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पूरी दुनिया भारत में इनवेस्टमेंट करना चाहती है: सुरेश प्रभु

पढ़िए मारया शकील से हुई सुरेश प्रभू की खास बातचीत के चुनिंदा अंश-

FP Staff Updated On: Jan 18, 2018 06:55 PM IST

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पूरी दुनिया भारत में इनवेस्टमेंट करना चाहती है: सुरेश प्रभु

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्लूईएफ) में भारत का डंका बजाने को तैयार हैं. पीएम मोदी जीएसटी पारित कराने के बाद दावोस (स्विट्जरलैंड) में होने वाली सालाना बैठक में रिफार्मिस्ट यानी सुधारवादी छवि के साथ अर्थव्यवस्था की नई संभावनाओं को खंगालेंगे. विश्व आर्थिक फोरम का इस साल का थीम है, खंडित दुनिया में साझा भविष्य का निर्माण. 23 से 26 जनवरी तक होने वाली इस बैठक में प्रधानमंत्री मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात भी करेंगे.

दावोस को संबोधित करने वाले 20 वर्षों में वह पहले प्रधानमंत्री होंगे. उनके साथ 6 अन्य मंत्री जाएंगे. सुरेश प्रभु भी इस दल का हिस्सा होंगे. सीएनएन-न्यूज 18 से हुई खास बातचीत में उन्होंने बताया कि उनका ध्यान विश्व व्यापार संगठन में अधिक से अधिक कोष भारत के लिए संरक्षित करना होगा. पढ़िए मारया शकील से हुई उनकी खास बातचीत के चुनिंदा अंश-

मारया शकील: भारत दावोस के मंच पर किस तरह से खुद को पेश करेगा?

सुरेश प्रभु: लंबे समय से दावोस दुनिया के शीर्षस्थ नेताओं, विचारकों, बैंकर्स, तकनीकी से जुड़े लोगों के लिए बेहरतरीन मंच रहा है. प्रधानमंत्री मोदी ऐसे समय में यहां पहुंचेंगे जब भारतीय अर्थव्यवस्था शानदार दौर से गुजर रही है.

अगर निवेश के लिए आप दुनिया भर में कहीं जाएंगे और पूछेंगे तो लोग भारत का नाम लेना ज्यादा पसंद करेंगे.

मारया: लेकिन हम पिछले कुछ दिनों में देख रहे हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था मंदी से गुजर रही है. ऐसे में भारत को दुनिया के सामने ग्लोबल इनवेस्टमेंट हॉटस्पास के तौर पर कैसे रख पाएंगे?

प्रभु: कहां आप गिरावट देख रही हैं? मैं आपको कुछ आंकड़े बताना चाहूंगा. देश में एक्सपोर्ट बढ़ रहा है. इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन बढ़ा है. व्यापार की विश्वसनीयता भी बढ़ी है. सर्विस और मैनुफैक्चरिंग दोनों में हम अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं. हम तो उस पर ध्यान देंगे जो नंबर हमें विश्व बैंक देगा. गिरावट कहां है? जब आप संरचनात्मक बदलाव लाते हैं तो अर्थव्यवस्था थोड़ी अव्यवस्थित हो जाती है. जब मैं व्यापारियों से बात करता हूं तो वह कहते हैं कि GST हमारे लिए अच्छा है. GST की वजह से तमाम ऐसे असंगठित क्षेत्र हैं जहां से टैक्स सरकार को नहीं मिलता था. GST की वजह से वह भी व्यवस्थित हो गए हैं. असंगठित क्षेत्रों का नियमन जरूरी था. अब सब कुछ ऑनलाइन होने की वजह व्यवस्था सुधरी है.

मारया: अगर मैं दावोस के बारे में थोड़ा और बात करूं तो पीएम मोदी इसे आकस्मिक तौर पर लीड कर रहे हैं. आप ऐसे में कैसे भारत में विदेश से निवेश को आकर्षित करेंगे?

प्रभु: हम बड़े स्तर पर निवेश लाएंगे. पूरी दुनिया भारत में इनवेस्टमेंट करना चाहती है. एफडीआई के नंबर्स पर आप ध्यान दीजिए.

ये नंबर्स सीधे तौर पर कहते हैं कि निवेश करने वालों के लिए भारत सबसे पसंदीदा जगह है. पहली बार हमने ईज ऑफ ट्रेडिंग में वह स्थान हासिल किया है जो पहले कभी नहीं था. पहली बार व्यापार संबंधित मुद्दों के लिए एक कॉमन प्लेटफॉर्म हमने गठित किया है. भारत का व्यापार बढ़ रहा है. इसलिए प्रधानमंत्री मोदी इन सारी बातों को वहां रखेंगे और मेरा यह दृढ़ विश्वास है कि भारत में व्यापार की सुगमता देखकर दुनिया भारत में निवेश करने की इच्छुक जरूर होगी.

मारया: आपने अभी नई इंडस्ट्रियल पॉलिसी की बात की. इससे लोगों की बहुत अधिक उम्मीदें हैं. ग्लोबल इनवेस्टर्स उस स्टेज को देख रहे हैं जब यह हकीकत में हो जाएगा. हम कब यह स्वीकार करेंगे कि निवेश के मुख्य क्षेत्र क्या होंगे?

प्रभु: देखिए आजादी के बाद ये सिर्फ तीसरी इंडस्ट्रियल पॉलिसी है. पहली बार इंडस्ट्रियल पॉलिसी 1956 में आई थी इसके बाद 1992 में और अब ये तीसरी है. पहली इंडस्ट्रियल पॉलिसी में पब्लिक सेक्टर्स चलाने की बात की गई थी.

1992 में इस पॉलिसी ने कुछ ऐसी चीज़ों को हटाने में मदद की जो काफी दिनों से अटकी पड़ी थी. इस वक्त हमलोग डिजिटल इकॉनमी के दौर में पहुंच गए हैं ऐसे वक्त में ये जरुरी है कि हम इस बात पर जोर दें कि बिजनेस करने में सरकार की तरफ से लोगों को कम अड़चने आए.

मैंने डिपार्टमेंट ऑफ इंडस्ट्रियल पॉलिसी और प्रमोशन यानी DIPP के तहत एक कमेटी बना दी है. DIPP के सचिव इस कमेटी के चेयरमैन हैं मैंने उन्हें कहा है कि वो सारी दिक्कतों को दूर करें जिससे कि लोग अपने तरीके से बिज़नेस कर सके. उन्हें श्रमिक कानून का पालन करना पड़ेगा साथ ही बिजनेस करने वालों को श्रमिकों के कल्याण के लिए कदम भी उठाने पड़ेंगे.हम नए उद्योग पर ध्यान दे रहे हैं. देखिए कई ऐसे उद्योग हैं जो अभी तक शुरू ही नहीं हुए हैं. ऐसे सेक्टर जिसकी अभी तक शुरूआत नहीं हुई है उसमें तरक्की की काफी संभावनाएं हैं. इसलिए हमें ऐसे सेक्टर्स पर ध्यान देना होगा.

मारया: जब आप नए इंडस्ट्रीज की बात कर रहे हैं तो वो कौन-कौन से सेक्टर्स हैं जिसे आप देख रहे हैं ?

प्रभु: ये सेकटर्स हैं ऊर्जा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जिनोमिक्स, लाइफ साइंस. ये ऐसे सेक्टर्स हैं जिसमें विकास की काफी संभावना हैं.

मारया: हमलोग भारत की विकास की बात करते हैं. लेकिन देश में इस वक्त रोजगार की भारी कमी है क्या इससे आप परेशान हैं ?

प्रभु: देखिए ये लोगों की गलतफहमी है. भारत में बड़े स्तर पर रोजगार पैदा हो रहे हैं.

मारया: लेकिन सर नौकरी है कहां?

प्रभु: आप जानते हैं कि इनवेस्टमेंट और नौकरी पैदा करने का सीधा संबंध है. अगर आप रेलवे में देखें तो पिछले तीन साल में 3 लाख 75 हज़ार करोड़ निवेश किया गया जबकि पिछले 70 सालों में सिर्फ 4 लाख करोड़ निवेश किया गया था. तो क्या बढ़ते इनवेस्टमेंट से नौकरियां नही पैदा हो रही है?

मारया: रोजगार को लेकर बार-बार सवाल उठ रहे हैं. आप लोगों ने कई कदम भी इसके लेकर उठाए हैं जैसे स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया. लेकिन जमीनी स्तर पर रोजगार को लेकर इसका असर नहीं दिख रहा है?

प्रभु: यहीं मैं भी कह रहा हूं. सर्विस सेक्टर में ढेर सारी नौकरियां पैदा हो रही है. लेकिन हमारे पास इसका कोई तरीका नहीं है कि हम सही-सही संख्या का आंकलन कर सकें. सिर्फ इन्फॉर्मेशन टेकनोलॉजी में रोजगार के सही संख्या का पता चल पा रहा है.

मारया: एप्पल भारत में प्लांट लगाना चाह रहा है. आपको लगता है कि ये जल्दी होगा?

प्रभु: देखिए इसको लेकर कोई ठोस प्रपोजल हमारे पास नहीं आया है. हाल में जब वो हम से  मिले थे तो मैंने कहा कि कि हमारे यहां मेक इन इंडिया पॉलिसी है. मोबाइल का यहां बड़ा बजार है. हमें उनके प्रपोजल का इंतजार है.

(साभार न्यूज18)

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