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नीतीश का इस्तीफा, मोदी की बधाई, फिर से साथ-साथ चलो रे भाई !

चार साल बाद नीतीश कुमार फिर से अपने पुराने पार्टनर की तरफ वापस लौटते दिख रहे हैं

Amitesh Amitesh Updated On: Jul 26, 2017 09:44 PM IST

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नीतीश का इस्तीफा, मोदी की बधाई, फिर से साथ-साथ चलो रे भाई !

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी को इस्तीफा सौंपने के बाद राजभवन के बाहर मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा 'आगे क्या होगा, कैसे होगा, आगे पर छोड़ दीजिए. फिलहाल ये चैप्टर क्लोज. लेकिन, कोई भी चीज न्याय के साथ बिहार के विकास और बिहार के हित में होगी, वो होगी. आगे हम इस पर विचार करेंगे.'

नीतीश कुमार के इस बयान से साफ है कि आगे उनका बीजेपी के साथ आना महज औपचारिकता मात्र रह गया है. नीतीश पहले भी बीजेपी के साथ बिहार में गठबंधन की सरकार चला चुके हैं. बीजेपी के साथ उनके कार्यकाल में बिहार में विकास भी हुआ. कानून-व्यवस्था भी बेहतर हुई. इस दौरान नीतीश ने अपनी छवि के साथ-साथ देश भर में बिहार की छवि को भी काफी हद तक निखारा.

इस बात पर भी ध्यान देना होगा कि नीतीश कुमार ने इस्तीफा दिया है लेकिन, विधानसभा भंग करने की सिफारिश नहीं की है. मतलब साफ है कि इस वक्त चुनाव के मोड में बिहार नहीं जाने वाला. ऐसी सूरत में एक बार फिर से नीतीश कुमार का बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाने की संभावना प्रबल हो गई है.

Nitish Kumar

नीतीश कुमार चाहते तो बिहार के डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव को बर्खास्त भी कर सकते थे. लेकिन, उन्होंने ऐसा नहीं किया. ऐसा होने की सूरत में आरजेडी के मंत्री इस्तीफा देते. या फिर बाहर से समर्थन देकर नीतीश को बीजेपी के साथ जाने से रोकने की कोशिश करते.

लेकिन, ऐसा होने की सूरत में भी नीतीश के लिए मुश्किलें कम नहीं होती. रेलवे टेंडर घोटाले में अभी तो केवल सीबीआई ने लालू, राबड़ी और तेजस्वी पर केस दर्ज किया है. जब इस मामले में जांच आगे बढ़ेगी तो फिर चार्जशीट भी दाखिल होगी. इस पूरे मामले में इन तीनों को जेल की हवा भी खानी पड़ सकती है.

उधर, इनकम टैक्स और ईडी की तरफ से पहले ही बेनामी संपत्ति के मामले में कार्रवाई चल रही है जिसमें लालू यादव की बड़ी बेटी और राज्यसभा सांसद मीसा भारती और उनके पति शैलेश भी बेनामी संपत्ति के मामले में फंस गए हैं.

ऐसी सूरत में नीतीश कुमार के लिए पूरे के पूरे लालू कुनबे के भ्रष्टाचार के मकड़जाल में फंसने के बाद उनके साथ गठबंधन जारी रखना मुश्किल होता.

सियासत के चतुर खिलाड़ी नीतीश इस बात को बखूबी समझ रहे थे. खासतौर से अपनी छवि को लेकर संवेदनशील नीतीश कुमार के सामने सबसे बड़ी परेशानी अपनी साफसुथरी छवि बचाने की ही थी.

तेजस्वी पर कारवाई में हो रही देरी ने नीतीश की साख पर भी सवाल खड़ा कर दिया था. ज्यादा देरी से उनको सियासी नुकसान ही हो रहा था.

इन तमाम सियासी उलझन के बीच नीतीश कुमार ने चुप्पी साधे रखी. लेकिन, जब चुप्पी तोड़ी तो फिर ऐसा मास्टर स्ट्रोक मारा जिससे लालू यादव के सियासी शिगूफे की हवा निकल गई.

इस्तीफे के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बार-बार यह जताने की कोशिश की है कि हमने ना तो तेजस्वी का इस्तीफा मांगा और ना ही कभी इस्तीफे के लिए कहा. नीतीश कुमार ने कहा कि हमें जितना ब्लेम करना है करते रहिए, हमें कुछ नहीं कहना है.

नीतीश कुमार ये दिखाना चाहते हैं कि हमारी तरफ से महागठबंधन को बचाने की पूरी कोशिश की गई. अपने दिल्ली के पिछले दो दौरों के दौरान नीतीश ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी से भी मुलाकात कर अपनी बात भी रख दी.

इस दौरान उनकी तरफ से कांग्रेस आलाकमान के माध्यम से भी भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में लालू को सही कदम उठाने की सलाह दिए जाने की अपील की गई. लेकिन, बीच का रास्ता नहीं निकाल पाने की स्थिति में नीतीश कुमार ने आखिरकार इस तरह का फैसला ले लिया जिसके आगे लालू की सारी रणनीति धरी की धरी रह गई.

नीतीश कुमार के लालू का साथ छोड़ने के बाद अब उनके बीजेपी के साथ जाने की संभावना फिर प्रबल हो गई है. उनके इस्तीफे के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से ट्वीट कर खुशी जताई गई.

narendra modi

मोदी ने लिखा है कि 'भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में जुड़ने के लिए नीतीश कुमार जी को बहुत-बहुत बधाई. सवा सौ करोड़ नागरिक ईमानदारी का स्वागत और समर्थन कर रहे हैं.'

आगे उन्होंने लिखा कि 'देश के, विशेष रूप से बिहार के उज्जवल भविष्य के लिए राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर भ्रष्टाचार के खिलाफ एक होकर लड़ना,आज देश और समय की मांग है.'

प्रधानमंत्री का बयान नीतीश के प्रति उनकी दोस्ती का संकेत माना जा रहा है. बदलते घटनाक्रम के बीच बीजेपी संसदीय बोर्ड की बैठक भी हुई है. बीजेपी ने समर्थन के संकेत भी दे दिए हैं.

उधर, नीतीश कुमार की तरफ से भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ट्वीट का जवाब ट्वीट से दिया. उनकी तरफ से प्रधानमंत्री को तहेदिल से शुक्रिया भी कर दिया गया.

अब साफ है नीतीश को बीजेपी का समर्थन औपचारिकता मात्र है. मोदी विरोध के नाम पर बीजेपी से अलग हुए नीतीश कुमार अब प्रधानमंत्री मोदी के साथ ट्वीटर पर जुगलबंदी कर रहे हैं.

औपचारिक ऐलान अभी नहीं हुआ है. लेकिन, चार साल बाद नीतीश की घर वापसी पर जश्न की तैयारी शुरू हो गई है.

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