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नए आर्मी चीफ विपिन रावत की नियुक्ति पर कांग्रेस ने उठाए सवाल

कांग्रेस का कहना है कि दो सीनियर अधिकारियों की अनदेखी करके विपिन रावत को आर्मी चीफ बनाया गया है.

Updated On: Dec 18, 2016 03:07 PM IST

FP Staff

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नए आर्मी चीफ विपिन रावत की नियुक्ति पर कांग्रेस ने उठाए सवाल

लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत को अगला आर्मी चीफ बनाने पर सियासत में जंग छिड़ गई है. कांग्रेस ने आर्मी चीफ विपिन रावत के प्रमोशन पर सवाल उठाया है. कांग्रेस का आरोप है कि रावत को आर्मी चीफ बनाने के लिये दो सीनियर अफसरों की वरिष्ठता की अनदेखी की गई है. साथ ही कांग्रेस का कहना है कि मोदी सरकार ने सेना में चली आ रही सीनियर को चुनने की परंपरा का पालन नहीं किया है.

कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने ट्वीट करते हुए पूछा है कि आर्मी चीफ की नियुक्ति में वरिष्ठता का ख्याल क्यों नहीं रखा गया है ? लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी और लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद अली हारिज को नजरअंदाज कर रावत को क्यों तरजीह दी गई है?

लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत सितंबर 2016 में आर्मी के वाइस चीफ बने थे. जबकि पूर्वी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी सेना प्रमुख दलबीर सिंह के बाद सबसे वरिष्ठ हैं तो दक्षिणी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हारिज अगले सीनियर हैं.

सरकार की हर नियुक्ति में विवाद क्यों ?

कांग्रेस ने मोदी सरकार पर हमला करते हुए पूछा है कि आखिर उनकी हर नियुक्ति विवादों से भरी क्यों होती है? मनीष तिवारी ने कहा कि हर संस्थान के काम करने का अपना तरीका होता है, अधिकारियों की वरिष्ठता और वरिष्ठता के आधार पर काम का बंटवारा होता है. दुनिया में हर जगह ऐसे ही काम होता है. मनीष तिवारी ने कहा है कि बिना विपिन रावत की काबलियत पर सवाल उठाए ये सरकार से ये पूछा जाना चाहिए कि बाकी सीनियर अधिकारियों की अनदेखी करके उनकी नियुक्ति आर्मी चीफ के बतौर क्यों हुई.

मेरिट के आधार पर रावत को मिला प्रमोशन

जबकि सरकार का कहना है कि बिपिन रावत को मेरिट के आधार पर चुना गया है. जाहिर तौर पर सरकार के पास किसी भी आर्मी चीफ को चुनने का अधिकार है. हालांकि अब इस बात का इंतजार है कि सेना के भीतर इस फैसले से क्या प्रतिक्रिया आती है. लेफ्टिनेंट जनरल प्रवीण बख्शी और लेफ्टिनेंट पीएम हारिज फैसले को किस तरह से लेते हैं ?

इंदिरा शासन में भी हुआ था 'ऐसा ही प्रमोशन'

हालांकि अस्सी के दशक में इंदिरा गांधी के शासन के दौरान भी वरिष्ठता को दरकिनार कर आर्मी चीफ की नियुक्ति हुई थी. साल 1983 में जनरल ए.एस. विद्या को आर्मी चीफ चुने जाने पर उनके सीनियर लेफ्टिनेंट एस.के. सिन्हा ने विरोध जताया था. इस पर कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी का कहना है कि हर घटना और परिस्थिति का आधार अलग होता है.

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