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नरोदा गाम मामला: एसआईटी ने सौंपे 12 गवाहों के बयान

मामले की सुनवाई अंतिम चरण में है. मामले में बीजेपी की पूर्व नेता माया कोडनानी मुख्य आरोपियों में शामिल हैं.

FP Staff Updated On: Oct 28, 2017 11:46 AM IST

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नरोदा गाम मामला: एसआईटी ने सौंपे 12 गवाहों के बयान

विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने शुक्रवार को 2002 नरोदा गाम नरसंहार मामले की सुनवाई कर रही एक विशेष अदालत के सामने 12 लोगों की गवाही के कागजात सौंपे.

मामले की जांच कर रही एसआईटी की ओर से पेश हुए विशेष लोक अभियोजक सुरेश शाह ने एसआईटी न्यायाधीश पी बी देसाई के सामने 12 प्रत्यक्षदर्शियों की गवाही और बयान सौंपे. अभियोजन की तरफ से 30 अक्टूबर को दलीलों पर सुनवाई होगी.

मामले की सुनवाई अंतिम चरण में है. मामले में बीजेपी की पूर्व नेता माया कोडनानी मुख्य आरोपियों में शामिल हैं.

करीब 80 प्रत्यक्षदर्शियों में छह की गवाही बुधवार को अदालत को सौंपी गई जबकि 12 लोगों के बयान शुक्रवार को अदालत के सामने रखे गए. इसमें सभी लोग नरोदा गाम के मुस्लिम मोहल्ला के रहने वाले हैं.

क्या है मामला?

2002 में हुए गुजरात दंगों के दौरान 28 फरवरी को नरोदा गाम में 11 मुस्लिमों की हत्या कर दी गई. इस मामले में कुल 82 लोग मुकदमे का सामना कर रहे हैं. इस हत्या के पीछे माया कोडनानी के नेतृत्व होने की बात कही गई. अमित शाह ने पिछले महीने हुई सुनवाई में कहा था कि माया कोडनानी दंगों के वक्त राज्यसभा में थीं. वो विशेष अदालत में बचाव पक्ष के गवाह बनकर गए थे. कोडनानी पीएम नरेंद्र मोदी के काफी करीब मानी जाती हैं.

कौन हैं माया कोडनानी?

माया कोडनानी बीजेपी से तीन बार विधायक बन चुकी हैं और मोदी सरकार में मंत्री थी. माया कोडनानी गाइनोकॉलजिस्ट थीं. उनके राजनीतिक करियर की शुरआत आरएसएस से जुड़ गईं. अपनी सक्रियता और हाजिरजवाबी की वजह से वे बीजेपी में लोकप्रिय हुईं और आडवाणी के करीबी आ गईं. 1998 तक वो नरोदा से विधायक बन गईं. लेकिन 2002 के गुजरात दंगों में उनका नाम आ गया.

2002 में ही हुए गुजरात विधानसभा चुनाव में वो जीत गईं. 2007 के गुजरात विधानसभा चुनाव में भी माया कोडनानी फिर जीतीं और जल्द ही गुजरात सरकार में मंत्री भी बन गईं.

2009 में सुप्रीम कोर्ट की ओर से नियुक्त विशेष टीम ने उन्हें पूछताछ के लिए बुलाया. बाद में उनकी गिरफ्तारी हुआ और उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा. लेकिन जल्द ही वे जमानत पर रिहा भी हो गईं. इस दौरान वे विधानसभा जाती रहीं और उन पर मुकदमा भी चलता रहा. 29 अगस्त 2012 में आखिरकार कोर्ट ने उन्हें नरोदा गाम दंगों के मामले में दोषी करार दिया.

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