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स्वामी विवेकानंद की 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' थी विचारधारा: PM मोदी

प्रधानमंत्री ने नमो एप पर स्वामी विवेकानंद को याद करते हुए कहा कि उन्होंने दुनिया में वैदिक दर्शन को फैलाया

| September 11, 2018, 04:24 PM IST

FP Staff

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Sep 11, 2018

  • 16:14(IST)

    स्वामी विवेकानंद जी पूरी दृढ़ता से मानते थे कि भारत का भविष्य युवाओं के कंधे पर है. मुझे खुशी है कि आज का युवा वर्ग एक मिशन के तहत आगे बढ़ रहा है: पीएम मोदी

  • 16:01(IST)

    विवेकानंद जी ने अपने ज्ञान से दुनिया में वैदिक दर्शन को फैलाया: नरेंद्र मोदी

  • 16:00(IST)

    पीएम मोदी इस वक्त नमो एप के जरिए तमिलनाडु के कोयंबटूर के रामकृष्ण मठ में इस कार्यक्रम में अपने विचार रख रहे हैं

  • 15:59(IST)
  • 15:57(IST)

    स्वामी विवेकानंद के अमेरिका के शिकागो में दिए भाषण के 125 वर्ष पूरे होने के अवसर पर इस वक्त संबोधन कर रहे हैं 

स्वामी विवेकानंद की 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' थी विचारधारा: PM मोदी
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स्वामी विवेकानंद के अमेरिका के शिकागो शहर में दिए भाषण के 125 साल पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को एक कार्यक्रम को संबोधित किया. पीएम मोदी ने नमो एप के जरिए तमिलनाडु के कोयंबटूर के रामकृष्ण मठ में इस कार्यक्रम में अपने विचार रखे.

प्रधानमंत्री ने कहा कि विवेकानंद जी ने अपने ज्ञान से दुनिया में वैदिक दर्शन को फैलाया. उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद जी पूरी दृढ़ता से मानते थे कि भारत का भविष्य युवाओं के कंधे पर है. मुझे खुशी है कि आज का युवा वर्ग एक मिशन के तहत आगे बढ़ रहा है.

पीएम मोदी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की विचारधारा में यकीन रखते थे.

विवेकानंद ने इस ऐतिहासिक भाषण में क्या कहा था?

11 सितंबर, 1893 के दिन शिकागो में आयोजित विश्व धर्म सम्मेलन में स्वामी विवेकानंद ने 'सिस्टर्स एंड ब्रदर्स ऑफ अमेरिका'... शब्द से अपने भाषण की शुरुआत की तो पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा. यह पहला मौका था जब पश्चिम का पूरब से सामना हो रहा था. पश्चिमी देश भारत की संस्कृति, सभ्यता और दर्शन से पहली बार रूबरू हो रहे थे. स्वामी विवेकानंद के इस बहुचर्चित भाषण ने भारत के बारे में पश्चिम की भ्रांतियों को काफी हद तक बदल दिया.

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स्वामी विवेकानंद

उन्होंने अपने संबोधन में सांप्रदायिकता, धार्मिक कट्टरता और हिंसा का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया था. उन्होंने कहा कि सांप्रदायिकता और कट्टरता ने लंबे समय से पृथ्वी को अपने शिकंजे में जकड़ रखा है और इसने धरती को हिंसा से भर दिया है. अनेक बार यह धरती खून से लाल हुई है. कितनी ही सभ्यताओं का विनाश हुआ है और न जाने कितने देश नष्ट हुए हैं.

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