S M L

गुजरात राज्यसभा चुनाव में नोटा के इस्तेमाल से कांग्रेस परेशान

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ना ही चुनाव रद्द किया जाएगा और ना ही बैलेट पेपर से नोटा का ऑप्शन हटाया जाएगा.

Amitesh Amitesh Updated On: Aug 03, 2017 04:24 PM IST

0
गुजरात राज्यसभा चुनाव में नोटा के इस्तेमाल से कांग्रेस परेशान

राज्यसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस काफी परेशान है. उसकी परेशानी गुजरात में अपने विधायकों के संभाले रखने को लेकर भी है तो दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट से भी उसे तगड़ा झटका मिला है. सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस की उस अर्जी को खारिज कर दिया है, जिसमें राज्यसभा चुनाव में नोटा का विकल्प खत्म करने की मांग की गई थी.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ना ही चुनाव रद्द किया जाएगा और ना ही बैलेट पेपर से नोटा का ऑप्शन हटाया जाएगा. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की नोटा का विकल्प देने संबंधी अधिसूचना की समीक्षा करने पर सहमति दी है.

राज्यसभा चुनाव के दौरान बैलेट पेपर में नोटा होने और ना होने को लेकर गुजरात में कांग्रेस और बीजेपी के बीच विवाद था. बीजेपी मंगलवार तक नोटा का समर्थन कर रही थी लेकिन बुधवार को अचानक वह बैकफुट पर आ गई. बीजेपी ने बुधवार को चुनाव आयोग से नोटा हटाने की अपील की थी.

बीजेपी ने चुनाव आयोग को ज्ञापन देते हुए तर्क दिया था कि राज्यसभा चुनाव में कोई गुप्त मतदान नहीं होगा. पार्टी के व्हिप को देखते हुए विधायक पार्टी द्वारा नियुक्त किए गए एजेंट को दिखाएंगे कि उन्होंने किसे वोट दिया है. ऐसे में नोटा की आवश्यकता नहीं होगी.

लेकिन, सुप्रीम कोर्ट ने इन सभी बातों को सिरे से खारिज कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश से साफ है कि आठ अगस्त को होनेवाले राज्यसभा चुनाव में अब नोटा का इस्तेमाल होगा.

कांग्रेस की बढ़ गई मुश्किल

ahmad patel

बीजेपी से ज्यादा कांग्रेस बेचैन है. उसकी परेशानी का कारण भी है. गुजरात में शंकर सिंह वाघेला के पार्टी छोड़ने के बाद से ही गुजरात कांग्रेस के विधायकों के इस्तीफे का जो सिलसिला शुरू हुआ था, उससे कांग्रेस नेता अहमद पटेल की मुश्किलें बढ़ गईं हैं.

कांग्रेस को इस बात का डर सता रहा है कि धीरे-धीरे और भी कई विधायक राज्यसभा चुनाव से पहले पाला बदल सकते हैं. इसके बाद डरी कांग्रेस के 42 विधायक आनन-फानन में कांग्रेस शासित राज्य कर्नाटक ले जाए गए.

बेंगलुरु के एक रिसॉर्ट में कांग्रेस के इन सभी 42 विधायकों को रखा गया है. आठ अगस्त को होने वाले राज्यसभा चुनाव के वक्त ही इन विधायकों को गुजरात वापस लाया जाएगा.

इस बार गुजरात में तीन सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव हो रहा है. जिनमें दो सीटों पर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का चुनाव जीतना तय है. मुख्य लड़ाई तीसरी सीट को लेकर है.

इस तीसरी सीट के लिए कांग्रेस के मौजूदा राज्यसभा सांसद और कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी के राजनैतिक सचिव अहमद पटेल फिर से दावेदार हैं. राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए अहमद पटेल को 44 विधायकों की जरूरत है. लेकिन, मौजूदा हालात में उनके लिए 44 विधायक भी जुटा पाना मुश्किल हो रहा है.

दरअसल, 57 विधायकों वाली कांग्रेस से 6 विधायकों के इस्तीफे के बाद अब महज 51 विधायक बच गए हैं. लेकिन, कांग्रेस ने जब अपने सभी विधायकों को खरीद-फरोख्त से बचाने के नाम पर गुजरात से बाहर बेंगलुरु के एक रिसॉर्ट में ले जाने की कोशिश की तो 42 विधायक ही पहुंचे. मतलब, 51 में से 9 विधायक नहीं पहुंचे.

हालांकि, इन 9 विधायकों में शंकर सिंह वाघेला और उनके बेटे भी शामिल हैं. लेकिन, इन 9 विधायकों को अगर शंकर सिंह वाघेला अपने साथ जोड़े रख पाए या फिर इनका इस्तीफा भी करवा दिया तो फिर कांग्रेस उम्मीदवार अहमद पटेल के लिए परेशानी खड़ी हो जाएगी. कांग्रेस को इसी बात का डर सता रहा है.

shankar singh vaghela

बीजेपी सूत्रों के मुताबिक, शंकर सिंह वाघेला के संपर्क में कांग्रेस के अभी भी 16 विधायक हैं. अगर शंकर सिंह वाघेला की तरफ से कांग्रेस के इन 16 विधायकों का इस्तीफा हो जाता है तो फिर कांग्रेस के विधायकों की संख्या घटकर 35 रह जाएगी और इस सूरत में राज्यसभा की तीनों सीटें बीजेपी की झोली में चली जाएंगी.

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले ही कांग्रेस पर मनोवैज्ञानिक बढ़त बनाने की तैयारी पहले से ही कर ली थी. उसी के तहत शंकर सिंह वाघेला के समधि बलवंत सिंह राजपूत को बीजेपी की तरफ से राज्यसभा का उम्मीदवार बना दिया था. अमित शाह के इसी चक्रव्यूह में कांग्रेस के चाणक्य माने जाने वाले अहमद पटेल फिलहाल फंसते नजर आ रहे हैं.

बीजेपी पर खरीद-फरोख्त का आरोप

बीजेपी पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाकर कांग्रेस ने अपने शासन वाले राज्य कर्नाटक की राजधानी में उन्हें ले जाकर रखा लेकिन, वहां भी इनकम टैक्स की तरफ से की गई कारवाई ने माहौल और गरमा दिया.

कर्नाटक के उर्जा मंत्री डी के शिवकुमार के घर और बेंगलुरु के रिसॉर्ट तक इनकम टैक्स की टीम पहुंच गई जहां कांग्रेसी विधायकों को रखा गया है. इंकम टैक्स की कारवाई पर संसद में भी हंगामा हुआ. कांग्रेस ने सरकार पर जांच एजेंसी का दुरुपयोग का मुद्दा उठाया.

dk shivkumar from twitter

कांग्रेस के आरोपों पर सरकार की तरफ से सफाई भी आई. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सरकार की तरफ से इस बात पर अपनी सफाई भी दी. जेटली ने कहा कि रिसॉर्ट में कोई छापा नहीं पड़ा. केवल मंत्री का बयान लेने वहां इनकम टैक्स की टीम गई थी.

सरकार आर्थिक अपराध को भ्रष्टाचार से अलग कर देखने की दलील दे रही है. लेकिन, गुजरात में राज्यसभा चुनाव से पहले हुई इस कारवाई ने सियासी फिजा को और गरमा दिया है.

अब नोटा के साथ वोट की तैयारी हो रही है. लेकिन, इस तैयारी के बीच कांग्रेस के भीतर की हार का वह डर रह-रह कर छलककर सामने दिख रहा है.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
SACRED GAMES: Anurag Kashyap और Nawazuddin Siddiqui से खास बातचीत

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi