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हताश-निराश लोगों का गठजोड़ कभी महागठबंधन नहीं हो सकता: PM मोदी

प्रधानमंत्री ने कहा, कोई भी महागठबंधन हो, आप चाहे जिस नाम से इसे पुकारें, वह लोगों का गठबंधन नहीं करा सकता. भारत के मतदाता राष्ट्र हित को हमेशा अपने दिमाग में सर्वोपरि रखते हैं

Updated On: Aug 12, 2018 01:53 PM IST

FP Staff

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हताश-निराश लोगों का गठजोड़ कभी महागठबंधन नहीं हो सकता: PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को एक्सक्लूसिव इंटरव्यू दिया. प्रधानमंत्री ने हर उन पहलुओं पर अपनी बात रखी, जिसे लेकर बीते कुछ महीनों-वर्षों में काफी हो-हंगामा हुआ है.

प्रधानमंत्री ने विपक्ष के एक-एक सवालों का जवाब दिया. बात चाहे राफेल डील की हो या मॉब लिंचिंग की. जीएसटी और एनआरसी तक पर पीएम ने अपनी सरकार और पार्टी का रुख साफ किया.

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टाइम्स ऑफ इंडिया ने पीएम मोदी से पूछा कि विपक्ष किसी महागठबंधन के बारे में सोच रहा है. क्या इससे बीजेपी की चुनावी संभावनाओं पर कोई फर्क पड़ेगा?

इसके जवाब में पीएम ने कहा, इस बात को कोई नहीं नकार सकता कि जब से यह सरकार बनी है तब से विश्व बिरादरी का भारत के प्रति नजरिया बदला है. 30 साल बाद केंद्र में कोई काम करने वाली और स्थिर सरकार बनी है. गठबंधन सरकार और दबाव की राजनीति को लेकर लोगों का अनुभव काफी कड़वा है.

प्रधानमंत्री ने कहा, कोई भी महागठबंधन हो, आप चाहे जिस नाम से इसे पुकारें, वह लोगों का गठबंधन नहीं करा सकता. भारत के मतदाता राष्ट्र हित को हमेशा अपने दिमाग में सर्वोपरि रखते हैं. मुझे पूरा भरोसा है कि वे लोग किसी ऐसे समूह के साथ मतों का समझौता नहीं करेंगे जिनका बस एक ही सिद्धांत है कि कैसे मोदी को बाहर करना है.

पीएम ने कहा, हताश-निराश लोगों का वैसा कोई भी गठजोड़ जिसका कोई सिद्धांत न हो वह 'महागठबंधन' नहीं हो सकता बल्कि इसे सियासी जोखिम (पॉलिटिकल एडवेंचरिजम) कहेंगे. यह एक तरह से नाकाम विचारधारा है जो कभी कामयाब नहीं हो पाई. इतिहास गवाह है कि ऐसे 'पॉलिटिकल एडवेंचरिजम' 1979, 1990 और 1996 में औंधे मुंह गिरे हैं. लोगों को सशक्त और फैसले लेने वाली सरकार की जरूरत है.

प्रधानमंत्री ने न्यूज एजेंसी एएनआई को भी इंटरव्यू दिया है. महागठबंधन के सवाल पर पीएम ने कहा, महागठबंधन का असली चरित्र क्या है, पहले इसे समझना जरूरी है. महागठबंधन खुद के अस्तित्व के लिए है, न कि किसी वैचारिक सहयोग के लिए. यह व्यक्तिगत महात्वाकांक्षा के लिए है, न कि लोगों की उम्मीदों के लिए. महागठबंधन वंशवाद के लिए है, न कि विकास के लिए. यह गठजोड़ दिमागों या विचारों का मिलन नहीं है बल्कि मौकापरस्ती के लिए है. सवाल बस एक ही उठता है कि क्या यह चुनाव से पहले बिखर जाएगा या बाद में.

शिवसेना और जेडीयू के बारे में भी एक सवाल पूछा गया. अविश्वास प्रस्ताव के दौरान शिवसेना जहां वोटिंग से गायब रही तो जेडीयू ने कुछ विवादित बयान दिए. इसपर प्रधानमंत्री ने कहा, हाल में संपन्न राज्यसभा के उप-सभापति चुनाव ने मेरे खयाल से आलोचकों के मुंह बंद कर दिए हैं. हमारे विरोधी जो हमेशा कुछ नया खोजते रहते हैं, उन्हें निराशा के अलावा और कुछ नहीं मिलने वाला.

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