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राहुल की वजह से लिया था महागठबंधन से अलग होने का फैसला- नीतीश कुमार

उन्होंने कहा कि पूर्व उपमुख्यमंत्री और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों पर राहुल ने कोई स्टैंड नहीं लिया था. इस बारे में रूख साफ नहीं करने की वजह से उन्होंने महागठबंधन से अलग होने का कदम उठाया

Updated On: Jan 16, 2019 12:31 PM IST

FP Staff

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राहुल की वजह से लिया था महागठबंधन से अलग होने का फैसला- नीतीश कुमार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की 'अक्षमता' की वजह से उन्हें महागठबंधन से अलग होने का फैसला लेना पड़ा था. उन्होंने कहा कि पूर्व उपमुख्यमंत्री और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों पर राहुल ने कोई स्टैंड नहीं लिया था. इस बारे में रूख साफ नहीं करने की वजह से उन्होंने महागठबंधन से अलग होने का कदम उठाया.

नीतीश कुमार ने दावा किया कि उनकी पार्टी ने 2015 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 40 सीटें दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. मुख्यमंत्री ने कहा कि 'राहुल ने उन्हें निराश किया जब उन्होंने  इस बारे में कोई बयान तक नहीं दिया, जिससे कि मैं गठबंधन छोड़ने के बारे में दोबारा विचार करता.’

नीतीश कुमार ने कहा, ‘हमेशा से मेरा रुख रहा है कि अपराध, भ्रष्टाचार और सांप्रदायिकता से कोई समझौता नहीं होगा. उनकी कार्यशैली इस तरह की थी कि मेरे लिए काम करना मुश्किल होता जा रहा था. सभी स्तरों पर हस्तक्षेप था. उनके लोग अपने फरमानों के साथ थाने में टेलीफोन करते थे.’

सीएम नीतीश कुमार ने एक निजी समाचार चैनल के कार्यक्रम में ये बातें कहीं.

जुलाई 2017 में तेजस्वी यादव के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में सीबीआई ने केस दर्ज किया था. जिसके बाद जेडीयू और आरजेडी के रिश्तों में तल्खी आ गई थी. तनाव बढ़ने के बाद नीतीश कुमार ने आरजेडी और कांग्रेस के साथ मिलकर बनाए गठबंधन से खुद को अलग कर लिया.

नीतीश कुमार ने कहा कि राहुल गांधी के आर्डिनेंस की कॉपी फाड़ने की बड़ी चर्चा हुई थी. वो जेडीयू थी जिसने कांग्रेस को बिहार में 40 सीटों पर लड़ने का मौका दिया और कांग्रेस ने 28 सीटों पर जीत हासिल की. आरजेडी पुरानी सहयोगी होने के बावजूद 40 सीटें देने को राजी नहीं थी.

2003 में राहुल गांधी ने मनमोहन सिंह सरकार के उस ऑर्डिनेंस की कॉपी को मीडिया के सामने फाड़ दिया था, जिसमें घोटाले के आरोपी नेताओं को बचाने की कोशिश की जा रही थी.

नीतीश कुमार ने कहा कि उनके सामने इस्तीफे के अलावा कोई और उपाय नहीं था. उन्होंने कहा कि इस्तीफे के तुरंत बाद बीजेपी ने समर्थन देने का ऑफर दिया और उन्होंने बिहार के हित में इस ऑफर को स्वीकार कर लिया.

बीजेपी के साथ अपने संबंधों पर नीतीश कुमार ने कहा, नब्बे के दशक से अयोध्या, आर्टिकल 370 और यूनिफॉर्म सिविल कोड के मसले पर हमारे बीच मतभेद रहे हैं. लेकिन हमने बीच का रास्ता निकाल लिया है. यहां तक की अभी हमें नरेंद्र मोदी सरकार से पूरा समर्थन और सहयोग मिल रहा है.'

नीतीश कुमार ने 2013 में बीजेपी के साथ अपने रिश्ते तोड़ लिए थे. नरेंद्र मोदी को पीएम का उम्मीदवार प्रोजेक्ट किए जाने के फैसले के खिलाफ उन्होंने बीजेपी से अपनी पार्टी के गठबंधन को तोड़ दिया था.

आरएसएस के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मैं उनके विचार से सहमत नहीं हूं लेकिन मैं उनके संगठन के लिए काम करने के तरीके उनकी प्रतिबद्धता की प्रशंसा करता हूं. हमारी समाजवादी विचारधारा को अपनाने वाले लोगों ने भी कभी इतना उत्कृष्ट प्रदर्शन नहीं किया.

2019 के लोकसभा चुनाव के बारे में नीतीश कुमार ने कहा कि अब हमारे पास रामविलास पासवान जैसे अच्छे नेता भी हैं. इसलिए कोई संदेह नहीं कि हम चुनावों में अच्छा प्रदर्शन करेंगे.

महागठबंधन के बारे में बात करते हुए वो बोले कि महागठबंधन का नाम उनका दिया है जब जेडीयू इसमें शामिल थी. जेडीयू के अलग होने के बाद ये सिर्फ गठबंधन रह गया है.

मोदी सरकार के 10 फीसदी कोटा, जिसका जेडीयू ने भी समर्थन किया लेकिन आरजेडी ने उसका विरोध किया है, पर बात करते हुए नीतीश कुमार बोले कि अनारक्षित वर्ग के गरीब लोगों के विकास से ही सामाजिक बदलाव लाया जा सकता है.

उन्होंने कहा कि अगर उनकी (सामान्य वर्ग) मदद बिना एससी-एसटी और पिछड़े वर्ग के अधिकारों के साथ छेड़छाड़ किए हो रही है तो इसमें किसी को शिकायत नहीं होनी चाहिए.

नीतीश कुमार ने कहा कि एनडीए को अगले चुनाव में जीत में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए. मध्य प्रदेश और राजस्थान में बीजेपी की हार को उन्होंने छोटे स्तर की हार बताया.

उन्होंने कहा कि इन राज्यों की जनता लंबे वक्त से चली आ रही सरकारों के खिलाफ अपनी थोड़ी नाराजगी जताई. वोटर्स एनडीए के खिलाफ नहीं है.

( एजेंसी इनपुट के साथ )

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