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कर्नाटक: फ्लोर टेस्ट से पहले भी रिजॉर्ट में ही टिके हैं कांग्रेस-JDS विधायक

कोई जोखिम नहीं उठाते हुए कांग्रेस ने अपने विधायकों को डोमलुर स्थित हिल्टन एम्बैसी गोल्फलिंक्स में रखा है जबकि जेडीएस ने अपने विधायकों को बेंगलुरु के बाहरी इलाके देवनाहल्लीयोन के प्रेस्टीज गोल्फशायर रिज़ॉर्ट में रखा है

FP Staff Updated On: May 24, 2018 10:00 PM IST

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कर्नाटक: फ्लोर टेस्ट से पहले भी रिजॉर्ट में ही टिके हैं कांग्रेस-JDS विधायक

कर्नाटक के नए सीएम एचडी कुमारस्वामी गुरुवार को विधानसभा में बहुमत साबित करने वाले हैं. लेकिन, बीजेपी की ओर से 'ऑपरेशन कमल' दोहराए जाने की आशंका ने कर्नाटक में 'रिज़ॉर्ट की राजनीति' को लंबा खींच दिया है.

विधानसभा में मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी के फ्लोर टेस्ट से एक दिन पहले भी कांग्रेस और जेडीएस के विधायक होटल में ही हैं. 15 मई को कर्नाटक की जनता की ओर से विधानसभा चुनाव में खंडित जनादेश दिए जाने के बाद से ही दोनों पार्टियों के विधायक होटल में हैं.

कर्नाटक में राजनीतिक संकट पैदा होने के बाद पिछले नौ दिन से एक आलीशान रिज़ॉर्ट और होटल में रह रहे विधायक अपने परिवारों से दूर हैं और अपने परेशानी भरे दिन खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं.

ऐसी खबरें हैं कि इन विधायकों के फोन भी इनके पास नहीं है, जिसकी वजह से वे अपने परिजन से भी संपर्क नहीं कर पा रहे हैं. लेकिन कांग्रेस और जेडीएस के नेता इन दावों को नकार रहे हैं. खबरों के मुताबिक, विधायकों को एक दिन के लिए भी अपने घर जाने की इजाजत नहीं दी जा रही है और तो और विधायकों को मीडिया से भी दूर रखा गया है.

किसी राजनीतिक पार्टी को स्पष्ट बहुमत न मिल पाने के कारण कांग्रेस और जेडीएस ने चुनाव बाद गठबंधन बनाया और कुमारस्वामी को बुधवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई. कुमारस्वामी को गुरुवार को विधानसभा में बहुमत साबित करना होगा उम्मीद की जा रही है कि वह बहुमत साबित कर देंगे.

बहरहाल, कोई जोखिम नहीं उठाते हुए कांग्रेस ने अपने विधायकों को डोमलुर स्थित हिल्टन एम्बैसी गोल्फलिंक्स में रखा है जबकि जेडीएस ने अपने विधायकों को बेंगलुरु के बाहरी इलाके देवनाहल्लीयोन के प्रेस्टीज गोल्फशायर रिज़ॉर्ट में रखा है.

कांग्रेस के एक नेता ने अपनी पहचान का खुलासा नहीं करने की शर्त पर बताया , 'हमारे विधायक फ्लोर टेस्ट पूरा होने तक रिज़ॉर्ट में ही रहेंगे. इसके बाद उन्हें आजाद कर दिया जाएगा, ताकि वे अपने परिवारों से मिल सके.' उन्होंने कहा , 'गलत छवि बनाई जा रही है कि हमारे विधायकों को बंधक बनाकर रखा गया है. यदि यह बंधक बनाकर रखा जाना है तो हर कोई ऐसे ही रहना चाहेगा. लोग भूल रहे हैं कि वे आलीशान रिज़ॉर्ट में हैं , जिसे इस्तेमाल करना आम लोगों के लिए बहुत मुश्किल है.'

कांग्रेस नेता ने इस दावे को भी खारिज किया कि उनके मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए हैं. उन्होंने कहा , 'उनके पास उनके फोन हैं और वे अपने परिवारों से बात कर रहे हैं. कुछ लोग बेबुनियाद अफवाह फैला रहे हैं.' जेडीएस ने भी इस दावे को खारिज किया कि उसके विधायकों को बंधक बनाकर रखा गया है.

जेडीएस के मीडिया सेल प्रभारी सदानंद ने कहा , 'फ्लोर टेस्ट खत्म होने के बाद हमारे विधायक अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में जाएंगे. किसी ने उनका मोबाइल फोन नहीं लिया है. वे अपने परिजन से खुलकर बातें कर रहे हैं.'

आपको बता दें कि 'ऑपरेशन कमल' या 'ऑपरेशन लोटस' नाम के शब्द 2008 में उस वक्त इस्तेमाल किए गए थे जब बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बीएस येदियुरप्पा ने मुख्यमंत्री पद संभाला था. पार्टी को साधारण बहुमत के लिए तीन विधायकों की दरकार थी. 'ऑपरेशन कमल' के तहत कांग्रेस और जेडीएस के कुछ विधायकों को बीजेपी में शामिल होने के लिए राजी किया गया था.

उनसे कहा गया था कि वे विधानसभा की अपनी सदस्यता छोड़कर फिर से चुनाव लड़ें. विधायकों के इस्तीफे की वजह से विश्वास मत के दौरान जीत के लिए जरूरी संख्या कम हो गई थी और फिर येदियुरप्पा विश्वास मत जीत गए थे.

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