रा इसकी ओर इशारा करते हुए कहते भी हैं कि ये कवायद केवल 2019 चुनावों के लिए ही नहीं बल्कि आनेवाले राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों के लिए भी की जा रही है.

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