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SC/ST के अधिकारों को कोई कम नहीं कर सकता: राजनाथ सिंह

उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोगों को प्रताड़ित करने सहित अन्य प्रकार के अपराधों को रोकने के लिए सरकार ने नियमों में संशोधन किया है

Bhasha Updated On: Jul 18, 2018 08:16 PM IST

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SC/ST के अधिकारों को कोई कम नहीं कर सकता: राजनाथ सिंह

बुधवार को गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों पर हो रही हिंसा के प्रति राज्यसभा में अपने विचार रखे. उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति या संस्था इन समुदायों के संरक्षण संबंधी कानूनी प्रावधानों में कटौती नहीं कर सकता है.

सिंह ने सदन में प्रश्नकाल के दौरान इस बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा ‘अनुसूचित जाति और जनजाति के लोगों को संविधान में दिए संरक्षण को कोई व्यक्ति अथवा संस्था नहीं छीन सकती है.’

ढील देकर सख्त बनाया SC/ST एक्ट

SC/ST एक्ट में ढील देने के कारण इन समुदायों के प्रति अपराध बढ़ने के सवाल के जवाब में सिंह ने कहा कि सरकार ने इस कानून को मजबूत करने के लिए जरूरी बदलाव किए हैं. इतना ही नहीं इससे जुड़े नियमों में भी जरूरी संशोधन किए हैं.

उन्होंने कहा ‘मैं सदन को आश्वस्त करना चाहता हूं कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति के लोगों को प्रताड़ित करने सहित अन्य प्रकार के अपराधों को रोकने के लिए भी सरकार ने नियमों में संशोधन किया है.’ सीपीआई के डी राजा ने अनुसूचित जाति एवं जनजाति के व्यक्तियों के प्रति अपराधों से जुड़े मामलों में न्यायिक जांच, दोषसिद्धि की घटती दर और संबद्ध कानूनी प्रावधानों में ढील देने का मुद्दा उठाया था.

इसके जवाब में सिंह ने सरकार के किए गए उपायों का जिक्र करते हुए कहा कि पहले इस तरह के मामलों की सुनवाई के लिए विशेष अदालतें थीं. लेकिन सरकार ने अब देश भर में 194 विशेष अदालतें गठित की हैं. उन्होंने अब तुरंत सुनवाई के आधार पर दोषसिद्धि की दर बढ़ने की उम्मीद जताई है.

गृह राज्य मंत्री ने आंकड़ों को गलत बताया

इस दौरान गृह राज्य मंत्री हंसराज गंगाराम अहीर ने पिछले चार सालों में अनुसूचित जाति जनजाति के व्यक्तियों के प्रति अपराधों में इजाफे की आशंका को आंकड़ों के आधार पर गलत बताया. अहीर ने राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़ों के हवाले से बताया कि साल 2013 में अनुसूचित जाति के व्यक्तियों के खिलाफ 39,408 मामले दर्ज किए गए.

उन्होंने कहा कि साल 2014 में यह आंकड़ा 40,401 होने के बाद 2015 में घटकर 38,670 पर आ गया और 2016 में फिर से बढ़कर 40,801 हो गया. इसी तरह अनुसूचित जनजाति के व्यक्तियों के खिलाफ साल 2013 में 6,793 मामले, 2014 में 6,827, 2015 में 6,276 और 2016 में 6,568 आपराधिक मामले दर्ज किए गए.

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