S M L

बुनियादी ढांचा नहीं, इसलिए खरीदने पड़े सिर्फ 36 राफेल विमानः निर्मला सीतारमन

मोदी सरकार ने साल 2015 में फ्रांस से 36 राफेल विमान खरीदने की घोषणा की थी जबकि इससे पहले कांग्रेस सरकार ने 126 विमान लाने के लिए डील किया था

Updated On: Sep 13, 2018 01:00 PM IST

FP Staff

0
बुनियादी ढांचा नहीं, इसलिए खरीदने पड़े सिर्फ 36 राफेल विमानः निर्मला सीतारमन

रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमन ने स्पष्ट रूप से कहा है कि भारतीय वायुसेना के पास पर्याप्त बुनियादी ढांचा और आधुनिक तकनीकी सुविधाएं नहीं थीं जिसकी वजह से सरकार सिर्फ 36 राफेल विमान ही खरीद पाई है. आपको बता दें कि मोदी सरकार ने साल 2015 में फ्रांस से 36 राफेल विमान खरीदने की घोषणा की थी जबकि इससे पहले कांग्रेस सरकार ने 126 विमान लाने के लिए डील किया था. सीतारमण ने इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में बताया, 'जब भी कोई नया स्क्वाड्रन (18 विमानों का बेड़ा) शामिल होता है तो इसके साथ उससे जुड़ी दूसरी चीजों की भी जरूरत होती है. उन्होंने कहा, 'एयर फोर्स के टेक्निकल विवरण से आपको पता चलेगा कि अगर इमरजेंसी हो तो हमेशा सिर्फ दो स्क्वाड्रन शामिल किए जाते हैं, उससे ज्यादा नहीं. इससे यह बात साबित हो जाती है कि सिर्फ दो विमानों के लिए ही हामी क्यों भरी गई. फ्लाइवे कंडिशन के विमानों को आप इसमें शामिल कर सकते हैं वरना आपको दूसरी चीजों पर काफी खर्च करना पड़ सकता है. उन्होंने कहा, ' राफेल की खरीद के समय दो स्क्वाड्रन से ज्यादा के लिए बुनियादी ढांचा और अन्य चीजों की व्यवस्था करना हमारे लिए संभव नहीं था, इसलिए हम दो के लिए ही तैयार हुए हैं.'

सुरक्षा के मद्देनजर नहीं बताई जाएगी कीमत

बता दें कि रक्षा मंत्री से जब यह सवाल किया गया कि उन्होंने राफेल सौदे की कीमत बताने का वादा किया था, तो उन्होंने कहा कि वह सिर्फ इस विमान की बेसिक कीमत (670 करोड़ रुपए) की बात कर रही थीं, जिसके बारे में संसद में भी बताया जा चुका है. सीतारमन ने बताया- 'मैंने इसके बारे में सोचा है, क्योंकि मुझसे बहुत से लोगों ने ये पूछा है लेकिन मैंने इसका जवाब नहीं दिया। मैंने रक्षा सचिव से राफेल का मूल मूल्य देने के लिए कहा था लेकिन उन्होंने सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए इसे बताने से इनकार कर दिया, इसलिए मैंने उसका जवाब आपको नहीं दिया. इसकी कीमत तय करना एक बड़ा फैसला है.'

जब निर्मला सीतारमन से पूछा गया कि अनिल अंबानी रिलांयस डिफेंस को इसके देखरेख की जिम्मेदारी क्यों दी गई तो उन्होंने कहा- 'सारे प्रोसेस फॉलो किए जा रहे हैं. मैं इसमें कुछ नहीं कर सकती. मैनें किसी को कोई आदेश नहीं दिया है और न ही कुछ कहा है. इसकी देखरेख कोई भी कर सकता है. 70 तरह के पार्टनर्स भी कर सकते हैं. ये किसी तरह के उत्पाद की खरीदारी भी हो सकती है या फिर इंवेस्टमेंट भी. इसमें मेरा कोई रोल नहीं है.'

वायुसेना प्रमुख ने राफेल पर कही ये बात

बीते बुधवार को ही वायुसेना प्रमुख एयरचीफ मार्शल बीएस धनोआ ने कहा था है कि राफेल से भारतीय सेना को मजबूती मिलेगी. उन्होंने नरेन्द्र मोदी सरकार का समर्थन करते हुए कहा था, राफेल और एस-400 देकर सरकार भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ा रही है ताकि नुकसान की भरपाई हो सके. उन्होंने कहा था- 'केंद्र सरकार आज हमें राफेल लड़ाकू विमान देने की तैयारी करवा रही है. इन विमानों के जरिए हम सेना के सामने जो भी मुश्किलें हैं, उसका सामना कर पाएंगे.'

क्या है राफेल?

राफेल दोहरे इंजन से लैस फ्रांसीसी लड़ाकू विमान है और इसका निर्माण डसॉल्ट एविएशन ने किया है. राफेल विमानों को वैश्विक स्तर पर सर्वाधिक सक्षम लड़ाकू विमान माना जाता है. भारत और फ्रांस ने 36 राफेल विमानों की खरीद के लिए 23 सितंबर, 2016 को 7.87 अरब यूरो (लगभग 5 9, 000 करोड़ रुपए) के सौदे पर हस्ताक्षर किए थे. विमान की आपूर्ति सितंबर 2019 से शुरू होगी.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
Ganesh Chaturthi 2018: आपके कष्टों को मिटाने आ रहे हैं विघ्नहर्ता

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi