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अखिलेश बने सबसे बड़े लड़ैया, शिवपाल और अमर का क्या होगा?

सिंबल मिलने के बाद अखिलेश यादव ने साफ किया कि वो नेता जी के नाम पर ही विधानसभा चुनाव लड़ेंगे

Updated On: Jan 16, 2017 10:35 PM IST

Amitesh Amitesh
विशेष संवाददाता, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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अखिलेश बने सबसे बड़े लड़ैया, शिवपाल और अमर का क्या होगा?

चुनाव आयोग ने सोमवार को वो फैसला सुना ही दिया जिसका सबको बेसब्री से इंतजार था. बाप-बेटे की लड़ाई में जीत बेटे की हुई और समाजवादी पार्टी को खड़ा करने वाले मुलायम सिंह यादव अपने युवा बेटे से हार गए.

दो दशक पहले नेता जी मुलायम सिंह यादव ने जिस साइकिल पर सवाल होकर पूरे उत्तर प्रदेश में समाजवाद के झंडे को बुलंद किया था उसी साइकिल से उन्हें उम्र के इस पड़ाव में पैदल होना पड़ा.

कहा तो यही जाता है कि यूपी में समाजवाद तो परिवारवाद में तब्दील हो गया था. यही परिवारवाद नेताजी के कुनबे में कलह का कारण बना. धरती पुत्र कहे जाने वाले मुलायम सिंह यादव की बढ़ती उम्र और उनके बाद समाजवादी पार्टी में वर्चस्व को लेकर चली जंग का आखिरकार अंत हो गया. नेताजी के बेटे और वर्तमान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पूरी पार्टी पर अपना सिक्का जमा लिया है. समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अब अखिलेश यादव ही रहेंगे और मुलायम सिंह यादव महज मार्गदर्शन का काम करेंगे.

चुनाव आयोग का फैसला आने के बाद चुनाव चिन्ह को लेकर जारी जंग खत्म हो गई है. साइकिल चुनाव चिन्ह के साथ अखिलेश यादव चुनाव मैदान में होंगे.

अखिलेश यादव ने पिता मुलायम सिंह यादव को इस सियासी जंग में पटखनी देने के बाद उनसे मुलाकात की और साफ कर दिया कि वो नेता जी के नाम पर ही चुनाव लड़ेंगे.

अखिलेश यादव के रूख से साफ है कि किसी भी सूरत में वो इस फैसले को बैकफायर नहीं होने देना चाहते.

अखिलेश को लगता है कि नेताजी के नाम पर अगर वो वोट मांगते हैं तो इसमें शिवपाल यादव गुट को हमले का मौका नहीं मिल पाएगा.

Akhilesh Mulayam

अखिलेश यादव खेमे के रणनीतिकार चाचा रामगोपाल यादव ने चुनाव आयोग के फैसले पर खुशी जताते हुए कांग्रेस के साथ गठबंधन की संभावना जताई.

अखिलेश का अगला कदम क्या होगा

पार्टी पर कब्जे की लड़ाई में अखिलेश ने सबको मात दे दी. लेकिन, अखिलेश के लिए अब यह समय जश्न मनाने भर का नहीं है. इस वक्त समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री के तौर पर अखिलेश यादव के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने-आप को यूपी में एक बड़े सर्वमान्य नेता के तौर पर पेश करने की होगी.

पिछले दिनों के कुनबे की कलह के बाद अखिलेश यादव ने अपने-आप को बड़े नेता के तौर पर उभारा भी है. लेकिन, अब अखिलेश को जनता के दरबार में अपने पांच साल के कामकाज का हिसाब देना है.

अखिलेश यादव अब अपने तरीके से टिकटों का बंटवारा करेंगे. अपने तरीके से अपने किए कामों का प्रचार करेंगे. चुनाव प्रचार की पूरी कमान उनके हाथों में होगी और अपने मन मुताबिक रणनीति बनाएंगे.

अब न किसी का दवाब होगा और न ही किसी तरह से कोई अड़ंगा लगा सकेगा. ऐसे में चुनाव में जीत का श्रेय या हार का ठीकरा अखिलेश को ही मिलेगा.

समाजदवादी पार्टी के साथ कांग्रेस और आरएलडी के गठबंधन की संभावना यूपी में बनने लगी है. संकेत दोनों तरफ से मिल रहे हैं. कांग्रेस कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए पिछले हफ्ते राहुल गांधी ने भी कहा था ‘इंतजार कीजिए यूपी में मजा आने वाला है’.

फोटो: पीटीआई

फोटो: पीटीआई

अखिलेश यादव और राहुल गांधी की केमेस्ट्री यूपी में क्या मजा लाती है इसका सबको इंतजार रहेगा. दूसरी तरफ, अखिलेश की पत्नी डिंपल यादव और प्रियंका गांधी की केमेस्ट्री भी यूपी में देखने को मिल सकती है.

मुलायम-शिवपाल-अमर का क्या होगा

बेटे से हारने के बाद मुलायम सिंह यादव गुट के सामने अब सीमित विकल्प है. मुलायम सिंह यादव समाजवादी पार्टी में मार्गदर्शक की भूमिका में रहेंगे. लेकिन, मुलायम सिंह यादव अपने भाई शिवपाल यादव और अमर सिंह के साथ रणनीति बनाकर आगे इस फैसले को अदालत में चुनौती भी दे सकते हैं.

दूसरा विकल्प है कि मुलायम सिंह यादव अपने समर्थकों के साथ एक अलग पार्टी बनाकर अलग चुनाव चिन्ह के साथ अखिलेश को चुनौती दें.

तीसरा विकल्प है कि मुलायम सिंह का गुट समाजवादी पार्टी मे अखिलेश यादव के नेतृत्व को स्वीकार करते हुए सरेंडर कर दे. लेकिन, इस बात की संभावना बेहद कम है कि अब शिवपाल यादव और अमर सिंह को अखिलेश यादव अपने साथ ला सकेंगे.

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समाजवादी कुनबे का समीकरण कैसा होगा

दरअसल, मुलायम सिंह यादव के कुनबे में हर व्यक्ति सत्ता के साथ जुड़ा रहा है. सांसद, विधायक से लेकर हर तरह के पद पर नाते-रिश्तेदारों का कब्जा रहा है. लेकिन, अब घर के भीतर भी समीकरण बदलेंगे और पार्टी के अंदर भी.

फिलहाल, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ उनकी सांसद पत्नी डिंपल यादव के अलावा चाचा रामगोपाल यादव हैं. रामगोपाल यादव के बेटे सांसद अक्षय यादव, मुलायम सिंह के भाई के पोते तेजप्रताप यादव (लालू यादव के दामाद) और अखिलेश यादव के चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव भी अखिलेश यादव के साथ खड़े हैं.

जबकि, दूसरी तरफ, शिवपाल यादव और उनके बेटे के अलावा मुलायम सिंह के छोटे बेटे प्रतीक यादव और उनकी पत्नी अपर्णा यादव ही बचे हैं.

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मुलायम सिंह अब तक शिवपाल यादव के गुट के ही साथ खड़े थे. लेकिन, अब उनके उपर सबकी नजरें होंगी. क्या वो बेटे अखिलेश यादव को मार्गदर्शन देंगे या फिर भाई शिवपाल यादव के साथ मिलकर एक बार फिर से नई लड़ाई के लिए कमर कसेंगे.

फिलहाल, पूरी लड़ाई में अखिलेश सबसे बड़े लड़ैया और मुलायम मजबूर बाप के रूप में उभरकर सामने आए हैं. जबकि, शिवपाल पूरी तरह से हाशिए पर चले गए हैं.

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