S M L

जेडीयू ने साफ किया गठबंधन में रहेगी लेकिन 'दबाव' नहीं बर्दाश्त किया जाएगा

जेडीयू 2019 में बिहार में साथ-साथ चुनाव लड़ने की बात तो कर रही है, लेकिन, सीट शेयरिंग के मुद्दे पर दबाव की रणनीति भी अपना रही है.

Updated On: Jul 09, 2018 07:44 PM IST

Amitesh Amitesh
विशेष संवाददाता, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

0
जेडीयू ने साफ किया गठबंधन में रहेगी लेकिन 'दबाव' नहीं बर्दाश्त किया जाएगा

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है, 'हम बिहार में एक साथ हैं लेकिन राज्य के बाहर हमारा तालमेल नहीं है. बिहार की तरह हमारे बीच राष्ट्रीय स्तर पर गठबंधन नहीं हुआ है.'

दिल्ली में राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक के बाद पटना लौटने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का दिया यह बयान काफी अहम है. नीतीश कुमार के बयान से साफ है कि बीजेपी के साथ उनका रिश्ता केवल बिहार तक ही सीमित है, बिहार के बाहर नहीं.

कार्यकारिणी की दिल्ली में हुई बैठक में साफ हो गया है कि अब जेडीयू आने वाले दिनों में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान के अलावा मणिपुर में भी चुनाव में भाग लेगी. इसके पहले गुजरात, कर्नाटक समेत दूसरे राज्य में भी जेडीयू चुनाव लड़ चुकी है. सूत्रों के मुताबिक, कोशिश इस बात की हो रही है कि विधानसभा के अलावा लोकसभा चुनाव में भी उन राज्यों में पार्टी अपने उम्मीदवार खड़ा करे, जहां, उसका पहले जनाधार रहा है.

जेडीयू के प्रधान महासचिव के सी त्यागी के बयान से साफ भी हो गया कि आने वाले दिनों में इन सभी राज्यों में एक बार फिर से जेडीयू अपनी जमीन तलाशने की कोशिश करेगी जहां पहले से जनता परिवार का जनाधार रहा है, लेकिन, समय के साथ-साथ वहां हालात बदल गए हैं.

जेडीयू की तरफ से यह संकेत दिया जा रहा है कि भले ही बिहार में बीजेपी के साथ-साथ वो सरकार चला रही है. लेकिन, वो अलग पार्टी है. उसकी विचारधारा अलग है और अपनी विचारधारा को जिंदा रखने और पार्टी के विस्तार के लिए वो हरसंभव प्रयास करती रहेगी.

हालांकि, यह भी हकीकत है कि जेडीयू के दूसरे राज्यों में अलग चुनाव लड़ने से या फिर यूं कहें कि बीजेपी के खिलाफ चुनाव लड़ने से कोई खास फर्क नहीं पड़ने वाला. लेकिन, जेडीयू बार-बार बिहार से बाहर बीजेपी के साथ गठबंधन की संभावना से इनकार कर दिखाना चाहती है कि हम आपके दबाव में आने वाले नहीं हैं.

Bihar CM Nitish Kumar at a seminar in Patna

नीतीश कुमार सांप्रदायिकता के मुद्दे पर भी काफी गंभीर हैं. बीजेपी के साथ सरकार चला रहे नीतीश कुमार बीजेपी के बड़बोले नेताओं के बयान से परेशान हैं. नीतीश ने कार्यकारिणी की बैठक में साफ कर दिया कि सांप्रदायिकता से वो समझौता नहीं करने वाले. खासतौर से गिरिराज सिंह के बयान और नवादा में जेल में दंगा भड़काने के आरोप में बंद नेताओं से मुलाकात को लेकर नीतीश कुमार काफी नाराज हैं.

नीतीश कुमार अपने तल्ख तेवर से यह जताना चाह रहे हैं कि भले ही बीजेपी नेता और केंद्रीय मंत्री की तरफ से इस तरह का बयान दिया जा रहा है, लेकिन, हम इस तरह के मुद्दे पर समझौता नहीं कर सकते.

12 जुलाई को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के साथ नीतीश कुमार की मुलाकात होनी है. माना जा रहा है कि इस मुलाकात में बीजेपी के साथ जेडीयू गठबंधन और उसके आगे के रुख पर चर्चा होगी. इस मुलाकात में अगले लोकसभा चुनाव की तैयारियों के साथ-साथ दोनों दलों में सीट शेयरिंग के मुद्दे को लेकर भी चर्चा संभव है.

नीतीश कुमार का मौजूदा तेवर उस मीटिंग से पहले बीजेपी को संदेश देना है. नीतीश को पता है कि बीजेपी से अगर बराबरी के स्तर पर बात करनी है और सीटों का बंटवारा करना है तो उसके पहले इस तरह से दबाव बनाना होगा. यही वजह है कि जेडीयू 2019 में बिहार में साथ-साथ चुनाव लड़ने की बात तो कर रही है, लेकिन, सीट शेयरिंग के मुद्दे पर दबाव की रणनीति भी अपना रही है.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
Ganesh Chaturthi 2018: आपके कष्टों को मिटाने आ रहे हैं विघ्नहर्ता
Firstpost Hindi