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योग दिवस कार्यक्रम से नदारद नीतीश : क्या इसे राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए ?

जेडीयू ने पहले ही साफ कर दिया है कि भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश भर में एनडीए का चेहरा हों, लेकिन, बिहार में नीतीश कुमार ही एनडीए के सबसे बड़े चेहरे होंगे.

Updated On: Jun 21, 2018 05:03 PM IST

Amitesh Amitesh
विशेष संवाददाता, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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योग दिवस कार्यक्रम से नदारद नीतीश : क्या इसे राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए ?

राजधानी पटना के पाटलिपुत्र स्पोर्ट्स ग्राउंड में सुबह-सुबह बिहार के डिप्टी सीएम सुशील मोदी, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे और केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद योग करने पहुंचे थे. राज्य सरकार की तरफ से आयोजित योग दिवस कार्यक्रम में बिहार के राज्यपाल सत्यपाल मलिक भी पहुंचे थे. पूरा ग्राउंड स्वास्थ्य को लेकर जागरूक योग करने वाले लोगों से भर गया था.

लेकिन, इस कार्यक्रम के दौरान बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कमी खल रही थी. चूंकि ये कार्यक्रम बिहार सरकार की तरफ से आयोजित किया गया था, लिहाजा सूबे के मुखिया के आने से कार्यक्रम और भी भव्य हो सकता था.

इस कार्यक्रम का आयोजन बिहार सरकार के कला एवं संस्कृति विभाग की तरफ से किया गया था. बुधवार को कला संस्कृति मंत्री कृष्ण कुमार ऋषि ने कहा था कि योग कार्यक्रम बिहार सरकार के द्वारा आयोजित किया जा रहा है और इसमें शामिल होने के लिए सभी लोगों को निमंत्रण भेजा गया है.

दूसरी तरफ, स्वास्थ्य मंत्रालय की तरफ से भी इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए लोगों से बड़ी तादाद में आने के लिए इश्तेहार लगवाया गया था.

मुख्यमंत्री के आने की अपेक्षा इसलिए बढ़ भी गई थी कि क्योंकि मोदी से मिलन के बाद नीतीश अब बीजेपी से साथी हो गए हैं. लेकिन, ऐसा नहीं हो पाया.

हालांकि इस मुद्दे पर डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने लीपापोती करने की कोशिश जरूर की. जूनियर मोदी ने मुख्यमंत्री के इस कार्यक्रम से अलग होने के मुद्दे पर सफाई देते हुए कहा नीतीश कुमार के योग कार्यक्रम में शामिल नहीं होने पर बिहार के डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी ने कहा ‘कोई जरूरी नहीं कि लोग योगस्थल पर ही आकर योग करें. आज 190 देशों में लोग योग कर रहे हैं.’ उन्होंने कहा ‘सीएम नीतीश कुमार भी घर में योग करते हैं और योग के कार्यक्रम स्थल पर उनके शामिल होने को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए.’

तो क्या नीतीश कुमार के इस कदम को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखना चाहिए. डिप्टी सीएम भले ही लाख सफाई दें लेकिन, मुख्यमंत्री का योग दिवस कार्यक्रम से गायब रहना कुछ कहानी बयां कर रहा है.

आखिर क्यों नीतीश ने किया किनारा ?

दरअसल, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बीजेपी के साथ रहते हुए भी एक खास दूरी बनाए रखना चाहते हैं. नीतीश नहीं चाहते हैं कि वो बीजेपी की बी-टीम बनकर काम करें या फिर इस तरह का कोई संदेश जाए.

दरअसल, योग दिवस कार्यक्रम को केंद्र से लेकर राज्य सरकार के स्तर पर जोर-शोर से मनाया जाता है. 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किए जाने को मोदी सरकार अपनी बड़ी उपलब्धि मानती है और बीजेपी भी इसे खूब प्रचारित करती है. यह भी एक वजह हो सकती है जिससे अपनी ही सरकार की तरफ से आयोजित कार्यक्रम से मुख्यमंत्री नदारद हो गए.

इसके पहले कई बार योग करने की क्रिया को कई मुस्लिम संगठनों की तरफ से भी विरोध का सामना करना पड़ा है. नीतीश कुमार की योग दिवस कार्यक्रम से दूरी का एक यह भी कारण हो सकता है, जिससे किसी विवाद में पड़ने के बजाए अल्पसंख्यक समुदाय के बीच अपनी धर्मनिरपेक्ष छवि को उसी तरह बरकरार रखा जा सके.

Nitish Kumar's Samiksha Yatra

कुछ दिन पहले भी बिहार को विशेष राज्य के दर्जे की मांग को लेकर नीतीश कुमार ने फिर से अपना पुराना राग छेड़ दिया है. नोटबंदी पर भी नीतीश ने यू-टर्न लेकर बीजेपी पर दबाव बनाने की कोशिश की. इस पूरी कवायद को पॉलिटिकल पॉश्चरिंग भर ही माना जा रहा है.

नीतीश की यह पूरी कवायद बीजेपी पर दबाव बनाने की है. अगले लोकसभा चुनाव के वक्त सीटों के तालमेल को लेकर होने वाले समझौते में पार्टी की तरफ से ज्यादा सीटें झटकने की कोशिश है. यह कवायद इसलिए है, क्योंकि नीतीश को डर सता रहा है कि बीजेपी के साथ बातचीत के टेबल पर बैठने पर लोकसभा चुनाव 2014 के आंकडे के साथ बीजेपी बात करेगी, जब अलग होकर चुनाव लड़ने पर जेडीयू को महज 2 सीटें मिली थी.

जेडीयू ने पहले ही साफ कर दिया है कि भले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश भर में एनडीए का चेहरा हों, लेकिन, बिहार में नीतीश कुमार ही एनडीए के सबसे बड़े चेहरे होंगे. जेडीयू की तरफ से कोशिश है पहले की तरह जेडीयू बिहार में बडे भाई की भूमिका में रहे. इसके लिए विधानसभा की सीटों का हवाला दिया जा रहा है जहां अलग चुनाव लड़ने पर जेडीयू इस वक्त बीजेपी  से बड़ी भूमिका में है. नीतीश की मौजूदा कोशिश गठबंधन के भीतर अपनी पोजिशनिंग को दुरुस्त करने की है.

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