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नोटबंदी: लंबी अवधि में इकोनॉमी को फायदा होने का चांस ज्यादा 

पीएम की मुहीम से समस्या हो रही है लेकिन इसका फायदा लंबी अवधि में मिलेगा.

Updated On: Nov 18, 2016 05:29 PM IST

Pratima Sharma Pratima Sharma
सीनियर न्यूज एडिटर, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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नोटबंदी: लंबी अवधि में इकोनॉमी को फायदा होने का चांस ज्यादा 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बोल्ड स्टेप लेते हुए 500 और 1000 रुपए के नोट बंद कर दिए. इसमें कोई शक नहीं है कि यह कदम घरेलू मार्केट में तैर रही आवारा पूंजी को किनारे लगाने के लिए काफी है. इस मुहीम में आम लोगों को शुरुआत में समस्या हो रही है लेकिन इसका फायदा लंबी अवधि में मिलेगा.

नई दुनिया के एग्जिक्यूटिव एडिटर सुरेश बाफना ने फर्स्ट पोस्ट हिंदी से खास बातचीत में कहा, 'निश्चित तौर पर घरों की तिजोरियों में काला धन छुपाने वालों के बुरे दिन आ गए हैं. लेकिन लॉन्ग टर्म में देश की अर्थव्यवस्था के लिए यही अच्छी खबर है.'

यह पूरी तरफ साफ है कि घरों में छिपाए 500 और 1000 रुपए के नोट अब रद्दी के ढेर से ज्यादा कुछ नहीं हैं. लेकिन इन सब के बीच एक बात जिसके बारे में सब जानना चाहते हैं, वह यह है कि भारत की अर्थव्यवस्था खासतौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर इसका क्या असर होगा?

प्रधानमंत्री की जन-धन-योजना के बावजूद ग्रामीण इलाकों का एक बहुत बड़ा तबका बैंकिंग दायरे में नहीं आ पाया है. जो किसान बिचौलिए को अपना अनाज बेचकर अपनी कमाई घर में रखते थे, उन्हें कुछ समय के लिए दिक्कत जरूर होगी.

इस मामले में बाफना का कहना है,

'अर्थव्यवस्था और खासतौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए यह बहुत बड़ा झटका है. लेकिन यह जरूरी है क्योंकि आगे चलकर इसका फायदा किसानों को ही मिलेगा.'

उन्होंने कहा कि मनरेगा जन-धन योजना की वजह से बड़ी तादाद में किसान इस दायरे में आए हैं. इस स्कीम से उन किसानों और छोटे कारोबारियों को एक झटका जरूर लगेगा जो अभी तक सिर्फ कैश में कारोबार करते थे. अपने इन लोगों को मजबूरन बैंकिंग सिस्टम से जुड़ना होगा.

गांवों के दूर-दराज इलाकों में रहने वाले लोगों को अब बैंकिंग सिस्टम को न सिर्फ समझना होगा बल्कि उसमें शामिल भी होना होगा. सरकार लंबे समय से देश के सभी तबकों को बैंकिंग सिस्टम में शामिल करने का प्रयास कर रही थी. अब इस कदम से देश को काफी फायदा होगा.

भारतीय अर्थव्यवस्था के समानांतर ब्लैकमनी इकनॉमी चल रही है, जो अगले छह महीने के लिए धराशायी हो जाएगी. ऐसा हरगिज नहीं है कि ब्लैक मनी का खेल हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा. लेकिन दोबारा ब्लैक मनी की अर्थव्यवस्था विकसित होने से पहले सरकार ऐसा कोई मैकेनिज्म तैयार कर सकती है ताकि यह काले धन की अर्थव्यवस्था खड़ी न हो.

सरकार ने पहले जन-धन योजना फिर ई—मंडी बनाने का ऐलान किया, ताकि अर्थव्यवस्था कैशलेस हो सके. सरकार की नई पुरानी घोषणाओं से जाहिर है कि वे कम से कम घरेलू अर्थव्यवस्था से काले धन का खेल हमेशा के लिए खत्म करना चाहते हैं.

बंधन बैंक जैसे ग्रामीण बैंक इसमें अहम भूमिका निभा सकते हैं. पश्चिम बंगाल में बंधन बैंक ने बेहतरीन ढंग से किसानों को बैंकिंग दायरे में लाने का काम किया है. अब यही काम देश भर में होगा.

कुल मिलाकर देखें तो फिलहाल काले धन पर बैठे लोगों के पास अपना पैसा 30 पर्सेंट टैक्स चुकाकर जाहिर करने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है. हालांकि, नियमित तौर पर टैक्स चुकाने वालों को खुशी जरूर हो रही है. वैसे कुछ दिनों की दिक्कत उन्हें भी उठानी होगी, लेकिन लॉन्ग टर्म में इसका फायदा आम आदमी और अर्थव्यवस्था को जरूर होगा.

 

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