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मध्यप्रदेश: विवाद बढ़ा तो कांग्रेस ने विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ पेश किया अविश्वास प्रस्ताव

विपक्ष का आरोप है कि अध्यक्ष के रवैये के कारण विधायिका, कार्यपालिका के प्रति उत्तरदायी होती जा रही है.

Dinesh Gupta Updated On: Mar 21, 2018 06:51 PM IST

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मध्यप्रदेश: विवाद बढ़ा तो कांग्रेस ने विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ पेश किया अविश्वास प्रस्ताव

कुछ विवादास्प्द मामलों के उजागर होने की आशंका के चलते मध्यप्रदेश विधानसभा में विधायकों के सवाल पूछने के अधिकारों पर पाबंदी लगा दी गई है. विधानसभा सचिवालय ने विधानसभा कार्य संचालन नियमों में संशोधन की अधिसूचना जारी कर दी गई है. अधिसूचना के जारी होने के बाद विधायक अब उस मामले में सवाल नहीं पूछ सकेंगे, जिसके लिए सरकार ने कोई कमेटी गठित कर दी है.

नियमों के प्रभावी होने के बाद यह माना जा रहा है कि सरकार विधानसभा में अपनी जवाबदेही से बचने के लिए विवादास्पद मामलों में कमेटी बनाकर बचने की कोशिश करेगी. नियमों में मनमाने संशोधनों से नाराज विपक्ष ने विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ सदन में अविश्वास का प्रस्ताव भी पेश कर दिया है. अविश्वास प्रस्ताव में एक मुद्दा राज्य में महिला अत्याचार से जुडे़ मामलों में विपक्ष को चर्चा से रोकना भी है.

नियमों में लगातार होता है संशोधन

मध्यप्रदेश राज्य का गठन 1 नवंबर 1956 को हुआ था. विधानसभा के कार्य संचालन नियम अक्टूबर 1964 से प्रभावी हुए हैं. इन नियमों के प्रभावी होने से पूर्व पूर्ववर्ती विधानसभाओं के नियमों से विधानसभा का संचालन होता था. अब तक सौ से अधिक संशोधन नियमों में किए जा चुके हैं. नियमों में संशोधन के लिए विधानसभा की नियम समिति है. समिति के अध्यक्ष स्वयं विधानसभा अध्यक्ष रहते हैं. विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीताशरण शर्मा की अध्यक्षता वाली वर्तमान समिति कानून मंत्री रामपाल सिंह, विधायक बाबूलाल गौर, गोपीलाल जाटव, बालकृष्ण पाटीदार, संजय शर्मा चैतन्य कुमार कश्यप, मधु भगत, सचिन यादव, सोहनलाल वाल्मीकि एवं श्रीमती लोरेन वी.लोबो सदस्य हैं. Bhopal : Madhya Pradesh Chief Minister Shivraj Singh Chauhan addressing a gathering during his indefinite fast to placate angry farmers at BHEL Dussehra Ground in Bhopal on Saturday. PTI Photo (PTI6_10_2017_000087B)

20 अप्रैल 2017 को गठित की गई इस समिति की बैठक 28 फरवरी 2018 को हुई. समिति ने अधिकांश संशोधन सदन में विधायकों द्वारा पूछे जाने वाले सवालों को सीमित करने के लिए किए. कार्य संचालन नियम में प्रश्न पूछने के नियमों में तीन नए प्रावधान किए हैं. नए प्रावधान में विधायक किसी समिति की ऐसी कार्यवाही के बारे में सवाल नहीं पूछ सकता जो प्रतिवेदन द्वारा सभा के सामने न रखी गई हो या समिति के समक्ष विचाराधीन हो. मुख्यमंत्री और अन्य अतिविशिष्ट व्यक्तियों के सुरक्षा अमले के बारे में भी विधायक सवाल नहीं पूछ सकेंगे. विधायक संवेदनशील घटनाओं पर भी सवाल नहीं पूछ सकेंगे. पिछले साल मंदसौर में किसानों पर हुई फायरिंग की घटना के कारण सरकार को विधानसभा में काफी असुविधा का सामना करना पड़ा था.

नियमों में हुए बदलाव से समिति के सदस्य अनजान

विधानसभा के कार्य संचालन नियमों में हुए बदलाव पर मध्यप्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष डॉ.सीताशरण शर्मा ने कहा कि नियमों में बदलाव का निर्णय आम सहमति से किया गया है. जबकि समिति के के सदस्य कांग्रेस विधायक मधु भगत कहते हैं कि मैं नियमों में बदलाव से सहमत नहीं हूं. फिर बदलाव कैसे हो गया ?

इस सवाल पर भगत कहते है कि मैं समिति की आखिरी बैठक में नहीं गया था, संभवत: इसी बैठक में बदलाव को अंतिम रूप दिया गया होगा. एक अन्य कांग्रेस विधायक एवं समिति के सदस्य सोहन लाल वाल्मीकि की सफाई चौंकाने वाली है. वाल्मीकि ने कहा कि उन्हें बैठक में बुलाया ही नहीं गया. कांग्रेस के तीसरे विधायक सचिन यादव यह तो स्वीकार करते हैं कि समिति की बैठक में नियमों पर चर्चा हुई थी. पर बदलाव फाइनल कर दिए जाएंगे, यह उन्हें नहीं पता था.

समिति में भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर भी सदस्य हैं. उन्होंने कहा कि मैं इस बात से सहमत हूं कि देश की एकता और अखंडता को प्रभावित करने वाले सवाल विधानसभा में नहीं पूछे जाना चाहिए. नए नियमों में इस तरह के सवाल पूछने पर भी प्रतिबंध लागाया गया है. गौर कहते हैँ कि जांच से जुड़े सवाल का अभिप्राय न्यायिक जांच से है.

यहां उल्लेखनीय है कि न्यायिक जांच आयोग अधिनियम के अनुसार जिस मामले की जांच आयोग को सौंपी गई है, उस पर सवाल नहीं पूछ सकते हैं. आयोग का प्रतिवेदन सदन में आने पर ही चर्चा हो सकती है. बीजेपी के दो अन्य विधायक सदस्य चेतन्य कश्यप और गोपीलाल जाटव समिति की बैठक में शामिल ही नहीं हुए थे. इससे अनुमान लगाया जा सकता है कि विधायक, विधानसभा की समितियों को लेकर कितने गंभीर हैं!

कांग्रेस ने दी है अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की सूचना

विधानसभा में सेंसरशिप लागू होने का मामला तूल पकड़ने के बाद मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस बचाव की मुद्रा में दिखाई दे रहा है. प्रतिपक्ष के नेता अजय सिंह ने बुधवार को नियमों में हुए बदलाव के अलावा अन्य संवेदनशील मामलों में अध्यक्ष डॉ. सीताशरण शर्मा के खिलाफ पक्षपात पूर्ण रवैया अपनाने के खिलाफ एक अविश्वास प्रस्ताव की सूचना प्रमुख सचिव अवधेश प्रताप सिंह को लिखित में दी है.

ajay singh

अजय सिंह

सूचना पर अजय सिंह के अलावा वरिष्ठ विधायक रामनिवास रावत और डॉ. गोविंद सिंह के हस्ताक्षर हैं. अविश्वास प्रस्ताव की सूचना में कहा गया है कि अध्यक्ष महोदय द्वारा सरकार के भ्रष्टाचार एवं लोक महत्व के ज्वलंत मुद्दों पर प्रश्न लगाने के अधिकार को सीमित किया गया है.

सदस्यों के मूल प्रश्न में भी कांट-छांट की जा रही है. विपक्ष का आरोप है कि अध्यक्ष के रवैये के कारण विधायिका, कार्यपालिका के प्रति उत्तरदायी होती जा रही है. यह रवैया पूरी तरह से असंवैधानिक है. विपक्ष का आरोप है कि अध्यक्ष सत्ता पक्ष के दबाव में हैं. विपक्ष की आवाज को दबाने की निरंतर कोशिश उनके द्वारा की जा रही है. इस आरोप के साथ विपक्ष ने उन मामलों का भी उल्लेख किया है, जिनमें अध्यक्ष ने नियमानुसार चर्चा नहीं कराई.

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