S M L

डोकलाम पर पीएम मोदी के तीखे हमले का जवाब कैसे देंगे राहुल?

राहुल के पास हिमाचल और गुजरात के चुनाव जीतकर मोदी को प्रतिक्रिया देने का मौका है. लेकिन, अगर वे नाकाम रहते हैं तो मोदी जंग का एक और दौर अपने नाम करने में सफल रहेंगे

Sanjay Singh Updated On: Nov 03, 2017 02:10 PM IST

0
डोकलाम पर पीएम मोदी के तीखे हमले का जवाब कैसे देंगे राहुल?

इस साल जून में जब भारतीय और चीनी फौजें डोकलाम में आंख से आंख मिलाए खड़ी थीं, तब से अब तक प्रधानमंत्री ने इस मामले पर एक शब्द भी नहीं बोला. उन्होंने सितंबर के पहले हफ्ते में ब्रिक्स समिट में शामिल होने के लिए चीन दौरे से पहले इस मसले का शांतिपूर्ण समाधान निकलने के बाद भी इस पर कुछ नहीं बोला.

एक बेहद जोखिम भरे हालात में मजबूती से डटे रहने के लिए उनकी काफी तारीफ हुई. बाद में चीन को भारतीय पक्ष के सामने झुकना पड़ा, लेकिन मोदी खामोश रहे और इस मसले को बहस के लिए एकेडेमिक्स, एक्सपर्ट्स और राजनीतिक पार्टियों पर छोड़ दिया.

पहली बार डोकलाम का जिक्र

कुछ दिन पहले मोदी ने पहली बार बेंगलुरु में डोकलाम का जिक्र किया और कांग्रेस पर इस मसले को लेकर झूठ फैलाने का आरोप लगाया. लेकिन इस मसले पर उन्होंने अपने हमले को हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में रैली के लिए संभालकर रखा. पहाड़ी राज्य को वीर भूमि भी कहा जाता है. इसकी वजह यहां के लोगों का बड़ी तादाद में सैन्य बलों में शामिल होना है. कांगड़ा में मोदी ने पहली बार डोकलाम मसले पर विस्तार से बात की और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी पर हमला किया.

rahul gandhi

राहुल गांधी पर आरोप लगता है कि वो संसद में मुद्दों से बेपरवाह बने रहते हैं

राहुल के बेसिक ज्ञान पर उठाया सवाल

मोदी ने जिस तरह से राहुल के ज्ञान, भारतीय संस्थाओं पर भरोसे और तीसरी बार सांसद बनने के बाद भी राष्ट्रीय मसलों पर उनकी चिंताओं पर सवाल उठाते हुए हमला किया है उससे कांग्रेस को सबसे ज्यादा चोट पहुंचेगी.

मोदी ने कहा कि देश पर शासन करने की इच्छा रखने वाली कांग्रेस का देश पर भरोसा नहीं है. डोकलाम में 72 दिन टिके रहना साहस, देशभक्ति और मुश्किल हालात में चीनी फौज के सामने आंख से आंख मिलाकर खड़े भारतीय सैनिकों के धैर्य का परीक्षण था. कुछ भी हो सकता था, लेकिन हमें सैनिकों के जज्बे और उनकी क्षमता और धैर्य पर भरोसा था.

हिमाचल चुनाव 2017: शाह बोले, कांग्रेस हिमाचल का विकास करने में सक्षम नहीं

लेकिन, एक शख्स (राहुल गांधी) जो कि 12-15 साल से संसद में हैं, जो कि शाही (राजनीतिक) परिवार में पैदा हुआ और पला, बढ़ा है और जिसके पिता, दादी और परदादा देश के प्रधानमंत्री रहे हैं, उसे देश की सरकार और सिस्टम पर भरोसा नहीं है. वह चाइनीज राजदूत से मिलते हैं ताकि यह जान सकें कि डोकलाम में क्या हो रहा है. ऐसा करके क्या उन्होंने (राहुल) देश और सैन्य बलों का अपमान नहीं किया? उनके मकसद सवालों के घेरे में हैं. क्या देश ऐसे शख्स पर भरोसा कर सकता है जिसके पास बेसिक ज्ञान भी नहीं है.

मोदी का हमलाः सड़ी सोच बनकर रह गई कांग्रेस

पीएम मोदी का राहुल पर अटैक केवल डोकलाम मसले तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने कांग्रेस उपाध्यक्ष का नाम लिए बगैर कहा कि उन्होंने कांग्रेस को घटाकर लाफिंग क्लब बना दिया है. मौजूदा नेतृत्व के तहत पुरानी पार्टी एक सड़ी हुई सोच पर सिमट कर आ गई है. कांग्रेस के लोग निश्चित तौर पर इसे उदारता से नहीं लेंगे. यह देखना होगा कि राहुल गांधी इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं.

2009 में संसदीय चुनावों के दौरान मोदी ने कांग्रेस को 125 साल की बुढ़िया कहा था. कांग्रेस और प्रियंका गांधी ने अमेठी में अपने कैंपेन में पूछा था, ‘क्या मैं बूढ़ी दिखती हूं...क्या सोनिया गांधी, राहुल गांधी या मैं आपको बूढ़ी दिखती हूं. मोदी ने तंज कसा है और अब मैं इस पार्टी को गुड़िया कांग्रेस कहूंगी.’ कांग्रेस ने चुनाव जीता और यह मसला वहीं खत्म हो गया. लेकिन, अब वक्त बदल गया है. कांग्रेस संसद, राज्यों की विधानसभाओं और पूरे देश के स्थानीय निकायों में बेहद कमजोर हो गई है.

फिर ताजा हुई सेक्लुयर, लिबरल्स की राहुल पर उम्मीद

यहां अहम बात यह है कि हालिया महीनों में मोदी का राहुल गांधी पर किया गया यह सबसे तीखा हमला है. ऐसा तब हुआ है जब तथाकथित सेक्युलर, लेफ्ट-लिबरल लेखकों और एनालिस्ट्स की एक बार फिर से राहुल गांधी में उम्मीद पैदा हो गई है. इस तबके का मानना है कि राहुल अब परिपक्व हो गए हैं और अपनी बात को जिस तरीके से रख रहे हैं उसमें वह मोदी को 2019 के आम चुनावों में टक्कर देने की हैसियत में हैं.

ये भी पढ़ें: हिमाचल में चुनाव लड़ रहे 47% उम्मीदवार हैं करोड़पति: ADR

राहुल के पास हिमाचल प्रदेश और गुजरात के चुनाव जीतकर मोदी को प्रतिक्रिया देने का मौका है. लेकिन, अगर वे ये दो राज्य जीतने में नाकाम रहते हैं तो मोदी जंग का एक और दौर अपने नाम करने में सफल रहेंगे.

Rahul Gandhi-Sonia Gandhi

व्यक्ति की बजाय संस्था पर चोट कर रहे मोदी

मोदी को पता है कि किसी इंडीविजुअल को निशाना बनाना लोगों के एक तबके को पसंद नहीं आएगा, ऐसे में उन्होंने इसे पूरे देश पर शासन कर चुकी मुख्य विपक्षी पार्टी से लिंक कर दिया है और उसे सड़ी हुई सोच वाला संस्थान बताया है, जो कि अब महात्मा गांधी और स्वतंत्रता सेनानियों की पार्टी नहीं है और जो अब चुनावी फायदे हासिल करने के लिए भ्रष्ट, वंशवाद, सांप्रदायिकता और जातिवाद बढ़ाने वाली पार्टी बनकर रह गई है. मोदी ने जवाहरलाल नेहरू को भी नहीं बख्शा.

उन्होंने कहा कि जब वह कांग्रेस मुक्त भारत की बात करते हैं तो वह उसे सड़ी हुई सोच से मुक्ति की बात करते हैं जिसका प्रतिनिधित्व मौजूदा वक्त की कांग्रेस करती है.

चिदंबरम के बयान की आलोचना

उन्होंने पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम की कश्मीर की स्वायत्तता की वकालत वाले बयान का भी जिक्र किया. उन्होंने पूछा कि उन्हें (चिदंबरम) यह हक किसने दिया कि वह देश की अखंडता के लिए शहादत देने वाले जवानों का अपमान करें. चिदंबरम के बयान से खुद को अलग करने के अलावा कांग्रेस ने अपने लीडर की पोजिशन पर कुछ भी नहीं कहा. आश्चर्यजनक तौर पर राहुल अपनी रैलियों में मोदी के नोटबंदी के फैसले की आलोचना करने के लिए चिदंबरम का काफी जिक्र करते हैं.

ये भी पढ़ें: राहुल ने मोदी सरकार को बताया कौरव, कहा- सच हमारे पक्ष में

हिमाचल में ‘देव भूमि’ के तौर पर जिक्र करते हुए मोदी ने देव और दानवों के बीच की लड़ाई के बारे में बताया. उन्होंने खनन माफिया, वन माफिया, ड्रग माफिया, टेंडर माफिया और ट्रांसफर माफिया को पांच दानव बताया और कहा कि मौजूदा कांग्रेस सरकार इन दानवों को प्रश्रय दे रही है.

बीजेपी के नेता मोदी के भाषण को सुनने आई भारी भीड़ को देखकर काफी संतुष्ट होंगे. बड़ी संख्या में आगे बैठी महिलाओं का रेस्पॉन्स काफी उत्साहजनक था.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
SACRED GAMES: Anurag Kashyap और Nawazuddin Siddiqui से खास बातचीत

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi