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बवाना उपचुनाव: केजरीवाल ने बिना बोले विरोधियों की बोलती बंद कर दी

आखिर ऐसा क्या किया केजरीवाल ने जहां चारों तरफ बीजेपी का बवंडर चल रहा था. वहां न सिर्फ अपनी मजबूती को थामे रखा, बल्कि विरोधियों को बुरी तरह पटखनी दे दी

Prabhakar Thakur Updated On: Sep 02, 2017 05:41 PM IST

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बवाना उपचुनाव: केजरीवाल ने बिना बोले विरोधियों की बोलती बंद कर दी

भीषण घमासान के बाद आखिरकार बवाना विधानसभा सीट पर आम आदमी पार्टी की जीत हो ही गई. अरविंद केजरीवाल ने इस उपचुनाव में ऐसी बाजी खेली कि बीजेपी और कांग्रेस दोनों के ही उम्मीदवार पस्त हो गए.

दिल्ली की सत्ता पर काबिज आम आदमी पार्टी (आप) के लिए यह जीत निश्चित ही किसी संजीवनी से कम नहीं है. गौरतलब है कि विधानसभा स्तर के पिछले चुनाव यानी पंजाब और गोवा के चुनावों में उम्मीद के खिलाफ करारी हार झेलने के बाद आप अगर दोबारा हार जाती, तो पार्टी को 'चुका हुआ' मानने वालों की लाइन लग जाती.

लेकिन ऐन मौके पर आप ने बाजी पलट दी. पर ऐसा हुआ कैसे? आखिर ऐसा क्या किया टीम केजरीवाल ने कि जब ऐसा लग रहा था कि चारों तरफ बीजेपी का बवंडर चल रहा है तब आप ने न सिर्फ अपने को मजबूती से थामे रखा बल्कि विरोधियों को बुरी तरह पटखनी दे दी.

यह कमाल है आप की बदली हुई चाल-ढाल का. बात-बात पर नरेंद्र मोदी का नाम ले लेने और किसी भी गड़बड़ी का आरोप सीधे पीएम पर लगा देने से आप नेता केजरीवाल की छवि बेहद लापरवाह और गैर-जिम्मेदार नेता की बनने लगी थी. यह भी देखा जाता था कि केजरीवाल लगभग मुद्दे पर अपनी राय और टिप्पणी तैयार रखते थे. ऐसा लगता था मानो उन्हें हर समस्या का कारण और उसका हल मालूम है.

New Delhi: AAP candidate Ram Chander greets supporters during a victory rally after he won the Bawana by-election, in north-west Delhi on Monday. PTI Photo (PTI8_28_2017_000086B)

पंजाब चुनाव में मिला शॉक ट्रीटमेंट

पंजाब चुनावों में हार पार्टी के लिए किसी 'शॉक' से कम नहीं था. लेकिन खुशकिस्मती से पार्टी को इससे 'शॉक ट्रीटमेंट' मिल गया. अचानक केजरीवाल और उनकी पार्टी 'मौन-व्रत' पर चले गए. उन्हें एहसास हो चुका था कि 'अजी, काम बोलता है'. उनके ट्विटर अकाउंट पर जाएंगे तो पता चलेगा कि अब वो नरेंद्र मोदी को 'एक्सपोज' करने की बजाए दिल्ली की जनता के बीच किए जा रहे काम की चर्चा ज्यादा करते हैं.

इसके अलावा उन्होंने जहां-तहां चुनाव लड़ने के इरादे को भी राम-राम कह दिया. उनका ध्यान अब सिर्फ दिल्ली की ओर है. इसके नतीजे भी दिख रहे हैं. बेहद कम वक्त में मोहल्ला क्लिनिक खुलने, अस्पतालों में दवाइयां मिलने, जांच होने और डॉक्टरों के हाजिर रहने से स्वस्थ्य सेवा में सुधार और स्कूली शिक्षा में सुधार ऐसी चीजें हैं, जिससे लोगों का भरोसा केजरीवाल में कायम हो गया है.

केजरीवाल इससे पहले भी कई संकटों में घिरे हैं पर किसी होशियार योद्धा की तरह मुसीबत से निकल आते हैं.

गलतियां सुधारने को हमेशा तैयार

ध्यान रहे कि इससे पहले भी 2014 के लोकसभा चुनावों में दिल्ली की सभी सीटों पर हार के बाद लोग मान चुके थे कि 2013 में कुछ पलों का जादू अब खत्म हो चुका है. उसके 9 महीने के बाद विधानसभा चुनावों में विरोधियों का कोई अता-पता ही नहीं लगा. पार्टी जान चुकी थी कि इस्तीफा देने से नहीं जनता के लिए काम करने से ही वो अपनी क्षमता लोगों को दिखा सकते हैं.

New Delhi: AAP supporters dance to celebrate party candidate Ram Chander's win in the Bawana by-election, in north-west Delhi on Monday. PTI Photo (PTI8_28_2017_000087B)

पार्टी में केजरीवाल के अक्खड़ रवैये को लेकर भी विवाद हुआ है. लगता है उन्होंने इस पर भी लगाम लगाई है. कुमार विश्वास के साथ सुलह इसी और इशारा करती है.

इसके अलावा ध्यान रहे कि यह पार्टी किसी जाति, धर्म या इलाके के नाम पर नहीं बनी बल्कि यह जन-आंदोलन से निकली पार्टी है. इसके नेताओं ने लंबा समय समाजसेवी के रूप में जनता की भलाई के लिए संघर्ष में बिताया है. दिल्ली सरकार के काम ने आहिस्ता-आहिस्ता उन्हें मौजूदगी का अहसास करवा दिया है. इसलिए आम आदमी पार्टी को लंबी रेस का घोड़ा कहना कतई अतिश्योक्ति नहीं होगी.

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