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नोटबंदी: क्या बदलेंगे बिहार के सियासी समीकरण?

नोटबंदी पर नीतीश कुमार और एनडीए नेताओं के बयानों के तार जुड़ने लगे हैं

Updated On: Nov 29, 2016 11:28 AM IST

Amitesh Amitesh

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नोटबंदी: क्या बदलेंगे बिहार के सियासी समीकरण?

सियासत में संकेत के बड़े मायने होते हैं. नेताओं के बयान और उनकी टाइमिंग सियासी उठापटक और बदलते समीकरण की ओर इशारा करते हैं.

नोटबंदी पर हो रही बयानबाजी के बीच बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और एनडीए नेताओं के बयानों के तार जुड़ने लगे हैं. नोटबंदी पर नीतीश के बयान और उस पर बीजेपी की बधाई. इसे महज इत्तेफाक कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

हां, इसे दोनों के बीच बन रही सियासी खिचड़ी भी कहना उतनी ही जल्दबाजी भी होगी. लेकिन सियासत के दो सूरमाओं की नोटबंदी पर एक जैसी सोच ने सुगबुगाहट शुरू कर दी है. सबसे पहले बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार को बधाई दी.

राम विलास ने किया नीतीश के बयान का स्वागत

अब एनडीए के घटक दलों में बड़े चेहरे रामविलास पासवान ने नोटबंदी पर नीतीश के रुख का स्वागत किया है. अपनी पार्टी के 17 वें स्थापना दिवस के मौके पर एक सवाल के जवाब में लोकजनशक्ति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केन्द्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा कोई भी अगर आता है तो इससे एनडीए की ताकत बढ़ेगी.

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पासवान की पार्टी बिहार में बीजेपी की सबसे बड़ी पार्टनर है. ऐसे में अगर कोई समीकरण बनता है तो उनकी भूमिका बड़ी हो जाती है. नीतीश को नोटबंदी पर उनके इकरारनामे से शराबबंदी पर बीजेपी का साथ मिल रहा है. एलजेपी और बीजेपी दोनों ने शराबबंदी पर नीतीश को लेकर थोड़ी नरमी जरूर अपना ली है.

एलजेपी संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष और सांसद चिराग पासवान का सम्मान भी नीतीश कुमार को लेकर थोड़ा और बढ़ गया है. फर्स्टपोस्ट हिंदी के साथ एक्सक्लूसिव बातचीत में नोटबंदी पर नीतीश के कदम की तारीफ करते हुए चिराग कहते हैं. कोई भी सभ्य, बुद्धिमान और फ्यूचरिस्टिक सोच रखने वाला व्यक्ति लालू जी के साथ लंबे वक्त तक नहीं रह सकता.

चिराग कहते हैं

'जिस तरह से लालू जी की सोच है, उनकी कार्यशैली है. लालू जी के साथ किसी व्यक्ति का सहज रूप से कार्य करना संभव नहीं है. हम खुद भुक्तभोगी रहे हैं, इसलिए व्यक्तिगत अनुभव के साथ इसे बता रहा हूं. ये बात नीतीश जी को कितनी जल्दी समझ में आती है. ये देखना है.'

चिराग के बयान के मायने 

चिराग पासवान के बयान का मतलब और भी ज्यादा बढ़ जाता है क्योंकि, लोकसभा चुनाव के वक्त भी लालू का साथ छोड़ मोदी के साथ खड़े होने का बड़ा फैसला चिराग का ही था. चिराग की राजनीतिक सूझ-बूझ का ही नतीजा था जिसने पिता रामविलास पासवान के शुरुआती संकोच के बावजूद बीजेपी के साथ जाने में कोई हिचक नहीं की.

Photo. twitter

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बिहार के बड़े कद्दावर नेता और लगभग एक दशक पहले तक नीतीश के साथ एनडीए में साथ-साथ रहे पासवान का बयान अपने-आप में आने वाले दिनों में बिहार की सियासत में हवा के रुख का एहसास कराता है.

चिराग पासवान ने तो जिस अंदाज में नीतीश कुमार की तारीफ करते हुए लालू पर सीधे वार किया उससे भी नीतीश को लेकर बीजेपी के सहयोगी दलों का कम होता ऐतराज दिख रहा है.

पासवान का दावा: ढाई साल से ज्यादा नहीं चलेगी बिहार सरकार 

फर्स्टपोस्ट हिंदी के साथ बातचीत में रामविलास पासवान ने दावा किया कि हर हाल में बिहार की सरकार ढाई साल से ज्यादा नहीं चलने वाली है. अभी तो महज एक साल ही हुआ है.

दरअसल, बीजेपी और उसके सहयोगी दलों की तरफ से कोशिश भी हो रही है कि बिहार में सत्ताधारी गठबंधन में लगी आग को और हवा दी जाए. अब नोटबंदी पर बवाल ने इन्हें मौका भी दे दिया है.

सही नेता वही जो जनता की नब्ज समझे: मंगल पांडे

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फर्स्टपोस्ट हिंदी के साथ बातचीत में बिहार बीजेपी अध्यक्ष मंगल पांडे कहते हैं, 'सही नेता वही होता है जो जनता की नब्ज को समझता है. नीतीश कुमार ने जनभावनाओं को समझा है. उसके बाद ऐसा बयान दिया है.'

जेडीयू प्रवक्ता नीरज कुमार का कहना है कि नीतीश राष्ट्रहित में सोचते हैं. नीरज कहते हैं कि जब जिन्ना विवाद के बाद पूरी बीजेपी लालकृष्ण आडवाणी के खिलाफ खड़ी थी, उस वक्त भी नीतीश कुमार ने बोल्ड स्टेप लेते हुए आडवाणी का समर्थन किया था.

नीतीश और बीजेपी के बीच नोटबंदी पर गलबहियां सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है. उधर, बिहार में जेडीयू के साथ सरकार में साझीदार आरजेडी और कांग्रेस लगातार नोटबंदी पर सरकार को घेरने में लगे हैं. आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से इस मसले पर बात भी की है.

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या बिहार में सत्ताधारी गठबंधन में सब कुछ ठीक नहीं है? या फिर नीतीश का बयान लालू पर दवाब बनाने के लिए है? नीतीश और लालू के बीच कई मुद्दों पर मतभेद साफ-साफ दिख जाता है. चाहे बाहुबली शहाबुद्दीन को जेल से रिहा करने के बाद का माहौल हो या फिर शराबबंदी पर दोनों का नजरिया.

अब नोटबंदी पर मोदी के साथ नीतीश की जुगलबंदी ने इस खाई को और ज्यादा बढ़ा दिया है. नोटबंदी पर सरकार को घेरने में लगे विपक्षी दलों की एकता को नीतीश कुमार ने तार-तार कर दिया है.

नोटबंदी पर महाभारत के बीच मोदी को मझधार में एक सहारा सा मिल गया है. लेकिन, कभी एक नाव में बैठने से परहेज करने वाला मांझी अब हाथों में पतवार लेकर लगातार खड़ा दिख रहा है.

ऐसे में सवाल यही खड़ा हो रहा है कि नीतीश को लेकर पासवान की नरमी कहीं आने वाले कल की नजदीकी का संकेत तो नहीं दे रही.

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