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'डार्विन', 'न्यूटन', 'रेप होकर रहेंगे': राजस्थान में बयान बहादुर कम नहीं

बेतुकी बयानबाजी का शगल आज के नेताओं में बढ़ता जा रहा है. जिम्मेदार पदों पर बैठे नेता बोलने से पहले सोचते क्यों नहीं हैं

Updated On: Jan 22, 2018 03:05 PM IST

Mahendra Saini
स्वतंत्र पत्रकार

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'डार्विन', 'न्यूटन', 'रेप होकर रहेंगे': राजस्थान में बयान बहादुर कम नहीं

केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री सत्यपाल सिंह ने कहा है कि डार्विन का सिद्धांत गलत सिद्धांत है. केंद्रीय मंत्री के मुताबिक भारतीय विज्ञान और संस्कृति दुनिया में सबसे पुरानी है. किसी भी भारतीय विद्वान ने कभी नहीं कहा कि इंसान की उत्पत्ति बंदर से हुई थी. लिहाजा हमें कपि से इंसान के सफर वाला किसी 'विदेशी' का सिद्धांत नहीं मानना चाहिए.

इस बयान के बाद से केंद्रीय मंत्री की चौतरफा खिंचाई की जा रही है. विशेषकर सोशल मीडिया पर मंत्री के दिमागी स्तर को दिवालियापन के कगार तक पर बता दिया गया है. पत्रकार शेखर गुप्ता ने उनकी तुलना पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह से की है. गुप्ता के मुताबिक पंजाब यूनिवर्सिटी में एंथ्रोपोलॉजी विभाग के एक कार्यक्रम में ज्ञानी जैल सिंह ने कहा था कि अगर इंसान की उत्पत्ति बंदर से हुई तो फिर तोता कहां से आया?

शेखर गुप्ता ने तंज कसते हुए यह भी लिखा है कि ज्ञानी जैल सिंह और सत्यपाल सिंह के शैक्षिक स्तर में दिन-रात का अंतर है. सत्यपाल सिंह यूपीएससी की परीक्षा पास कर के 1980 में आईपीएस अफसर बने थे और 34 साल की सेवा के बाद वर्ष 2014 में राजनीति में आए.

सोशल मीडिया पर तो लोग अब ऐसे कमेंट भी कर रहे हैं कि यूपीएससी को 1980 बैच की कॉपियां निकलवाकर दोबारा से जांच करवानी चाहिए. एक यूजर ने तो यह भी लिखा है कि शायद उस समय डार्विन सिद्धांत से जुड़ा सवाल नहीं पूछा गया होगा नहीं तो सत्यपाल सिंह कहां आईपीएस बन पाते!

Satyapal Singh

केंद्रीय मंत्री सत्यपाल सिंह ने पिछले दिनों अपने दिए बयान में डार्विन के सिद्धांत को ही गलत ठहरा दिया था

राजस्थान में एक से एक बयान बहादुर

ऐसा नहीं है कि सत्यपाल सिंह जैसा मामला एक ही हो. बयान बहादुर नेताओं के मामले राजस्थान में भी कम नहीं हैं. यहां भी मंत्री से लेकर संतरी तक और बीजेपी से लेकर कांग्रेस तक हर जगह बयान बहादुरों की मौजूदगी देखी जा सकती है.

राजस्थान के शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी ने इसी महीने न्यूटन के सिद्धांत को कॉपी-पेस्ट बता दिया. उन्होंने कहा कि किताबों में गुरुत्वाकर्षण की खोज का जो श्रेय आइजैक न्यूटन को दिया जा रहा है, वो सरासर गलत है. देवनानी ने कहा कि वास्तव में गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत न्यूटन से करीब 1200 वर्ष पूर्व भारतीय वैज्ञानिक ब्रह्मगुप्त ने दिया था.

हालांकि मंत्री जी ने पूरी बात नहीं बताई. वास्तव में ब्रह्मगुप्त ने यह जरूर बताया था कि ब्रह्मांड में पृथ्वी सभी वस्तुओं को अपनी ओर आकर्षित करती है. लेकिन किसी सिद्धांत के लिए जरूरी गणनाओं के अभाव में विज्ञान की कसौटी पर कभी इसे गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत नहीं माना गया.

फिर मंत्री जी ने यह भी नहीं बताया कि वो कौन से कारण रहे जिनकी वजह से हम भारतीय अपने ही महान विज्ञानी के ज्ञान को तरजीह क्यों नहीं दे पाए. इसे 11वीं शताब्दी में भारत आए अलबेरुनी ने बेहतर तरीके से बताया था. अलबेरुनी ने लिखा था कि भारतीय अपने ज्ञान का प्रसार करने के बजाय किताबों को लाल कपड़े में लपेट कर रखना ज्यादा पसंद करते हैं.

इससे पहले भी वासुदेव देवनानी ने इसी तरह के कई और बयान दिए हैं. एक बार उन्होंने कहा कि गाय ऐसा जानवर है जो जुगाली करते वक्त ऑक्सीजन बाहर निकालती है. एक बार उन्होंने कहा कि स्कूली शिक्षा के सिलेबस में बदलाव किया जाना चाहिए ताकि कोई और दूसरा कन्हैया कुमार पैदा न हो सके. इसके अलावा, अकबर के नाम से महान शब्द हटाने, अकबर को क्रूर और सांप्रदायिक बताने जैसे बयानों को लेकर भी देवनानी अकसर चर्चा में रहे हैं.

राजस्थान के मंत्री अकबर को लेकर भी बयानबाजी कर चुके हैं

राजस्थान के शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी पूर्व में मुगल बादशाह अकबर को लेकर भी बयानबाजी कर चुके हैं

रेप नहीं रोके जा सकते क्योंकि यह तो होकर ही रहेंगे

पिछले साल चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ ने रेप के बढ़ते मामलों के संदर्भ में एक बेतुका बयान दिया था. सराफ ने कहा था कि बलात्कार नहीं रोके जा सकते क्योंकि यह तो होकर ही रहेंगे. सराफ का शर्मनाक तर्क यहीं तक सीमित नहीं रहा. उन्होंने कहा कि रेप रोकने के लिए सरकार एक-एक घर में ताला तो नहीं लगा सकती न.

2018 के पहले दिन अलवर से बीजेपी विधायक बी एल सिंघल ने बयान दिया कि देश पर जल्दी ही वैसा ही मुस्लिम राज आने वाला है जैसा कि 12वीं शताब्दी में आया था. भारत में मुस्लिम न सिर्फ शरीयत लागू कर देंगे बल्कि हिंदुओं को औरंगजेब की तरह जबरन इस्लाम कबूल करवाकर इस देश को दार-उल-इस्लाम में परिवर्तित कर देंगे. जब सिंघल से पूछा गया कि वो किस आधार पर ऐसी भविष्यवाणी कर रहे हैं. इसपर उन्होंने बड़े भोलेपन से कहा कि मुसलमान चार-चार शादियां कर दर्जनों बच्चे पैदा कर रहे हैं. यही आबादी हिंदुओं से आगे निकल जाएगी और मुस्लिम अत्याचार का कारण बनेगी.

2017 में राजस्थान में कथित गौ-तस्करों की हत्याओं के अचानक बढ़े मामलों ने सनसनी फैला दी थी. लेकिन हमारे बयान बहादुर नेता यहां भी आग में घी डालने से बाज नहीं आए. मीडिया रिपोर्ट में बताया गया कि अलवर के ही रामगढ़ से बीजेपी विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने बयान दिया कि मुसलमान गायों की खरीद-फरोख्त करेंगे तो यूं ही मारे जाते रहेंगे.

राजस्थान में पिछले कुछ समय में गोरक्षा से जुड़े मामलों में भी़ड़ द्वारा मुसलमानों की पिटाई के मामले सामने आए हैं

राजस्थान में पिछले दिनों गोरक्षा के नाम पर भी़ड़ द्वारा मुसलमान युवकों के साथ मारपीट के मामले सामने आए हैं

देवस्थान मंत्री राजकुमार रिणवां ने जुलाई में समाजवादी पार्टी के नेता आज़म खान का नाम लिए बिना उनकी बोटी-बोटी काट देने का बयान दिया. रिणवां ने कहा कि उनकी मजबूरी है कि वो भारत के संविधान से बंधे हैं वरना वो आज़म खान जैसे नेताओं की बोटी-बोटी काटकर चील-कौवों को खिला दें. हालांकि, यह उस बयान की प्रतिक्रिया स्वरूप था जिसमें आज़म ख़ान ने भी सीमा पर शहीद होने वाले सैनिकों पर एक बेहद बेतुका बयान दिया था. लेकिन यह भी सच है कि एक शख्स की गैर-जिम्मेदारी दूसरे के भी वैसा ही करने का आधार नहीं बन सकती.

राजस्थान में बीजेपी के मंत्री-विधायक सब बयान बहादुर बन रहे हों तो भला प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी क्यों पीछे रहें. परनामी ने अपने विधानसभा क्षेत्र में लोगों को पब्लिक पार्क पर अतिक्रमण कर लेने के लिए उकसाया. जब लोगों ने पूछा कि इससे उनपर सरकारी या न्यायिक कार्रवाई तो नहीं हो जाएगी? तब बिना अपनी पद-प्रतिष्ठा की परवाह किए परनामी ने कहा कि वो और सरकार आंखों पर पट्टी बांध लेंगे, आप तो अतिक्रमण कर लो.

बयानबाजी में कांग्रेस नेता भी किसी से कम नहीं

अजमेर लोकसभा उपचुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार रघु शर्मा ने कहा कि इसी साल होने वाले राजस्थान विधानसभा चुनाव में अगर कांग्रेस सत्ता में आती है तो सबसे पहले भामाशाह कार्ड को टुकड़े-टुकड़े कर कूड़ेदान में फेंका जाएगा.

राजस्थान में भामाशाह कार्ड मौजूदा बीजेपी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है जो सामाजिक सुरक्षा और महिला सशक्तिकरण से जुड़ी है. इसमें घर की मुखिया महिला को बनाकर उसके नाम से खाता खुलवाया जाता है और तमाम तरह की सब्सिडी इसी खाते में आती है. यही नहीं, भामाशाह कार्डधारी परिवार को 3 लाख तक का मेडिक्लेम भी सरकार मुफ्त मुहैया कराती है.

Photo Source: rajassembly.nic.in

जयपुर स्थित राजस्थान विधानसभा भवन (फोटो: rajassembly.nic.in)

पिछली कांग्रेस सरकार में गृह मंत्री रहे शांति धारीवाल भी अकसर अपने उल-जुलूल बयानों को लेकर चर्चा में रहते थे. एक बार जब व्यापारियों ने उनसे सरकारी अधिकारियों के बिना रिश्वत लिए काम न करने की शिकायत की तो उन्होंने उलटे व्यापारियों को ही डांट दिया. धारीवाल ने कहा कि राजस्थान के व्यापारी शुक्र मनाएं कि यहां रिश्वत लेकर सरकारी नुमाइंदे काम तो कर देते हैं वरना उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में तो रुपए भी ले लेते हैं और काम भी नहीं करते.

हमारे यहां बोलने से पहले सौ-सौ बार सोचने की शिक्षा देने वाले अनेकों संत हुए हैं. इसके बावजूद बेतुकी बयानबाजी का शगल आज के नेताओं में बढ़ता जा रहा है. सवाल यह उठता है कि क्या जिम्मेदार पदों पर बैठे नेता बोलने से पहले सोचते नहीं है. क्या उन्हें पता नहीं होता कि उनकी कही बात कितनी दूर तक जा सकती है. क्या यह बयान बहादुर नेता समाज में अपनी और विदेशों में भारत की छवि की कभी चिंता नहीं करते. सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या कभी उन्होंने कबीर को नहीं पढ़ा जो कहते हैं कि... बोली एक अनमोल है, जो कोई बोलै जानि. हिेये तराजू तौलि के, तब मुख बाहर आनि.

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं.)

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