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क्या केजरीवाल समझने लगे हैं कि फैसले लेने से ही सरकार की विश्वसनीयता बचेगी?

मंगलवार को दिल्ली कैबिनेट की मीटिंग में कई अहम फैसले लिए गए और मीटिंग में विधायक निधि फंड को 4 करोड़ से बढ़ा कर 10 करोड़ रुपए कर दिया गया है

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Aug 07, 2018 10:25 PM IST

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क्या केजरीवाल समझने लगे हैं कि फैसले लेने से ही सरकार की विश्वसनीयता बचेगी?

दिल्ली सरकार की कैबिनेट मीटिंग में विधायक निधि (लोकल एरिया डेवलपमेंट) फंड को 4 करोड़ से बढ़ा कर 10 करोड़ रुपए कर दिया गया है. दिल्ली सरकार ने इसके पीछे तर्क दिया है कि दिल्ली के अधिकांश आवासीय कॉलनियों में नागरिकों के लिए बुनियादी ढांचे की बहुत ही खराब स्थिति है. इसी को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है. इस फंड के जरिए विधायक अपने क्षेत्रों में विकास के और काम कर सकेंगे.

दिल्ली में विधायक निधि फंड पहले चार करोड़ थी. दिल्ली सरकार एमएलएएलएडी फंड बढ़ाने के पीछे मूल तर्क सार्वजनिक हित को ध्यान में रखने का दे रही है.

हाल के दिनों में किसी भी राज्य सरकार द्वारा यह सबसे बड़ी बढ़ोतरी है. दिल्ली कैबिनेट के इस फैसले की जानकारी उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने मंगलवार को विधानसभा में दी. सिसोदिया ने इसके साथ ही कई कैबिनेट के कई और महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी भी विधानसभा में दी.

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि विधायकों की तरफ से लगातार विधायक निधि फंड बढ़ाने की मांग की जा रही थी. विधायकों के मांग पर सरकार ने क्षेत्र के विकास को ध्यान में रखते हुए यह फंड बढ़ाने का फैसला किया है.

पहले भी विधायक फंड में बढ़ोतरी कर चुकी है केजरीवाल सरकार

गौरतलब है कि दिल्ली में विधायक निधि फंड बढ़ाने को लेकर केजरीवाल सरकार पिछले दो सालों से प्रयास कर रही थी. नजीब जंग के एलजी रहते हुए भी इस मुद्दे को लेकर दिल्ली सरकार और एलजी के बीच तकरार देखने को मिली थी. नजीब जंग ने विधायक निधि वाली फाइल दिल्ली सरकार को लौटा दी थी. लेकिन, पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट में अधिकारों की लड़ाई जीतने के बाद एलजी अनिल बैजल को इस फैसले पर मुहर लगाने के अलावा कोई और दूसरा विकल्प नहीं है.

आम आदमी पार्टी की सरकार ने ही पिछले एमएलएएलएडी फंड में भी बढ़ोतरी की थी. दिल्ली सरकार ने साल 2011-12 में भी यह राशि 4 करोड़ निर्धारित की थी. उससे पहले यह राशि 2 करोड़ हुआ करती थी. मंगलवार को कैबिनेट के इस फैसले के बाद बजट व्यय चालू वित्त वर्ष में 27 हजार करोड़ रुपए से बढ़ कर 50 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा.

मंगलवार को दिल्ली कैबिनेट की मीटिंग में और भी कई अहम फैसले लिए गए. विधायक निधि फंड के अलावा दिल्ली सरकार ने राजधानी में 15 भाषाओं की अकादमी खोलने का भी निर्णय लिया है. माना जा रहा है कि दिल्ली देश का ऐसा पहला केंद्र शासित प्रदेश बनेगा जहां 15 भाषाओं की अकादमी खोली जाएगी. दिल्ली में तेलुगू, कश्मीरी, गुजराती और मलयालम समेत कई भाषाओं की अकादमी खोलने की योजना है.

New Delhi: Delhi Dy Chief Minister Manish Sisodia addresses a press conference after the cabinet meeting at Delhi Secretariat, in New Delhi on Wednesday, July 4, 2018.Delhi Transport Minister Kailash Gahlot is also seen. (PTI Photo/Manvender Vashist) (PTI7_4_2018_000162B)

इसी साल लागू किए जाएंगे सारे फैसले

दिल्ली के स्वास्थ्य और शहरी विकास मंत्री सत्येंद्र जैन के मुताबिक मंगलवार को कैबिनेट में लिए गए सभी फैसले इसी साल लागू किए जाएंगे. दिल्ली में इलाज करा रहे एड्स रोगियों को भी दिल्ली कैबिनेट ने बड़ी राहत दी है. एड्स पीड़ितों को प्रति माह मिलने वाली सहायता राशि 1050 रुपए से बढ़ा कर अब 2100 रुपए कर दिया गया है. एड्स पीड़ित अनाथ बच्चों की यह राशि अब बढ़कर 4100 रुपए हो जाएगी.

इसी तरह विशेष आवश्यकताओं वाले व्यक्तियों को वित्तीय सहायता के लिए कोई आयु प्रतिबंध नहीं होगा. विशेष लाभ या पेंशन तब तक जारी रहेगा जिन शर्तों के तहत उन्हें यह सहायता प्रदान की गई थी. लेकिन, लाभार्थी एक से अधिक योजनाओं के तहत पेंशन के पात्र नहीं हो सकते हैं.

कुल मिलाकर दिल्ली सरकार का यह कदम जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है, लेकिन विपक्ष इसे साल 2019 लोकसभा चुनाव को लेकर अरविंद केजरीवाल की चाल करार दे रहे हैं. बेशक विपक्ष इस फैसले पर खुलकर बोलना नहीं चाहती है, लेकिन अरविंद केजरीवाल के द्वारा हाल में लिए गए कुछ फैसले दूरगामी परिणाम देने वाले साबित हो सकते हैं. मंगलवार को कैबिनेट में लिए गए फैसले भी उनमें से एक हैं.

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