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पीएम मोदी को पी चिदंबरम के सवालों का जवाब जरूर देना चाहिए

अगर विचारधारा सिर्फ हिंदुत्व है तो यकीन जानिए हम जितना सोच रहे हैं उससे भी बड़ी मुश्किल में फंस गए हैं

Updated On: Nov 06, 2017 12:12 PM IST

Aakar Patel

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पीएम मोदी को पी चिदंबरम के सवालों का जवाब जरूर देना चाहिए

क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोई विचारधारा है? प्रधानमंत्री की पार्टी ने अपनी वेबसाइट पर अपनी विचारधारा हिंदुत्व लिखी है. ऐसे में ये सवाल पूछना बड़ा अजीब है. लेकिन ये सवाल पूछना जरूरी है. क्योंकि एक बड़े राजनेता ने कहा है कि बीजेपी की कोई विचारधारा नहीं है.

एक कारोबारी अखबार ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम से पूछा था, 'आप बीजेपी की सरकार को कल्याणकारी जिम्मेदारी निभाने वाली, सेहत और शिक्षा देने वाली और लोगों को बराबरी का अधिकार देने वाली सरकार मानते हैं या फिर खुले व्यापार को बढ़ावा देने वाली समझते हैं?'

ये कोई आसान सवाल नहीं है. खुले व्यापार को बढ़ावा देने का मतलब है सरकार आर्थिक मामलों में दखल नहीं देती. निजी कंपनियों और लोगों को अर्थव्यवस्था को चलाने देती है. ये कुछ वैसा ही समाज होता है, जिसके बारे में बीसवीं सदी के मशहूर रूसी लेखक अयान रैंड ने लिखा था. एक ऐसा देश जहां पूंजीवादी लोग आपसी मुकाबले से दुनिया को बेहतर करने की कोशिश करते हैं. नकारा सरकारें उनके काम में दखल नहीं देतीं. यहां तक कि शिक्षा और सेहत जैसे मामले भी निजी हाथों में सौंप दिए जाते हैं. आम लोग अपना खयाल खुद रखते हैं.

Narendra Modi

2014 के आम चुनाव के प्रचार के दौरान कहा गया कि मोदी ऐसी ही सरकार चलाने का वादा कर रहे हैं. ऐसी सरकार जो कांग्रेस की समाजवादी सोच से अलग होगी. लेकिन पिछले तीन साल में हम ने देखा है कि यूपीए सरकार की समाजवादी योजनाएं जैसे मनरेगा बदस्तूर जारी हैं. मोदी ने इन योजनाओं को बंद करने का वादा किया था. लेकिन उनकी सरकार ने इन योजनाओं का फंड भी बढ़ा दिया. आज की तारीख़ में अर्थव्यवस्था को लेकर मनमोहन सिंह सरकार और मोदी सरकार में कोई खास फर्क नहीं दिखता.

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चिदंबरम ने उस सवाल के जवाब में कहा कि, 'बीजेपी के पास अपनी कोई आर्थिक विचारधारा या दर्शन नहीं है. बीजेपी की विचारधारा सिर्फ हिंदुत्व और बहुसंख्यक समर्थक सरकार है. किसी भी सरकार के पास अपना मूल आर्थिक विचार या दर्शन होना चाहिए, जिससे ये पता चले कि वो वामपंथी है या दक्षिणपंथी. लेकिन पार्टी के तौर पर बीजेपी ने अपनी आर्थिक विचारधारा को कभी इतना खुलकर नहीं रखा कि पता चल सके कि वो वामपंथी सोच वाली है या दक्षिणपंथी. यही वजह है कि वो हर दिशा में भटक रही है'.

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किसी विरोधी का बीजेपी पर ये हमला जायज लग सकता है. हालांकि मैं कांग्रेस का समर्थक नहीं हूं, लेकिन यहां ये समझना जरूरी है कि चिदंबरम का इशारा किस तरफ है. चिदंबरम ने कहा, 'कांग्रेस की सरकार की सोच के बारे में कहें तो मेरा मानना है कि हमारी सरकार में कई गड़बड़ियां थीं. योजनाओं को लागू करने में कमी रह गई. लेकिन कांग्रेस ने तीन चार मुद्दों पर हमेशा जोर बनाए रखा. इसे अर्थव्यवस्था को लेकर कांग्रेस की मूल विचारधारा कह सकते हैं. पहली बात तो ये कि हमने तय किया कि किसी की मौत भूख से नहीं होनी चाहिए. इसीलिए हम खाद्य सुरक्षा कानून और मनरेगा योजना लेकर आए'.

चिदंबरम ने जिन अन्य बातों पर कांग्रेस के जोर देने की बात कही वो गर्भवती महिलाओं, बच्चों को दूध पिलाने वाली महिलाओं की सेहत का खयाल रखना, नवजात और पांच साल से कम बच्चों की सेहत का खयाल रखना और टीकाकरण अभियान प्रमुख हैं. इसके अलावा राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य योजना पर भी मनमोहन सरकार का जोर रहा. चिदंबरम का कहना है कि 'इन बातों से कांग्रेस की बुनियादी सोच साफ जाहिर होती है'. चिदंबरम के मुताबिक मोदी सरकार में ऐसे मुद्दों की बुनियादी सोच साफ नही दिखती.

Gorakhpur Child Death

इनसेफेलाइटिस की वजह से हुई बच्चों की मौत के सदमे में रोती-बिलखती उनकी माताएं

गोरखपुर में 282 बच्चों की मौत का जिक्र करते हुए चिदंबरम ने कहा कि मोदी सरकार पर इसका कोई असर नहीं दिखा. यहां तक कि उत्तर प्रदेश की सरकार भी इतने बड़े पैमाने पर लोगों की मौत से बेपरवाह दिखी. किसी का दिल नहीं पिघला. उनके लिए दीवाली पर अयोध्या में दीप जलाना या मंदिर बनाने जैसी हिंदुत्व की बातें, बच्चों की मौत या भुखमरी से ज्यादा अहम हैं.

यहां सवाल ये नहीं है कि यूपीए सरकार एनडीए सरकार से बेहतर थी या नहीं. चिदंबरम ने अपनी सरकार की खामियां मानी हैं. सवाल ये है कि क्या बीजेपी और खास कर प्रधानमंत्री मोदी की कोई ऐसी विचारधारा है, कोई ऐसी मंजिल है जिसे हासिल करने के लिए ही वो फैसले ले रहे हों. या फिर चिदंबरम की ये बात सही है कि बीजेपी की कोई बुनियादी या केंद्रीय विचारधारा ही नहीं है. इसीलिए मोदी सरकार के आर्थिक कदम एकदम भटके हुए लग रहे हैं.

मेक इन इंडिया, स्वच्छ भारत, नोटबंदी, सर्जिकल स्ट्राइक, बुलेट ट्रेन, स्टार्टअप इंडिया, जीएसटी. ये सभी कदम किसी बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए उठाए गए कदम हैं या फिर इन्हें मिलाकर नहीं देखना चाहिए. क्योंकि ये सभी फैसले अलग वक्त और जरूरत के लिए लिए गए? ये वो सवाल है जो हम सभी को और खास तौर से बीजेपी को वोट देने वालों को उठाना चाहिए.

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कांग्रेस का कहना है कि उसने कुछ खास चुनौतियों से निपटने की कोशिश की. कांग्रेस हमें ये यकीन दिलाने में नाकाम रही कि वो इन चुनौतियों से सही तरीके से निपट सकती है. भले ही उनका इरादा नेक रहा हो. ये बात अब पुरानी हो गई.

chidambaram_reuters

अब बारी बीजेपी की है. उसे ये बताना चाहिए कि वो क्या करने की कोशिश कर रही है. किस बड़ी योजना पर काम हो रहा है? निजी तौर पर मै ये उम्मीद करता हूं कि चिदंबरम की बात गलत साबित हो. एनडीए सरकार कुछ खास मुद्दों पर ठोस दिशा में आगे बढ़ रही है. उसके सामने अगले पांच या दस साल के लक्ष्य साफ हैं.

क्योंकि अगर विचारधारा सिर्फ हिंदुत्व है, जिसका मतलब है जानवरों की हत्या, मंदिर मुद्दा, लव जिहाद के साथ कुछ-कुछ आर्थिक और विदेश नीति से जुड़े कदम उठाना. तो यकीन जानिए हम जितना सोच रहे हैं उससे भी बड़ी मुश्किल में फंस गए हैं.

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