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NRC पर PM मोदी: 'गृह युद्ध' की बात वो कर रहे हैं जिन्हें लोकतंत्र में भरोसा नहीं

पीएम ने कहा, जिन्हें खुद पर से भरोसा उठ गया है, जिन्हें वोट खोने का डर है और जिन्हें लोकतांत्रितक संस्थाओं में विश्वास नहीं है, वे ही 'गृह युद्ध', 'खून-खराबा' और 'देश के टुकड़े-टुकड़े' जैसे शब्द उपयोग कर रहे हैं

FP Staff Updated On: Aug 12, 2018 11:16 AM IST

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NRC पर PM मोदी: 'गृह युद्ध' की बात वो कर रहे हैं जिन्हें लोकतंत्र में भरोसा नहीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को समाचार एजेंसी एएनआई को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में विपक्ष के कई आरोपों का जवाब दिया. बेरोजगारी, आर्थिकी, महिला सशक्तीकरण, एनआरसी और जीएसटी से लेकर भारत-पाक संबंधों पर भी पीएम ने अपनी राय रखी.

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एएनआई ने पीएम मोदी से पूछा, सुप्रीम कोर्ट की ओर से निर्देशित एनआरसी पर काफी विवाद हो रहा है. जैसा कि ममता बनर्जी कह रही हैं कि इससे 'गृह युद्ध' छिड़ जाएगा. इस पर आपका क्या विचार है?

इस पर प्रधानमंत्री ने कहा, जिन्हें खुद पर से भरोसा उठ गया है, जिन्हें वोट खोने का डर है और जिन्हें लोकतांत्रितक संस्थाओं में विश्वास नहीं है, वे ही 'गृह युद्ध', 'खून-खराबा' और 'देश के टुकड़े-टुकड़े' जैसे शब्द उपयोग कर रहे हैं. इनकी बातों से साफ है कि ये लोग देश की आत्मा से कट चुके हैं.

पीएम ने कहा, जहां तक ममता जी के स्टैंड की बात है, तो उन्हें 2005 में संसद में कही अपनी बात याद करनी चाहिए. क्या वो ममता जी सही थीं आज वाली ममता जी सही हैं?

प्रधानमंत्री ने कहा, कांग्रेस भी एनआरसी पर राजनीति कर रही है. एनआरसी की जड़ें तीन दशक पुरानी हैं. श्री राजीव गांधी को लोगों के दबाव के आगे झुकना पड़ा था और असम संधि करना पड़ी थी. तब से असम के लोग कांग्रेस को वोट कर रहे हैं लेकिन कांग्रेस ने उनके बारे में नहीं सोचा और वहां के लोगों को भरमाती रही.

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पीएम ने कहा, कांग्रेस को इसकी (एनआरसी) दिक्कतों के बारे में जानकारी थी लेकिन उसने इसे दशकों तक बढ़ने दिया क्योंकि उनकी नजरें वोट बैंक की राजनीति पर थीं. मैं लोगों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि भारत के किसी भी नागरिक को देश नहीं छोड़ना पड़ेगा. प्रक्रिया के मुताबिक जो भी कदम होंगे, लोगों को अपनी नागरिक सिद्ध करने का पूरा मौका दिया जाएगा.

प्रधानमंत्री ने कहा, एनआरसी हमारा वादा था जिसे माननीय सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देश में पूरा किया जा रहा है. यह राजनीति के लिए नहीं है बल्कि लोगों के लिए है. अगर कोई इसपर सियासत कर रहा है, तो यह काफी दुर्भाग्य की बात है. राजनीति में हमारा फर्ज बनता है कि हम आम लोगों की इच्छाओं के अनुरूप काम करें और इसीलिए हमें लोगों ने जनादेश भी दिया है.

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