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राहुल के पार्टी अध्यक्ष बनने से क्यों है बीजेपी खुश!

ऐसा लगता है कि बीजेपी राहुल की ताजपोशी का पूरा आनंद उठा रही है, क्योंकि बीजेपी राहुल को अपनी सबसे बड़ी संपत्ति मानती है

Sanjay Singh Updated On: Dec 10, 2017 08:29 PM IST

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राहुल के पार्टी अध्यक्ष बनने से क्यों है बीजेपी खुश!

आखिरकार कांग्रेस पार्टी में न टाला जा सकने वाला फैसला हो ही गया. राहुल गांधी पार्टी के अध्यक्ष बनने जा रहे हैं. वो इस पद पर आसीन होने वाले नेहरू-गांधी परिवार की पांचवीं पीढ़ी से और खानदान के छठे सदस्य हैं.

एक प्रमुख राष्ट्रीय पार्टी में इस तरह से सत्ता और विशेषाधिकार हासिल करना शायद दुनिया में अद्वितीय है. खासकर वहां, जहां लोकतंत्र है. फिलहाल राहुल गांधी कांग्रेस उपाध्यक्ष के पद पर हैं. उनकी मां सोनिया गांधी पिछले 19 साल से कांग्रेस अध्यक्ष हैं. राहुल ने कांग्रेस अध्यक्ष पद पर नामांकन दाखिल करने के लिए सभी नियमों का पालन किया, ताकि सोनिया गांधी से सत्ता हस्तांतरण में कोई मुश्किल न आए. लेकिन मां और बेटे ने मिलकर स्वयं के वंशवादी परिवार के मानकों के हिसाब से कांग्रेस के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है.

कौन किसके सपोर्ट में?

न तो कांग्रेस और न ही राहुल गांधी को पार्टी पर शासन करने के प्रथम परिवार के आभासी दैवीय अधिकारों पर पछतावा है. अपने हालिया अमेरिका दौरे में कांग्रेस उपाध्यक्ष ने 'विफल शासक' के आरोपों के जवाब में कहा था कि 'भारत ऐसे ही (वंशवाद) चलता है.'

लेकिन कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने अतिउत्साह में नेहरू-गांधी परिवार के प्रति वफादारी का सार्वजनिक प्रदर्शन किया. उन्होंने अपनी बौद्धिकता से नेहरू-गांधी परिवार को मध्ययुगीन राजवंशों से अलग बताया. प्रधानमंत्री ने तुरंत इसकी तुलना 'औरंगजेब राज' से कर दी. मणिशंकर अय्यर का बयान इतना भारी पड़ा कि कांग्रेस के लिए राहुल की ताजपोशी का बचाव मुश्किल हो गया.

मणिशंकर अय्यर की इस तुलना के करीब 45 मिनट बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के धर्मपुर में एक रैली के लिए पहुंचे. उन्होंने वहां अय्यर और कांग्रेस की जमकर खबर ली: मणिशंकर अय्यर ने गर्व से कहा कि जहांगीर की जगह जब शाहजहां आए, क्या तब कोई चुनाव हुआ था? जब शाहजहां की जगह औरंगजेब आए, तब कोई चुनाव हुआ था. यह तो पहले से ही पता था कि जो बादशाह है, उसकी औलाद को ही सत्ता मिलेगी.

अपने ही बयान में फंसे मणिशंकर

'एक परिवार के प्रति निष्ठा दिखाने से कभी पीछे नहीं हटने वाले मणिशंकर अय्यर ने गर्व से कहा - जहांगीर की जगह जब शाहजहां आए, क्या तब कोई चुनाव हुआ था? जब शाहजहां की जगह औरंगज़ेब आए, तब कोई चुनाव हुआ था? यह तो पहले से ही पता था कि जो बादशाह है, उसकी औलाद को ही सत्ता मिलेगी.

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प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'इसका अर्थ है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मानते हैं कि कांग्रेस पार्टी नहीं बल्कि कुनबा है. उनका मानना है कि सत्ता में आने का मतलब है कि राजा के बेटे को सिंहासन मिलेगा. मैं कांग्रेस को औरंगजेब राज के लिए बधाई देता हूं.'

कांग्रेस के लिए औरंगजेब राज’ शब्द के कई मायने हैं, खासकर तब जब गुजरात में चुनाव प्रचार चरम पर है. कांग्रेस उपाध्यक्ष राज्य के कई हिंदू मंदिरों में पूजा-अर्चना कर रहे हैं और उनकी कोर टीम कांग्रेस के भावी अध्यक्ष के धर्म को लेकर दो विरोधाभासी घोषणाएं कर रही है. एक उन्हें 'गैर-हिंदू' बता रहा है तो दूसरा न सिर्फ हिंदू बल्कि 'जनेऊधारी' हिंदू घोषित कर रहा है.

भारत में बहुसंख्यक हिंदुओं या गैर-मुस्लिम आबादी के लिए औरंगजेब अब भी घृणित मुस्लिम शासक है. मोदी सरकार की सोच भी यही है. सरकार ने हाल ही में लुटियंस दिल्ली में औरंगजेब रोड का नाम बदल कर पूर्व राष्ट्रपति डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम कर दिया.

 'औरंगजेब राज' से कांग्रेस को नुकसान 

राहुल गांधी के अध्यक्ष होने पर “औरंगजेब राज” का हमला कांग्रेस को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाएगा. कांग्रेस के वंशवाद के लिए मोदी का यह नया शब्दबाण बीजेपी नेताओं और कार्यकर्ताओं के बहुत काम आएगा. वो इसके जरिए कांग्रेस पर हमला करेंगे और राहुल के जनेऊधारी हिंदू के दावे को कमजोर करेंगे.

मोदी ने कांग्रेस की मध्यकालीन वंशवादी विचार प्रक्रिया पर हमला करने के बाद दूसरे आरोप भी लगाए. उन्होंने कहा, 'कांग्रेस ने बीजेपी को मुस्लिम-विरोधी बताना क्यों बंद कर दिया? पहले वो अपनी धर्मनिरपेक्षता साबित करने के लिए हद पार कर जाते थे लेकिन अब हम सब देख रहे हैं कि वो इस चुनाव में क्या कर रहे हैं, कहां जा रहे हैं. दुर्भाग्य से मुस्लिम उनके असली स्वभाव को पहचानते हैं.'

हालांकि मोदी के राहुल गांधी और कांग्रेस के खिलाफ 'औरंगजेब राज' वाले बयान के सही या गलत होने पर मीडिया और लोगों में लंबे वक्त तक चर्चा होती रहेगी, लेकिन उन्होंने एक घंटे से भी कम समय में अपने मन मुताबिक न्यूज हेडलाइंस को बदल दिया. यह दिन की बड़ी खबरों और बहसों में शुमार हो गया जबकि कांग्रेस के हिसाब से मीडिया में सोनिया गांधी के 19 साल के लंबे कार्यकाल और राहुल गांधी के लिए भावी चुनौतियों पर चर्चा होनी चाहिए थी.

'औरंगजेब राज' बयान के दूसरे मायने भी हैं. इसका अर्थ यह भी है कि राहुल राज के बाद कांग्रेस पूरी तरह बिखर जाएगी. 17वीं शताब्दी में औरंगजेब ने भारत पर करीब 50 साल तक शासन किया लेकिन जब उसने गद्दी छोड़ी, तब तक मुगल सल्तनत टूटने लगी थी.

कांग्रेस के घमंड का क्या होगा असर?

कांग्रेस प्रवक्ता राजीव त्यागी ने पिछले दिनों घमंड के साथ दावा किया था कि राहुल गांधी सिर्फ एक कार्यकाल के लिए अध्यक्ष नहीं बन रहे हैं, वो अगले 50 साल यानी कि जिंदगी भर इस पद पर रहेंगे.

राहुल गांधी का दुर्भाग्य यह है कि वो जिस वक्त अध्यक्ष बन रहे हैं, कांग्रेस के खत्म होने की प्रक्रिया तेज हो चुकी है. लोक सभा में कांग्रेस पार्टी के महज 44 सांसद हैं और एक के बाद एक विधान सभा चुनावों में उनकी हार हो रही है.

CHIEF MINISTER OF GUJARAT FLASHED THE VICTORY SIGN DURING A MARCH INFAGHVAL.

कांग्रेस के पास बड़े राज्य के नाम पर सिर्फ कर्नाटक में सरकार है. वहां भी अगले छह महीने में चुनाव होने हैं. देशभर में कई वरिष्ठ नेता पार्टी छोड़ रहे हैं. कुछ महीने पहले कांग्रेस को पंजाब में जीत मिली लेकिन इसका श्रेय राहुल गांधी की जगह स्थानीय नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह के खाते में गया.

कांग्रेस पर मोदी के आरोप इसलिए फिट हैं कि जयराम रमेश जैसे नेताओं के 'अस्तित्व का संकट' चेतावनी के बावजूद पार्टी राहुल गांधी की विफलताओं को मानने से इनकार कर रही है और उनकी ताजपोशी की तैयारी हो रही है.

कभी राहुल गांधी के खास रहे और पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने पीटीआई को दिए इंटरव्यू में कहा था, 'सल्तनत खत्म हो गई है, लेकिन हमारा व्यवहार सुल्तानों जैसा है. हमें अपनी सोच, प्रस्तुति और संवाद के तरीकों को पूरी तरह बदलना होगा. मेरा मानना है कि कांग्रेस के लिए अब भी बहुत सद्भाव, समर्थन है, लेकिन लोग नई कांग्रेस देखना चाहते हैं. वो पुराने मंत्र, पुराने नारे नहीं सुनना चाहते. हमें मानना होगा कि यह बड़ी चुनौती है.'

ऐसा लगता है कि बीजेपी राहुल की ताजपोशी का पूरा आनंद उठा रही है, क्योंकि बीजेपी राहुल को अपनी सबसे बड़ी संपत्ति मानती है. अमित शाह कई मौकों पर कह चुके हैं कि राहुल गांधी द्वारा गुजरात में जोर-शोर से प्रचार करने से 150 सीट जीतने की उनकी उम्मीद वास्तविकता में बदल जाएगी.

Gujarat Election Results 2017

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