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उपेंद्र कुशवाहा की काट की तैयारी में नीतीश, लव-कुश समीकरण में दरार को रोक पाएंगे ?

उपेंद्र कुशवाहा के बढ़ते प्रभाव की काट के लिए बनी रणनीति के तहत अब कैबिनेट विस्तार में जेडीयू की तरफ से कुशवाहा समाज के नए लोगों को कैबिनेट में जगह दी जाएगी.

Updated On: Oct 01, 2018 06:55 PM IST

Amitesh Amitesh

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उपेंद्र कुशवाहा की काट की तैयारी में नीतीश, लव-कुश समीकरण में दरार को रोक पाएंगे ?

रविवार को पटना में 1 अणे मार्ग के मुख्यमंत्री कार्यालय में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ जेडीयू के कुशवाहा नेताओं की बैठक के बाद पूर्णिया से जेडीयू सांसद संतोष कुशवाहा ने कहा, ‘कुशवाहा समाज समता पार्टी के समय से ही जेडीयू के साथ है और बिहार के कोइरी-कुर्मी हमेशा से जेडीयू के साथ रहे हैं. ये पूछे जाने पर कि क्या जेडीयू के वोटों का बिखराव होगा, इसके जवाब में कुशवाहा ने कहा कि नीतीश कुमार हमारे सर्वमान्य नेता हैं और वोट कहीं नहीं जा रहा है.’

जेडीयू सांसद संतोष कुशवाहा ने इशारों-इशारों में केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा पर हमला बोला. संतोष कुशवाहा ने साफ कर दिया कि समता पार्टी से लेकर जेडीयू के अबतक के सफर तक पूरा समाज नीतीश कुमार के नेतृत्व में उनके साथ खड़ा है. यानी किसी दूसरे के पास जाने का कोई सवाल नहीं है.

लेकिन, हकीकत क्या है. इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जेडीयू के भीतर कुशवाहा नेताओं को अलग से मुख्यमंत्री आवास बुलाकर मुलाकात करने की जरूरत पड़ रही है. मुख्यमंत्री के साथ मुलाकात के बाद यह भी तय हुआ है कि बिहार के हर जिले में कुशवाहा चेतना मंच के माध्यम से कुशवाहा समाज को पार्टी के साथ जोड़ने या जोड़े रखने की कवायद तेज होगी, यह सब तब होगा जबकि सभी पार्टियां अब इलेक्शन मोड में आ रही हैं. यानी लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कुशवाहा समाज को गियर-अप करने की तैयारी नीतीश कुमार की तरफ से हो रही है.

क्या कुशवाहा देंगे नीतीश का साथ

UPENDRA KUSHWAHA

बिहार की आबादी में कुर्मी समुदाय का वोट बैंक 2 से 3 फीसदी के आस-पास है, जबकि, कुशवाहा समाज 5 से 6 फीसदी है. लेकिन, नीतीश कुमार ने समता पार्टी के वक्त से ही लव-कुश का नारा दिया. लव यानी कुर्मी समुदाय और कुश मतलब कुशवाहा समुदाय को साथ रखकर नीतीश कुमार ने अबतक सामाजिक समीकरण को अपने साथ रखा है. नीतीश कुमार खुद कुर्मी समुदाय से आते हैं, लेकिन, अब उन्हीं के पुराने सहयोगी उपेंद्र कुशवाहा अलग होकर कुशवाहा समाज के वोट बैंक को अलग कर नीतीश कुमार के लव-कुश समीकरण को ध्वस्त करने में लगे हैं.

पिछले लोकसभा चुनाव में जेडीयू ने अलग होकर चुनाव लड़ा था, जबकि, आरएलएसपी ने बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था. जेडीयू महज 2 सीटों पर सिमट गई थी जबकि, आरएलएसपी ने तीनों सीटें जीत ली थीं. तभी से उपेंद्र कुशवाहा और उनकी पार्टी के नेता बिहार में जेडीयू से अपनी पार्टी को बड़ा बताते रहे हैं. अब जबकि, नीतीश कुमार की एनडीए में दोबारा एंट्री हो गई है तो फिर उस हालत में नीतीश कुमार को मिल रहे ज्यादा महत्व के चलते उपेंद्र कुशवाहा को परेशानी हो रही है.

सीटों के बंटवारे में कम सीटों का ऑफर ही उपेंद्र कुशवाहा को लेकर कई अटकलबाजियों को जन्म दे रहा है. लेकिन, कोई भी पक्के तौर पर यह नहीं कह पा रहा है कि उपेंद्र कुशवाहा किधर जाएंगे? एनडीए में ही रहेंगे या पल्टी मारकर दूसरे खेमे की तरफ रुख कर लेंगे.

उपेंद्र कुशवाहा अगर आरजेडी खेमे में चले जाते हैं तो संभावित नुकसान की भरपाई की तैयारी पहले से की जाने लगी है. नीतीश कुमार की कुशवाहा नेताओं से मुलाकात और चर्चा को इसी नजरिए से देखा जा रहा है.

उपेंद्र कुशवाहा के खीर का जवाब, साग-रोटी

nitish kumar

जेडीयू के कुशवाहा नेताओं के साथ मुलाकात में उपेंद्र कुशवाहा की तरफ से पकाई गई सियासी खीर को लेकर भी चर्चा हुई है. अब जेडीयू उपेंद्र कुशवाहा के खीर का जवाब साग-रोटी से देगी.

जेडीयू सांसद संतोष कुशवाहा ने साफ कर दिया कि समाज के लोगों को धारा के साथ ही चलना होगा. जेडीयू समावेशी पार्टी है और सीएम नीतीश कुमार ही हमारे नेता हैं. संतोष कुशवाहा ने कहा खीर बनाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि साग-रोटी से काम चलेगा.उन्होंने उपेन्द्र कुशवाहा के एनडीए में रहने या फिर वापस जाने के बाद भी कोई फर्क पड़ने की बात कही.

दरअसल, कुशवाहा समाज का बिहार में मुख्य काम साग-सब्जी का ही रहा है. कुशवाहा यानी कोइरी समाज का पुश्तैनी काम माना जाता है. अब साग-रोटी के बहाने इस पूरे समुदाय को भावनात्मक तौर पर साथ रखने की कोशिश हो रही है. भले ही इसे समावेशी राजनीति कहा जाए, लेकिन, हकीकत में यह कुशवाहा समाज को साधने के लिए ही किया जा रहा है.

अब कैबिनेट विस्तार पर नजरें

उपेंद्र कुशवाहा के बढ़ते प्रभाव की काट के लिए बनी रणनीति के तहत अब कैबिनेट विस्तार में जेडीयू की तरफ से कुशवाहा समाज के नए लोगों को कैबिनेट में जगह दी जाएगी. अणे मार्ग में चली बैठक में मुजफ्फरपुर बालिका गृह मामले में मचे बवाल के बाद मंत्री मंजू वर्मा के इस्तीफे और उसके बाद हुई नाराजगी की भी चर्चा हुई. कुशवाहा समाज में इस मुद्दे को लेकर हुई नाराजगी को अब कैबिनेट विस्तार में दूर करने की कोशिश होगी. जेडीयू किसी भी कीमत पर लव-कुश समीकरण को दरकने नहीं देना चाह रही है. यही वजह है कि नीतीश कुमार ने उपेंद्र कुशवाहा के एनडीए में रहने या पाला बदलने की स्थिति से निपटने की तैयारी पहले से ही शुरू कर दी है.

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