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कर्नाटक में कामदार और नामदार के नए फॉर्मूले के साथ पीएम ने कई निशाने साधे

बीजेपी ने मोदी से उम्मीद बांधी है कि वे पार्टी के पक्ष में मौहाल को मोड़ने में कामयाब होंगे

Updated On: May 02, 2018 06:54 PM IST

Sanjay Singh

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कर्नाटक में कामदार और नामदार के नए फॉर्मूले के साथ पीएम ने कई निशाने साधे

बीजेपी के लिए अपनी पहली चुनावी रैली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के ट्वीट- ‘एक और झूठ’ का इस्तेमाल कुछ यों किया कि बहस का रुख ही मुड़ गया है. राहुल गांधी ने इस ट्वीट के जरिए केंद्र सरकार के इस दावे का मजाक उड़ाया था कि भारत के हर गांव तक बिजली पहुंचा दी गई है. प्रधानमंत्री ने इस ट्वीट के सहारे नामदार बनाम कामदार( वह व्यक्ति जिसकी पहचान उसके खानदान के कारण हो बनाम वह व्यक्ति जिसे उसके काम की वजह से जाना जाय) की बहस खड़ी कर दी है.

तंज के अपने बेहतरीन तेवर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसद में 15 मिनट बहस तक बहस करने के राहुल गांधी की चुनौती को स्वीकार किया और इसके जवाब में अपनी तरफ से एक नई चुनौती पेश कर दी कि दम हो तो राहुल अपनी चुनावी रैली में कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की उपलब्धियों के बारे में किसी भी भाषा में(हिन्दी, अंग्रेजी या फिर अपनी मां की मातृभाषा इतालवी में ही सही) बिना कागज पढ़े बोलकर दिखायें या फिर वे एम. विश्वेश्वरैया का नाम ही पांच दफे बोलकर दिखला दें.

सुनने में आया है कि अप्रैल महीने में राज्यसभा के सांसद राजीव चंद्रशेखर ने एक क्लिप अपलोड किया था जिसमें राहुल, एम. विश्वेश्वरैया के नाम का गलत उच्चारण कर रहे हैं. इस क्लिप के अपलोड होने पर सूबे की बीजेपी इकाई ने एक कॉमिक पोस्ट लगायी जिसमें गांधी-परिवार के इस चश्म-ओ-चिराग का मजाक बनाया गया था.

Congress President Rahul Gandhi in Mangaluru

मोदी जानते हैं कि अगर वे खानदानी शाहाना सियासत- मिसाल के लिए राहुल गांधी और उन जैसों की कर्नाटक तथा अन्य जगहों पर नेतृत्व- के खिलाफ आम लोगों की भावनाओं को उभार सके तो फिर वे चुनावी बिसात पलट सकते हैं.

ऐसे में, किसी प्रधानमंत्री के लिए इससे बेहतर तरीका भला और क्या हो सकता है कि वह अपनी सरकार के दावे का इस्तेमाल करते हुए कहे कि लोगों को बुनियादी सेवाएं किस हद तक मुहैया करायी गई हैं. वह बताए कि आज देश का हर गांव बिजली से रोशन है. वे गांव भी जो आजादी के सत्तर सालों बाद अंधेरे में रहने को मजबूर थे.

मुमकिन है कि दूर-दराज के कुछ गांवों में अभी बिजली ना पहुंची हो. वहां बिजली के खंभे गड़े हो सकते हैं लेकिन मुमकिन है कि उनपर बिजली के तार ना लगे हों. यह संभव है कि ना बिजली के पोल लगे हों और ना ही तार या फिर ये दोनों लगे भी हो सकते हैं. लेकिन अब सरकार का दावा कम से कम लोगों के सामने परीक्षा के लिए तो आ गया है. परीक्षा होगी तो सरकार को अपने दावे के समर्थन में कुछ ना कुछ कहना होगा. सो, यह नई शुरुआत है और जाहिराना तौर पर मोदी चाहते हैं कि पार्टी इस गौरव-भाव की साक्षी बने और चुनावी उपलब्धियां बटोरे.

कर्नाटक में 12 मई के दिन होने जा रहे चुनाव में बीजेपी कांग्रेस को पटखनी देने की कोशिश कर रही है. ऐसे में यह स्वाभाविक ही है कि मोदी राहुल गांधी और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को सीधे निशाने पर लें. उन्होंने यही किया और कहा,' कांग्रेस और उसके नये अध्यक्ष ने हमारी आलोचना करने के अपने जोश में शालीनता की सारी हदें पार कर दी हैं. अच्छा होता जो उन्होंने हमारे उन मजदूर भाइयों के लिए सराहना के दो शब्द कहे होते जिन्होंने मुश्किल हालात में अपने कंधे पर ट्रांसफर्मर और बिजली के खंभे लादकर गांव-गांव तक बिजली पहुंचाने का काम पूरा किया है लेकिन वो नामदार हैं, कामदार की परवाह नहीं कर सकते.' मोदी ने अपनी इन बातों के सिलसिले में यह भी कहा कि इसी कारण लोग राहुल गांधी से ऐसी उम्मीद नहीं रखते.

इसके बाद मोदी ने बिसात पर ‘हीरो’ और ‘विक्टिम’ (पीड़ित) का पत्ता एकसाथ खेलते हुए कहा, 'जो लोग दिन-रात हमारे ऊपर लानत भेजते हैं, हमारे बारे में अनाप-शनाप बोलते रहते हैं उनसे मैं पूछना चाहता हूं कि आखिर आजादी के सत्तर साल बाद भी गांव के लोग 18वीं सदी का जीवन जीने पर क्यों मजबूर थे, बिना बिजली-बल्ब के अंधेरे में क्यों जी रहे थे.'

एक वीडियो के बारे में कहा जा रहा है कि उसमें राहुल गांधी वंदे मातरम गीत की अवमानना करते दिख रहे हैं. बंटवल की सार्वजनिक सभा का यह वीडियो वायरल हो चुका है. यह वीडियो भी मोदी के लिए मौके पर बड़े काम का साबित हुआ. माना जाता है कि इस वीडियो में राहुल गांधी अपनी कलाई घड़ी की तरफ इशारा करते हुए स्थानीय नेताओं से बोलते हैं कि वे गायक से वंदे मातरम गीत की सिर्फ एक पंक्ति गाने को कहें. वीडियो में यह भी दिखता है कि पार्टी नेताओं के कहने पर ही राहुल खड़े होने को तैयार होते हैं.

मोदी ने कहा, 'इन दिनों, कांग्रेस का नेतृत्व एक ऐसे आदमी के हाथ में है जिसे इतिहास का कोई बोध ही नहीं है. उसे तो अपने पार्टी के इतिहास के बारे में भी कोई अता-पता नहीं, यह भी नहीं मालूम कि खुद उसकी पार्टी के नेताओं ने क्या किया और कहा था.' इसके बाद मोदी ने राहुल गांधी पर हमला बोलने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी के 2005 के एक बयान का इस्तेमाल किया. इस बयान में कहा गया था कि साल 2009 तक देश के हर घर में बिजली पहुंचा दी जाएगी.

इसके बाद मोदी ने एक बार फिर से कामगार तबके की कठिन मेहनत और उसकी गरिमा की तरफ ध्यान दिलाया और कहा: 'आप मजदूर का मजाक, माखौल और बेइज्जती करते हो'. मोदी का मकसद एकदम साफ था : निम्न मध्यवर्ग और गरीब तबके के लोगों को भावनाओं को जगाओ, उनसे कहो कि सियासती खानदान से आने वाले राहुल जैसे लोगों के मन में इन लोगों के लिए कोई सम्मान नहीं है. यहां मोदी की मंशा जाति और समुदाय की सीमाओं के पार जाते हुए बीजेपी के पक्ष में व्यापक जमीन पर मतदाताओं को मोड़ने की थी.

ऐसा भी जान पड़ा कि राहुल गांधी ने जो चुनौती पेश की है उसे लेकर मोदी मजा ले रहे हैं. उन्होंने कहा- 'पहले वे 15 मिनट तक बोलकर दिखाएं' . राहुल ने कहा था कि मेरे भाषण के आखिर तक मोदी से बैठा ना जा सकेगा. राहुल की इस बात पर प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस के अध्यक्ष एकदम सही कह रहे थे. मोदी ने सवाल किया : आखिर कामदार किसी नामदार के सामने कैसे बैठा रह सकता है? मोदी की दलीलों का जोर इस बात पर था कि कामदारों को सदियों से नामदारों के दमन का सामना करना पड़ा है और चूंकि मोदी कामदार हैं सो वे राहुल जैसे नामदारों के आरोपों की परवाह नहीं करते.

Narendra Modiudupi

बीजेपी ने फैसला लिया था कि वह पार्टी की तरफ से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार बीएस येद्दुरप्पा के बेटे को टिकट नहीं देगी. मोदी ने मौके पर इस फैसले को भी भुनाया. कांग्रेस ने कई वरिष्ठ नेताओं के बेटे-बेटियों को टिकट दिया है. इसमें सिद्धरमैया के बेटे भी शामिल हैं. मोदी ने कांग्रेस के इस फैसले की कड़ी आलोचना की.

मोदी के मुताबिक, कांग्रेस ने 2+1 का फार्मूला(सिद्धरमैया दो सीटों से चुनाव लड़ रहे हैं और उनके बेटे यतीन्द्र एक सीट से मुकाबले में हैं) अपनाया है जबकि बाकी मंत्रियों के लिए 1+1 का फार्मूला लगाया गया है. मोदी इस चुनाव को ‘परिवारवाद की राजनीति बनाम जनता की राजनीति’ में तब्दील करना चाहते हैं.

बीजेपी ने मोदी से उम्मीद बांधी है कि वे पार्टी के पक्ष में मौहाल को मोड़ने में कामयाब होंगे और मोदी को लोगों में मौजूद अपने आकर्षण का भरोसा है जिसका जादू उन्होंने ‘नामदार बनाम कामदार’ की बहस खड़ी करके जगाने की कोशिश की है.

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