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नोटबंदी: सड़क के बाद अब संसद में होगा बवाल

16 नवंबर से संसद सत्र शुरू है इसके पहले ही नोटबंदी के फैसले ने सरगर्मी बढ़ा दी है.

Updated On: Nov 20, 2016 02:48 PM IST

Amitesh Amitesh

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नोटबंदी: सड़क के बाद अब संसद में होगा बवाल

नोटबंदी पर फैसला ऐसे वक्त में हुआ है, जब संसद का शीतकालीन सत्र शुरू होने वाला है. 16 नवंबर से सत्र का आगाज है लेकिन एक हफ्ते पहले ही नोटबंदी पर लिए गए सख्त कदम ने शीतकालीन सत्र से पहले गरमी बढ़ा दी है.

माहौल में सरगर्मी है, तल्ख सियासी बयानों की, जो कि सरकार और विपक्ष के नेता देकर बढ़त बनाने की कोशिश में हैं. दूसरी तरफ इसी मुद्दे पर संसद में एकदूसरे से भिड़ने की रणनीति भी बनाई जा रही है.

सरकार भी अपने सहयोगियों के साथ रणनीति को अंतिम रूप देने में लगी है तो  विपक्ष भी मोर्चेबंदी की तैयारी में है. सड़क से लेकर संसद तक हर जगह विपक्ष की तरफ से कोशिश है कि एकजुट होकर सरकार को बैकफुट पर धकेला जाए.

प्रधानमंत्री ने खुद संभाला मोर्चा 

सरकार की तरफ से खुद मोर्चा संभाला है प्रधानमंत्री नरेंंद्र मोदी ने. बीजेपी और एनडीए नेताओं के साथ हुई बैठक में मोदी ने साफ संदेश दे दिया कि नोटबंदी के मसले पर खुलकर सरकार के फैसले का बचाव करना है और सरकार के पक्ष को मजबूती के साथ संसद के भीतर रखना है.

बीजेपी और एनडीए लीडर्स की बैठक के बाद संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार ने बताया ‘बैठक में प्रधानमंत्री की नोटबंदी की नीति की तारीफ हुई और एनडीए के घटक दलों ने इस पर उन्हें बधाई भी दी.’

जबकि, सूचना और प्रसारण मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा ‘देश का मूड पीएम के साथ है. सर्जिकल स्ट्राइक और डिमोनिटाइजेशन के मुद्दे पर देश सरकार के साथ है.’

वेंकैया ने टेंपररी पेन को लार्जर गेन बताया. सरकार को एनडीए के सहयोगी दलों से भी समर्थन मिला.

एलजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने एनडीए की बैठक के बाद बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के फैसले का सबने स्वागत किया और बधाई भी दी है.

शिवसेना और अकाली के रुख से परेशानी 

लेकिन, सरकार के लिए सबसे बड़ी चिंता है शिवसेना और अकाली दल का रुख. पहले से ही आंखे तरेर रही शिवसेना अब नोटबंदी के फैसले पर सरकार के सामने विरोधियों जैसा व्यवहार कर रही है.

शिवसेना सरकार के फैसले को आर्थिक गृहयुद्ध तक बता रही है. सरकार के लिए संसद के भीतर सहयोगियों का यह रुख परेशान कर सकता है. पंजाब में विधानसभा के चुनाव होने हैं, लिहाजा अकाली दल को नोटबंदी के साइड इफेक्ट का डर सता रहा है.

मजबूत घेरेबंदी को तैयार विपक्ष

दूसरी तरफ मोर्चेबंदी की तैयारी हो रही है विरोधियों की तरफ से भी. कांग्रेस, टीएमसी, जेडीयू और आरजेडी नेताओं ने अलग से बैठक कर नोटबंदी के मसले पर सरकार को घेरने की तैयारी की है.

इस मसले पर ममता बनर्जी को लेफ्ट से भी ऐतराज नहीं है. ममता अब केजरीवाल को भी साथ लाने की कवायद कर रही हैं.

The Speaker, Lok Sabha, Smt. Sumitra Mahajan chairing the All Party Meeting, in New Delhi on November 14, 2016.

विपक्ष की तरफ से मांग हो रही है नोटबंदी पर संसद में बहस कराने की. लोकसभा स्पीकर की तरफ से बुलाई गई सर्वदलीय बैठक के बाद लोकसभा में कांग्रेस संसदीय दल के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा ‘बैठक में डीमोनिटाइजेशन के चलते हो रही परेशानी पर चर्चा की मांग की गई. इसके अलावा जम्मू कश्मीर, सर्जिकल स्ट्राइक और वन रैंक वन पेंशन के मुद्दे पर भी चर्चा कराने की मांग की गई है.’

लेकिन इस मुद्दे पर खुद पर भरोसा रखने वाले मोदी की तरफ से बड़ी बहस की तैयारी हो रही है. सूत्रों के मुताबिक सरकार की कोशिश है कि इस पर बहस बड़ी हो, जिससे सबको अपना पक्ष रखने का मौका मिले और कालेधन और सर्जिकल स्ट्राइक से जुड़े हर पहलू पर चर्चा हो सके.

पांच राज्यों में विधानसभा के चुनाव जल्द होने हैं. खासतौर से यूपी और पंजाब में सभी बड़ी पार्टियों का स्टेक दांव पर लगा है. लिहाजा संसद के अगले सत्र में वो हर मुद्दे पर अपने-अपने हिसाब से सियासी बढ़त लेने की कोशिश करेंगे.

संसद के सत्र को लेकर बिसात बिछ चुकी है. सबने अपना मोहरा चलना शुरू कर दिया है. अब इस बार असल लड़ाई होगी, खुद का जनता का चौकीदार बनने के मोदी के भरोसे और जनता का सच्चा हितैषी बनकर मौजूदा दर्द पर मरहम लगाने की विपक्षी एकता के बीच.

कालेधन पर सर्जिकल स्ट्राइक कर मोदी इस लड़ाई को  ईमानदारी बनाम बेईमानी की लड़ाई बनाना चाहते हैं. अगर वो ऐसा कर गए तो ‘चक्रव्यूह’ से निकल पाएंगे. वरना विपक्षी हमलों से पार-पाना मुश्किल हो जाएगा.

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