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मन की बात के तीन साल, सफाई को मन में बैठाने की सीख

प्रधानमंत्री ने इस बार मन की बात में स्वच्छता और टूरिज्म की बात की

Updated On: Sep 26, 2017 11:26 AM IST

Reema Parashar

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मन की बात के तीन साल, सफाई को मन में बैठाने की सीख

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अपने लोकप्रिय कार्यक्रम मन की बात को लेकर विरोधियों के उठते सवालों का करारा जवाब दिया. मन की बात के तीन साल पूरे होने पर मोदी ने कहा की उन्होंने इस कार्यक्रम को हमेशा राजनीति से अलग रखा है और इसके जरिए समाज के हर तबके एकजुट करने में भूमिका निभाई है.

मोदी ने कार्यक्रम के 36वें संस्करण में कहा, 'मन की बात के लिए मुझे बहुत ज्यादा प्रतिक्रियाएं मिलती है. हमने इस कार्यक्रम के तीन साल पूरे कर लिए हैं. स्वभाविक रूप से मैं सभी का उल्लेख नहीं कर सकता, लेकिन इससे मिलने वाली प्रतिक्रियाओं से हमें सरकार चलाने में मदद मिलती है.' उन्होंने कहा कि उन्हें ईमेल, नरेंद्र मोदी एेप, फोन और अन्य माध्यमों से जानकारी का खजाना मिलता है, जिससे उन्हें पता चलता है कि देश में क्या हो रहा है.

मन की बात को लोगों से मिले समर्थन का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री ने नवरात्रि में मां दुर्गा को याद किया और साथ ही भारत में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लोगों से विदेश की बजाय अपने देश को जानने की सीख दे डाली.

उन्होंने कहा कि देश के टूरिज्‍म को बढ़ावा देने के लिए आपके राज्य के सात उत्तम टूरिस्‍ट डेस्टिनेशन कौन से हो सकते हैं, इसकी जानकारी आपको होनी चाहिए. मोदी ने कहा महात्मा गांधी, लोकमान्य तिलक, स्वामी विवेकानंद, अब्दुल कलाम जी ने जब भारत-भ्रमण किया तब उनको उसके लिए जीने-मरने की नई प्रेरणा मिली. हम लोग बहुत स्वाभाविक रूप से कहते हैं, 'विविधता में एकता, भारत की विशेषता.' हम अपने देश को तो देखते नहीं हैं, देश की विविधताओं को जानते नहीं हैं लेकिन विदेशों में ही टूर करना पसंद करते हैं.

प्रधानमंत्री के संदेश में स्वच्छता पर विशेष जोर रहा. मोदी ने कहा  पिछले महीने ‘मन की बात’ में ही हम सब ने एक संकल्प किया था और हमने तय किया था कि गांधी-जयंती से पहले 15 दिन देश-भर में स्वच्छता का उत्सव मनायेंगे. स्वच्छता से जन-मन को जोड़ेंगे.

हमारे आदरणीय राष्ट्रपति जी ने इस कार्य का आरंभ किया और देश जुड़ गया. बाल-वृद्ध, पुरुष हो, स्त्री हो, शहर हो, गांव हो, हर कोई आज इस स्वच्छता-अभियान का हिस्सा बन गया है. और जब मैं कहता हूं ‘संकल्प से सिद्धि’, ये स्वच्छता-अभियान एक संकल्प-सिद्धि की ओर कैसे आगे बढ़ रहा है हम अपनी आंखों के सामने देख रहे हैं. हर कोई इसको स्वीकारता है, सहयोग करता है और साकार करने के लिए कोई न कोई योगदान देता है.

स्वच्छता की हकीकत क्या है

स्वच्छता का नारा मोदी ने अपने वाराणसी दौरे के दौरान भी दिया और उससे पहले खुद अस्सी घाट की सफाई करके लोगों को इससे जुड़ने का संकेत दिया. लेकिन प्रधानमंत्री के नोबेल इनीशिएटिव को अमल में लाना तीन साल बाद भी आसान नहीं है.

उनके अपने क्षेत्र वाराणसी में ही मोदी के दौरे से ठीक पहले शहर को चमका दिया जाता है. घाटों की सफाई हो जाती है लेकिन मोदी के जाते ही आंखें उस दृश्य के लिए तरस जाती है. दरसल तमाम प्रचार के बाद भी लोगों में जागरूकता और इच्छा शक्ति की कमी ने सफाई अभियान को अब तक वो मुकाम नहीं दिया है जहां तक उसे पहुंचना था.

मोदी के गोद लिए गांव जयापुर में जरूर कुछ संस्थाओं ने खुले में शौच को काफी हद तक खत्म कर दिया है लेकिन शेष भारत की तस्वीर अब भी बदलनी बाकी है.

ऐसा भी नहीं है कि लोग आगे नहीं आए हैं लेकिन जरूरत नौकरशाहों को जगाने की है जो योजनाओं को फाइलों से बाहर निकलने नहीं देते. प्रधानमंत्री ने श्रीनगर के बिलाल का जिक्र किया जिसने सफाई अभियान को सफल बनाकर दिखाया है. बिलाल की तरह और लोगों को भी जब तक खुद स्वच्छता का महत्व दिखाई नहीं देगा तब तक ये अभियान बस एक स्लोगन की तरह ही याद किया जाता  रहेगा.

( लेखिका स्वतंत्र पत्रकार हैं )

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